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भारत के नजदीक परमाणु पनडुब्बी तैनात करेगा चीन! ड्रैगन के हिंद महासागर वाली साजिश का खुलासा

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बीजिंग

चीन इन दिनों भारत के नजदीक परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती की योजना बना रहा है। इसके लिए वह लगातार भारत के नजदीक के समुद्री इलाकों का सर्वेक्षण भी कर रहा है। पिछले दो-तीन वर्षों से चीनी समुद्री सर्वेक्षण जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं। हालांकि, चीन का दावा है कि ये जहाज समुद्र में वैज्ञानिक अनुसंधान कर रहे हैं, लेकिन भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों को इस दावे पर शक है। चीनी जहाजों के हाल के सर्वेक्षण के दौरान अपनाए गए रास्तों से पता चलता है कि वे भारत की घेराबंदी करने के लिए समुद्री इलाकों की पहचान कर रहे हैं।

भारत के करीब मौजूदगी क्यों बढ़ाना चाहता है चीन
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति के पीछे कई कारक हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण अपने सबसे शक्तिशाली दुश्मन भारत को घेरने की है। वहीं दूसरा कारक, इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले चीनी व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करना है। चीन को डर है कि युद्ध के समय भारत या अमेरिका जैसे देश हिंद महासागर की घेराबंदी कर चीनी व्यापार और तेल-गैस की आपूर्ति को बाधित कर सकते हैं। ऐसे में वह अपने हितों की रक्षा के लिए परमाणु पनडुब्बियों के अलावा एक एयरक्राफ्ट कैरियर को भी स्थायी रूप से तैनात करने की योजना बना रहा है।

परमाणु पनडुब्बियों पर दांव क्यों लगा रहा चीन
चीन, भारत को घेरने के लिए जानबूझकर परमाणु पनडुब्बियों पर दांव लगा रहा है। चीन के पास छह परमाणु पनडुब्बियां हैं, लेकिन वह करीब 50 परमाणु पनडुब्बियों के निर्माण का लक्ष्य लेकर चल रहा है। परमाणु पनडुब्बियां समुद्र की गहराइयों में आसानी से लंबे समय तक छिप सकती हैं। ऐसे में उन्हें डिटेक्ट करना आसान नहीं होगा। ये पनडुब्बियां हमले के साथ ही दुश्मन के इलाके की जासूसी भी कर सकती हैं। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर दुश्मन के इलाके से निकलकर अंततराष्ट्रीय जल क्षेत्र में भी जा सकती हैं।

भारत ने भी कर रखी है पूरी तैयारी
चीन की परमाणु पनडुब्बियों से निपटने के लिए भारत ने भी पूरी तैयारी कर रखी है। हाल में ही भारत ने अपनी दूसरी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिघात को लॉन्च किया है। इसके अलावा दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए भारतीय नौसेना ने अधिक उन्नत समुद्री गश्ती विमानों का एक बड़ा बेड़ा भी तैयार किया है, जिसमें अमेरिकी पी-8आई पोसाइडन विमान शामिल हैं। ड्रोर्नियर विमान, एमक्यू-9 रीपर ड्रोन जैसे समुद्री निगरानी उपकरण भी दुश्मन की पनडुब्बियों पर नजर बनाए हुए हैं। भारत ने मित्र देशों के साथ भी चीनी पनडु्ब्बियों की निगरानी के लिए समझौता किया है। इसके अलावा मलक्का जलडमरूमध्य से गुजरने वाली चीनी पनडुब्बियों की भी निगरानी की जा रही है।

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