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ब्रिटेन की भारतीय मूल की गृह मंत्री ने ही भारत के खिलाफ खोला मोर्चा

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नई दिल्ली,

ब्रिटेन की गृह मंत्री और भारतीय मूल की नेता सुएला ब्रेवरमैन ने ही भारत के साथ ब्रिटेन के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का विरोध किया है. उनका कहना है कि इससे ब्रिटेन में भारतीयों की भीड़ बढ़ सकती है. ये बयान उन्होंने ब्रिटेन के बर्मिंघम में कंजर्वेटिव पार्टी के वार्षिक सम्मेलन के ठीक बाद दिया है जिसमें उन्हीं की पार्टी की नेता केमी बैडेनओच ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने का ऐलान किया था.

केमी बैडेनओच ने दो दिन पहले ब्रिटेन के बर्मिंघम में कंजर्वेटिव पार्टी के वार्षिक सम्मेलन में भारत के साथ ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ FTA पर जताई गई चिंताओं को दूर करते हुए ये ऐलान किया था. प्रधानमंत्री लिज ट्रस की अगुवाई वाली सरकार में एफटीए पर बातचीत की प्रभारी बैडेनओच ने इस दौरान साफ किया था कि ब्रिटेन की नई सरकार भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अपनी तय समय-सीमा तक खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.

वहीं, इससे पहले ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस ने भी कहा था कि वो इस महीने के अंत तक भारत के साथ FTA पर हस्ताक्षर करना चाहती हैं. भारत सरकार लंबे समय से भारतीय नागरिकों के लिए ब्रिटेन में काम करने और स्टडी वीजा बढ़ाने की मांग कर रही है और इस समझौते से ब्रिटेन में भारतीयों की एंट्री आसान हो सकती है.

भारत के साथ समझौते पर ब्रेवरमैन को आपत्ति
ब्रिटिश मैगजीन ‘द स्पेक्टेटर’ को दिए एक इंटरव्यू में ब्रेवरमैन ने कहा कि भारतीय प्रवासियों की संख्या ब्रिटेन में अपनी वीजा की अवधि से अधिक समय बिताने वाले लोगों में सबसे ज्यादा है. गृह मंत्री ने भारत के साथ पिछले साल हुए उस समझौते की भी आलोचना की जिस पर उनकी पूर्ववर्ती प्रीति पटेल ने हस्ताक्षर किए थे. उन्होंने दावा किया कि इससे देश में अवैध प्रवासियों और वीजा से अधिक समय बिताने वाले लोगों की संख्या में बहुत इजाफा हुआ था.

समझौते के खिलाफ क्यों बोलीं ब्रेवरमैन
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2020 में 20,706 भारतीयों ने यूके में अपने वीजा से अधिक समय बिताया जो संख्या बाकी देशों के नागरिकों की तुलना में अधिक है. 2020 में 473,600 भारतीयों में जिनके वीज़ा 12 महीनों के अंदर समाप्त होने वाले थे, उनमें 4,52,894 लोगों ने तो ब्रिटेन छोड़ दिया था लेकिन इनमें 4.4 फीसदी लोगों ने ओवरस्टे किया.

ब्रेवरमैन ने स्पेक्टेटर से कहा, ‘मैं भारतीयों के लिए ब्रिटेन की सीमा खोलने वाली इस नीति को लेकर काफी चिंतित हूं क्योंकि मुझे नहीं लगता कि लोगों ने इसलिए ब्रेग्जिट के लिए वोट किया था.’

ये पूछे जाने पर कि क्या वो ऐसे समझौते का समर्थन करेंगी जिसमें छात्रों और उद्यमियों के लिए नियमों को लचीला किया जाए, इस पर उन्होंने कहा, ‘मुझे इस पर कुछ आपत्ति है. अगर हम ब्रिटेन में इमिग्रेशन की स्थिति को देखें तो यहां वीजा खत्म होने के बाद भी सबसे ज्यादा समय बिताने वाले लोग भारतीय हैं. इस मामले में हमने पिछले साल भी भारत सरकार के साथ एक समझौता भी किया था. मुझे नहीं लगता कि इससे बहुत फर्क पड़ा.’

ब्रेवरमैन ने इससे पहले भी अपने इरादे साफ कर चुकी हैं कि वो ब्रिटेन में प्रवासियों की लाखों की भीड़ को सीमित करने पर काम करेंगी जो पिछली कंजर्वेटिव सरकारें नहीं कर पाईं.ब्रेवरमैन के इस बयान पर उन्हीं की सरकार से जुड़े एक सूत्र ने बताया, ‘किसी को नहीं पता कि उन्होंने ये टिप्पणियां क्यों कीं. जब थेरेसा मे गृह मंत्री थीं तो उनकी आलोचना करने के लिए भी ऐसी बातें बार-बार दोहराई जाती थीं.

ब्रेवरमैन ने ब्रिटेन को ECHR से अलग होने का दिया सुझाव
ब्रेवरमैन ने इस दौरान ब्रिटेन से यूरोपियन कन्वेन्शन ऑन ह्यूमन राइट्स (ECHR) को छोड़ने का भी आह्वान किया है, जबकि उनकी सरकार इस सम्मेलन से जुड़ा रहना चाहती है.

 

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