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नीतीश के साथ नहीं चलेगी BJP की शिंदे वाली मनमानी, हैरान करने वाला है केजरीवाल का दिल्ली कनेक्शन

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पटना

देश में फिलहाल राजनीतिक दलों के दो बड़े गठबंधन हैं। एक ‘इंडिया’ तो दूसरा एनडीए। एनडीए सत्ता में हैं तो इंडिया ब्लॉक विपक्ष में। राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए का नेतृत्व भाजपा कर रही है तो विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की कमान कांग्रेस के हाथ में है। एनडीए में नेतृत्व को लेकर कोई खटपट राष्ट्रीय स्तर पर कभी नहीं दिखी, लेकिन ‘इंडिया’ में कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर बवाल मचा हुआ है। अलबत्ता बिहार में एनडीए का नेतृत्व बदल जाता है।

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सीएम नीतीश कुमार बिहार में एनडीए का नेतृत्व करते रहे हैं। गए तो वे इंडिया ब्लॉक में भी थे, लेकिन जल्दी ही उनका मन टूट गया। पर, लोकसभा चुनाव में जेडीयू के 12 सीटें जीतने के बाद इंडिया ब्लॉक उन पर डोरे डालता रहा है। भाजपा चाहे या न चाहे, पर नीतीश को छोड़ना उसके लिए मुनासिब लगता। यही वजह है कि नीतीश कुमार के दोनों हाथ में लड्डू है। वे इंडिया ब्लॉक को भी उतने ही पसंदीदा हैं, जितने एनडीए के।

अंबेडकर पर शाह के बयान से भड़के अरविंद
लोकसभा में संविधान पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान निर्माता बाबा भीम राव अंबेडकर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन दिनों अंबेडकर का नाम लेना फैशन हो गया है। जिसे देखो, वह अंबेडकर… अंबेडकर… अंबेडकर… अंबेडकर… अंबेडकर… अंबेडकर करते रहता है। इतना नाम भगवान का कोई ले तो स्वर्ग मिल जाएगा। शाह ने यह बात पूर्व की केंद्र सरकारों द्वारा अंबेडकर की उपेक्षा किए जाने के संदर्भ में कही। पर, विपक्ष ने इसे बतंगड़ बना कर नया नैरिटिव गढ़ने की कोशिश की कि अमित शाह ने अंबेडकर का अपमान किया है। अरविंद केजरीवाल कुछ ज्यादा भड़के हुए हैं।

अरविंद ने नीतीश कुमार को लिखी है चिट्ठी
कांग्रेस का आक्रोश देश भर में उसके प्रदर्शनों के रूप में आया। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव इसे लेकर अमित शाह के बारे में अपमानजनक शब्द कहने से नहीं चूके। पर, लोगों को आश्चर्य यह हुआ कि आनन-फानन आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने नीतीश कुमार को चिट्ठी लिख डाली। उन्होंने शाह की ओर से अंबेडकर का अपमान किए जाने के आरोप के साथ नीतीश कुमार से आग्रह किया कि अब उन्हें भाजपा का साथ छोड़ देना चाहिए। जाहिर है कि उनका इशारा भाजपा छोड़ इंडिया ब्लाक में लौट आने का था।

केजरीवाल साध रहे एक तीर से दो निशाने
अरविंद केजरीवाल की हड़बड़ी अब समझ में आने लगी है। उन्होंने नीतीश को पत्र लिख कर दो निशाने एक साथ साधे हैं। अव्वल तो उनकी यह कोशिश है कि नीतीश नाखुश होकर भाजपा से अलग हो जाएं। अलग होने पर इंडिया ब्लाक के साथ जाने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं होगा। भाजपा कमजोर होगी, यह अलग। अगले साल दिल्ली और बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं। नीतीश ने रुख बदला तो दिल्ली में बसे पूर्वांचल के लोगों को पटाने में केजरीवाल को आसानी होगी, जिनकी आबादी अच्छी-खासी है। बिहार में भी नीतीश इंडिया ब्लॉक के साथ गए तो भाजपा की हालत खराब होगी।

केजरीवाल की पूर्वांचली वोटरों पर है नजर
दिल्ली की कुल आबादी में एक चौथाई हिस्सा पूर्वांचल से जाकर वहां बसे लोगों की बताई जाती है। जहां तक वोटर का सवाल है तो पूर्वांचली मतदाता 40-42 प्रतिशत बताए जाते हैं। यही वजह है कि आम आदमी पार्टी (आप) में पूर्वांचल के नेताओं की भरमार है। मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे कई नेता आप में हैं। केजरीवाल की कोशिश इन्हीं पूर्वांचल वासियों को पटाने की है। नीतीश अगर भाजपा का साथ छोड़ते हैं तो यह बिहार के साथ दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी इंडिया ब्लाक के लिए अहोभाग्य होगा। नीतीश के बिना बिहार में न भाजपा कामयाब हो सकती है और न आरजेडी की अगुआई वाला इंडिया ब्लॉक। इसलिए दोनों उन्हें अपने साथ रखने को परेशान रहते हैं।राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि महाराष्ट्र में जिस तरह से बीजेपी ने नेतृत्व को अपने हाथों में रखने का फैसला लेकर शिंदे को झुकने के लिए मजबूर कर दिया, उस तरह का प्लान बिहार में सफल नहीं होगा।

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