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तेलंगाना में आ रही है कांग्रेस सरकार, भाजपा को मिले संकेत तो बदली दक्षिण भारत की रणनीति

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नई दिल्ली

भाजपा ने दक्षिण के राज्यों को लेकर अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव किया है। हाल के चुनावी सर्वेक्षणों से भाजपा को यह संकेत मिला है कि तेलंगाना में कांग्रेस वापसी कर रही है। वह के. चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (TRS का नया नाम) के करीब है।हाल ही में अमित शाह ने केसीआर के बेटे केटी रामा राव (KTR) से मुलाकात की। केटीआर ने राजनाथ सिंह से भी बातचीत की। दोनों पार्टियों के बीच संघर्ष विराम आम दुश्मन यानी कांग्रेस से लड़ने के लिए है। सौदेबाजी में केसीआर की बेटी के. कविता के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप ठंडे बस्ते में डाले जाने की संभावना है।

आंध्र प्रदेश में टीडीपी से गठबंधन की तैयारी में भाजपा
इस बीच पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू भाजपा के साथ अपना गठबंधन पक्का कर रहे हैं। नायडू से कनेक्शन मजबूत करने के लिए भाजपा के लिंक पर्सन डी. पुरंदेश्वरी हैं, जिन्हें पिछले हफ्ते आंध्र प्रदेश में पार्टी का प्रमुख नियुक्त किया गया था।

वह इस काम के लिए सबसे उपयुक्त हैं क्योंकि नायडू उनकी बहन के पति हैं। टीडीपी और बीजेपी को पवन कल्याण की जेएसपी के साथ समझौता होने की उम्मीद है, जो कापू समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि टीडीपी कम्मा समुदाय की पार्टी है। मोदी फैक्टर के अलावा इन राज्यों नें भाजपा का योगदान बहुत कम है।

भाजपा के कई दांव उल्टा पड़ने लगे हैं
पुराने रिश्तों को तोड़ने के परिणामों पर विचार किए बिना नए चेहरों को हथियाने की भाजपा की हालिया नीति चुनावों में उल्टी पड़ सकती है। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सेना में पुराने प्रतिद्वंद्वी अजीत पवार के डिप्टी सीएम के रूप में अचानक आगमन को लेकर बड़ी नाराजगी है । तेलंगाना में भाजपा आलाकमान के यू-टर्न लेने और केसीआर के साथ तालमेल बिठाने के साथ, भाजपा में हाल ही में शामिल हुए कई नेता निराश होकर वापस अपनी पूर्व पार्टियों में शामिल हो रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में अर्जुन सिंह और मुकुल रॉय जैसे टीएमसी दलबदलू पहले ही बीजेपी छोड़ चुके हैं। यहां तक कि अनुभवी सांसद दिनेश त्रिवेदी, जिन्होंने 2021 में टीएमसी से इस्तीफा दे दिया था और बीजेपी में शामिल होने के लिए पांच साल की टीएमसी राज्यसभा सीट का त्याग कर दिया था, उन्हें भी लगता है कि वह अधर में छोड़ दिए गए हैं।

त्रिवेदी को जिस राज्यसभा सीट का वादा किया गया था उसकी जगह कूचबिहार के स्वयंभू “महाराज” और अलगाववादी नेता अनंत राय को दी गई है। भाजपा ने त्रिवेदी को सूचित करने का भी शिष्टाचार नहीं दिखाया। राय अपने गृह क्षेत्र में भाजपा के लिए जो भी वोट जीतेंगे, उसका नकारात्मक जवाब दक्षिण बंगाल उन्हें देगा, क्योंकि वह उत्तर बंगाल को अलग राज्य बनाने की मांग करते रहे हैं।

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