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बृज यूनिवर्सिटी के कुलपति की ‘कुर्सी’ छिनी, भ्रष्टाचार का ‘राज’ खुला तो राज्यपाल ने किया सस्पेंड

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भरतपुर/जयपुर :

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे़ ने भरतपुर जिले के महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमेश चंद्र को सस्पेंड कर दिया है। उन पर विश्वविद्यालय में फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार करने के कई गंभीर आरोप लगे। इस मामले में भरतपुर संभागीय आयुक्त की प्राथमिक जांच में उन पर दोष प्रमाणित पाए गए। संभागीय आयुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही राज्यपाल ने सरकार से परामर्श कर कुलपति को सस्पेंड किया है। अब उनकी जगह त्रिभुवन शर्मा को कुलपति बनाया गया है।

संभागीय आयुक्त की जांच में वीसी दोषी प्रमाणित
महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफेसर रमेश चंद्र के खिलाफ विश्वविद्यालय के छात्र काफी समय से भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा करने के आरोप लगा रहे थे। इसको लेकर बीते दिनों राज्यपाल के सामने भी छात्रों ने वीसी पर आरोप लगाएं थे। छात्रों ने इसको लेकर राज्यपाल को लिखित में शिकायत भी दी। इसके बाद राज्यपाल के निर्देश पर भरतपुर के संभागीय आयुक्त ने मामले की जांच की। इस जांच में कुलपति पर फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार करने के आरोप प्रमाणित हुए। इसको लेकर संभागीय आयुक्त ने राज्यपाल को अपनी रिपोर्ट प्रेषित की। इसके बाद राज्यपाल ने सरकार से सलाह लेकर कुलपति को सस्पेंड कर दिया हैं।

राज्यपाल के सामने भी वीसी पर लगे थे ‘पैसे’ वाले गंभीर आरोप
बता दें कि गत 11 मार्च को राज्यपाल महाराजा सूरजमल बृज यूनिवर्सिटी का निरीक्षण करने पहुंचे, जहां उनकी मौजूदगी में पूर्व छात्र नितेश चैधरी ने कुलपति रमेश चंद्र पर गंभीर आरोप लगाए। दोनों राज्यपाल के सामने ही झगड़ने लगे। छात्र ने राज्यपाल के सामने यहां तक कह दिया था कि कुलपति तो पैसे कमाने आए हैं। इससे पहले भी 24 सितंबर 2024 को बीए की डिग्री कैंसिल करने के मामले में एक छात्र विष्णु खमेरा ने कुलपति का रास्ता रोक दिया था और उनसे सवाल पूछा कि आपने मेरी डिग्री कैसे कैंसिल कर दी, तब से वीसी रमेश चंद्र की कार्यशैली सवालों के घेरे में थी।

कुलपति को 2 साल पहले किया गया था नियुक्त
विश्वविद्यालय के कुलपति रमेश चंद्र को 2 साल पहले नियुक्त किया गया था, लेकिन इस दौरान उनका कार्यकाल काफी विवादों से भरा रहा। राज्यपाल ने उन्हें 8 मार्च 2023 को बृज विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया था, लेकिन इस कार्यकाल में कुलपति पर फर्जीवाड़ा करने और भ्रष्टाचार को लेकर कई गंभीर आरोप लगे। यहां तक की छात्रों की डिग्रियां कैंसिल करने के भी मामले सामने आए। इसको लेकर छात्रों ने राज्यपाल को लिखित में भी शिकायत की थी।

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