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सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए बीजेपी का ‘प्लान’ MP, गुजरात जैसा होगा बदलाव?

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भोपाल

2023 के विधानसभा चुनावों से पहले एमपी में संगठन और राज्य मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें हैं। इस बीच बीजेपी सत्ता विरोधी लहर को खत्म करने के लिए सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए एक चुनावी रणनीति अपना रहा है। इसका असर चुनावी परिणाम पर दिखेगा। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के पदाधिकारी ने बताया कि बीजेपी हार्डलाइनर नेताओं से भी सावधान है, जिनकी बातों से कुछ समुदायों में अपनी बात बिगड़ सकती है।

वहीं, केंद्रीय नेतृत्व ने शीर्ष पर संभावित परिवर्तनों के बारे में चुप्पी साध ली है। पिछले साल गुजरात में हुए बदलाव को देखते हुए एमपी में भी अटकलें तेज हैं। सत्ता विरोधी लहर को खत्म करने और वर्तमान सरकार के साथ असंतोष को कम करने के लिए राज्य नेतृत्व को पुनर्गठित किया जा सकता है। गुजरात में, मुख्यमंत्री और पूरे मंत्रिमंडल को पिछले वर्ष इस साल के अंत में होने वाले राज्य चुनावों से पहले बदल दिया गया था।

पार्टी लगातार एमपी में बैठकें आयोजित कर रही है। सबसे पहले रातापानी वन रिजर्व में बीएल संतोष की अध्यक्षता में व्यापक मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसमें पार्टी एससी और एसटी समुदायों से समर्थन कैसे प्राप्त करेगी, जो 2018 में बीजेपी से दूर हो गए थे। इस बैठक में चुनिंदा नेताओं को शामिल किया गया था। सीएम शिवराज सिंह चौहान, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा शामिल थे।

एससी और एसटी समुदायों पर ध्यान केंद्रित करने की बात करते हुए एक पदाधिकारी ने कहा कि केंद्र और राज्य की तरफ से कई सामाजिक कल्याण की योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके क्रियान्वयन में गैप था। साथ ही विपक्षी दलों ने यह नैरेटिव सेट किया है कि बीजेपी आरक्षण विरोधी है।

2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को काफी नुकसान हुआ था। 165 सीटों से पार्टी 109 पर पहुंच गई थी। वहीं, कांग्रेस को 56 सीटों का फायदा हुआ था। 114 सीटों लाकर एमपी में सरकार बना ली थी। एमपी विधानसभा में सदस्यों की संख्या 230 है। 2020 में तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत 22 अन्य लोगों के बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी वापस सत्ता में लौट आई थी। वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में परिणाम बिल्कुल विपरीत आए थे। बीजेपी ने 29 लोकसभा सीटों में से 28 पर जीत हासिल की थी।

वहीं, आदिवासी समुदायों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों में और अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में एक व्यापक आउटरीच शुरू हो चुकी है। चौहान सरकार बुलडोजर राजनीति की वजह से भी चर्चा है। पार्टी को डर है कि कही इसका सामाजिक रूप से नुकसान न हो जाए। वंचित समूह के लोग इससे नाराज न हो जाएं।

एक पार्टी पदाधिकारी ने कहा कि पार्टी नेताओं के एक वर्ग में यूपी जैसे तरीकों को अपनाने को लेकर चिंता है, जहां राज्य में अपराध के आरोपियों के घरों को ध्वस्त करने की नीति है। राज्य में मुसलमानों की संख्या 6.57 फीसदी, दलितों की संख्या 15.62 फीसदी और आदिवासी समुदायों की संख्या 21.2 फीसदी है। कार्रवाई से इन समुदायों पर प्रभाव पड़ने का डर है। पार्टी की चिंताओं को जयस और भीम आर्मी जैसे अन्य संगठनों ने बढ़ा दी है। इसके साथ ही अल्पसंख्यक समाज में अपनी पैठ रखने वाले संगठन भी है। ये लोग एससी, एसटी और बड़े हिंदू समुदाय के बीच अंतर को रेखांकित करते हैं।

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