नई दिल्ली
चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। अदालत में रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह पहुंच गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वायरल वीडियो में देखे गए उनके आचरण के बारे में सफाई देने के लिए कहा था। सुनवाई के दौरान सीजेआई मे पूछा कि मेयर ने इस्तीफा दे दिया है या नहीं? वहीं सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप से बचने के लिए आप हाई कोर्ट से रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में काम करने के लिए अधिकारी को नियुक्त करने का अनुरोध कर सकते हैं।
याचिकाकर्ता ने कहा उन्हीं मतपत्र को वैलिड माना जाए
इस मामले में याचिकाकर्ता ने कहा कि ऐसे दो उदाहरण हैं जब मतपत्र को अवैध मानकर खारिज किया जा सकता है। पहला, कागज पर एक निशान होता है जिससे मतदाता पहचान करता है। दूसरा यह कि वोट क्रॉस से इस तरह से किया जाता है कि यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि वोट किसके पक्ष में है। आम आदमी पार्टी के मेयर प्रत्याशी (याचिकाकर्ता) ने कहा कि हमारा पॉइंट ये है कि क्या रिटर्निंग अधिकारी के निशान से मतपत्र अवैध हो जाएंगे। नए सिरे से चुनाव कराने के बजाय, वर्तमान मतपत्रों की गिनती की जा सकती है, निशानों की परवाह किए बिना।
कितने बैलेट पेपर और पार्षद हैं: सीजेआई
इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अदालत में याचिका दोबारा चुनाव कराने के लिए दायर की गई थी। सीजेआई ने पूछा कि हमारे पास कितने मतपत्र हैं? याचिकाकर्ता ने बताया 36। फिर सीजेआई ने पूछा कि कितने पार्षद हैं? याचिकाकर्ता ने बताया कि 35 पार्षद और एक सांसद हैं, जिनके पास निर्णायक वोट है। सीजेआई ने पूछा कि क्या सभी 36 मतपत्र मौजूद हैं? याचिकाकर्ता ने कहा, हां। उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें इस बात का डर पहले से था कि इससे विधायकों की खरीद-फरोख्त होने वाली है और अब वही हुआ है।
