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Thursday, April 23, 2026
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चीन 1, अमेरिका 2, भारत 3… इस लिस्‍ट के टॉपर्स पर पड़ेगा असर, 100 देशों ने क‍िया है ये क‍िस डील का समर्थन?

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नई दिल्‍ली

प्लास्टिक प्रदूषण पर रोक लगाने की एक अंतरराष्ट्रीय संधि बनाने की कोशिशें जारी हैं। बुसान में इसे लेकर हुई बैठक में 100 से ज्‍यादा देश प्लास्टिक उत्पादन को सीमित करने वाले समझौते के समर्थन में हैं। लेकिन, कुछ तेल उत्पादक देश चाहते हैं कि संधि सिर्फ कचरे पर केंद्रित हो। इस वजह से बातचीत में तनाव बना हुआ है। प्लास्टिक प्रदूषण एक ग्‍लोबल समस्या बन चुका है। इसे रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की जरूरत महसूस की गई है। अगर संधि में प्लास्टिक उत्पादन पर सीधे प्रतिबंध लगे तो पॉलीमर उत्पादक देशों को नुकसान हो सकता है। पॉलीमर उत्पादक देशों को प्लास्टिक के विकल्प खोजने होंगे। डेटा प्रदाता यूनोमिया के अनुसार, 2023 में चीन, अमेरिका, भारत, दक्षिण कोरिया और सऊदी अरब टॉप पांच प्राइमरी पॉलीमर उत्पादक देश थे।

रविवार तक संधि के मूल दायरे पर देशों में मतभेद बने रहे। पनामा ने एक विकल्प प्रस्तावित किया। इसका 100 से अधिक देशों ने समर्थन किया। यह विकल्प ग्‍लोबल प्लास्टिक उत्पादन में कमी का टारगेट तय करता है। लेकिन, एक दूसरा विकल्प भी है जो उत्पादन पर कोई सीमा नहीं लगाता।

सऊदी अरब ने क‍िया कड़ा व‍िरोध
कुछ वार्ताकारों ने कहा कि शनिवार रात तक कुछ चुनिंदा देश अपनी मांगों पर अड़े रहे। सऊदी अरब जैसे कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पादक देशों ने प्लास्टिक उत्पादन को लक्षित करने के प्रयासों का कड़ा विरोध किया है। बातचीत में देरी करने के लिए प्रक्रियात्मक रणनीति का इस्तेमाल करने की कोशिश की है।

प्लास्टिक प्रदूषण गंभीर वैश्विक समस्या है। यह न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा है। माइक्रोप्लास्टिक खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रहा है और हमारे शरीर में भी पाया जा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए वैश्विक समाधान की आवश्यकता है। इसलिए यह संधि बहुत महत्वपूर्ण है।

भारत पर क्या असर पड़ेगा?
हालांकि, भारत भी एक बड़ा प्लास्टिक उत्पादक देश है। इस संधि से भारत पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। भारत को प्लास्टिक उत्पादन को कम करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। इसके साथ ही, भारत को प्लास्टिक के विकल्पों पर भी ध्यान देना होगा। प्लास्टिक उत्पादन पर अगर प्रतिबंध लगा तो इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इस सेक्‍टर में काफी लोग काम करते हैं। वैसे, पॉलीमर उत्पादक देशों के पास नई तकनीकों को विकसित करने का अवसर होगा, जो प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकें। पॉलीमर बड़े अणु होते हैं जो छोटे-छोटे अणुओं (मोनोमर) की लंबी चेन से मिलकर बने होते हैं। ये चेन एक-दूसरे से जुड़कर प्लास्टिक जैसी ठोस सामग्री बनाती हैं।

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