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बिहार में भाजपा को न यादव चाहिए, न मुसलमान ! नहीं बनाया मंत्री, NDA ने लालू के माई समीकरण से बनाई दूरी

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पटना

बिहार में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी ने अपने 7 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई, जिससे अब राज्य सरकार में बीजेपी के मंत्रियों की संख्या जेडीयू से अधिक हो गई। बीजेपी के कुल 21 मंत्री हो गए हैं, जबकि जेडीयू के पास सिर्फ 13 मंत्री हैं। लेकिन इस विस्तार में एक चौंकाने वाली बात यह रही कि बीजेपी ने अपने किसी भी यादव विधायक को मंत्री नहीं बनाया। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या बीजेपी ने यादव वोटबैंक को पूरी तरह आरजेडी के हवाले कर दिया है, या फिर वह गैर-यादव जातियों पर फोकस करते हुए कोई नई राजनीतिक रणनीति अपना रही है?

बिहार विधानसभा में यादव विधायकों की स्थिति
बिहार विधानसभा में यादव जाति के कुल 54 विधायक हैं, जिनमें से सबसे अधिक 35 विधायक आरजेडी के हैं। बीजेपी के पास 8, जेडीयू के 7, वाम दलों के 3 और कांग्रेस का 1 यादव विधायक है। आरजेडी के बाद बीजेपी के पास यादव विधायकों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है, लेकिन इसके बावजूद मंत्रिमंडल विस्तार में किसी भी यादव विधायक को शामिल नहीं किया गया।

सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए बीजेपी ने यादव जाति से आने वाली गायत्री देवी और एमएलसी नवल किशोर राय पर विचार किया था, लेकिन अंततः किसी भी यादव विधायक को मंत्री पद नहीं मिला।

बीजेपी की रणनीति: यादव वोट बैंक से दूरी?
बिहार में यादव समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है, और यह पारंपरिक रूप से आरजेडी का मजबूत वोट बैंक माना जाता है। पिछली जेडीयू-आरजेडी सरकार में 8 यादव मंत्री थे, लेकिन अब जेडीयू ने सिर्फ एक यादव को मंत्री बनाया है, और बीजेपी ने एक भी नहीं।

बीजेपी का यह निर्णय कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है। क्या पार्टी ने यादव समुदाय को पूरी तरह आरजेडी के हवाले कर दिया है? या फिर वह गैर-यादव जातियों को एकजुट करने की रणनीति अपना रही है?

मुसलमान को जगह नहीं
न सिर्फ यादव बल्कि भाजपा कोटे से किसी भी मुसलमान को मंत्री नहीं बनाया गया है. बिहार सरकार के जातिगत सर्वे के आंकड़े के मुताबिक़ बिहार की कुल आबादी 13 करोड़ है. इसमें 81.99 फ़ीसदी हिंदू और 17.70 फ़ीसदी मुसलमान हैं.वहीं 2020 में 19 मुस्लिम विधायक जीतकर आए. 2015 में नीतीश-लालू एक साथ थे तो मुस्लिम विधायकों की संख्या 24 पहुंच गई थी. हालाँकि भाजपा कोटे से किसी भी मुसलमान को मंत्री नहीं बनाया गया है.

जातिगत संतुलन और बीजेपी का मैसेज
बीजेपी ने इस मंत्रिमंडल विस्तार में ऊंची जातियों और अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं को अधिक तरजीह दी है। पार्टी की मौजूदा रणनीति इस बात को दर्शाती है कि वह यादव वोट बैंक की तुलना में अन्य समुदायों को अपने पक्ष में करने पर अधिक ध्यान दे रही है।

इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क ने कहा कि बीजेपी का मानना है कि यादव वोट तो सीधे आरजेडी को जाता है। ऐसे में क्यों न दूसरे वर्ग पर ही फोकस किया जाए। ताकि बिहार में ज्यादा सीटों पर पकड़ मजबूत हो, क्योंकि बीजेपी ने 2017 में जब सरकार बनी तो नंद किशोर यादव को मंत्री बनाया था। उन्हें राज्य का महत्वपूर्ण विभाग पथ निर्माण का जिम्मा सौंपा। हालांकि 2020 के चुनाव में बीजेपी को इससे ज्यादा फायदा नहीं मिला। ऐसे में बीजेपी ने दूसरी जातियों पर फोकस करना शुरू किया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह रणनीति उसके लिए फायदेमंद साबित होगी। क्या गैर-यादव वोटों के सहारे बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत कर पाएगी, या फिर यादवों की अनदेखी उसे चुनावी नुकसान पहुंचाएगी?

 

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