नई दिल्ली
दिल्ली में विधानसभा चुनाव की हलचल के बीच यमुना के पानी में जहर का मामला गरमा गया है। चुनाव आयोग (EC) ने अरविंद केजरीवाल को नोटिस भेजा है। यह नोटिस हरियाणा की ओर से यमुना के पानी को जहरीला करने के उनके आरोपों पर है। केजरीवाल ने दावा किया था कि अगर दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने जहर नहीं पकड़ा होता, तो सामूहिक नरसंहार हो सकता था। EC ने चिंता जताई है कि ‘केजरीवाल के आरोपों से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इनमें क्षेत्रीय समूहों के बीच दुश्मनी, पड़ोसी राज्यों के निवासियों के बीच तनाव और पानी की कमी के कारण कानून-व्यवस्था की समस्याएं शामिल हैं। EC ने केजरीवाल से कल शाम 8 बजे तक सबूत देने को कहा है।’
केजरीवाल पर हो सकती है कानूननी कार्रवाई
नोटिस में कानून की कई धाराओं का जिक्र है। इनमें BNS धारा 196 (रहने की जगह के आधार पर दुश्मनी फैलाना), धारा 197 (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप), और धारा 353 (जनता को गुमराह करना) शामिल हैं। इन सभी धाराओं में तीन साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(4) भी लगाई जा सकती है। EC ने DJB की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। इस रिपोर्ट में यमुना के पानी में जहर की कोई बात नहीं है। ना ही दिल्ली सीमा पर जहरीले पानी को रोकने के लिए किसी कार्रवाई का जिक्र है।
क्या है मामला?
EC ने कहा है कि केजरीवाल को अपने आरोपों के लिए सबूत देने होंगे। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। यह मामला दिल्ली और हरियाणा के बीच पानी के बंटवारे से जुड़ा है। इससे पहले भी दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर कई बार विवाद हो चुका है। देखना होगा कि केजरीवाल EC के नोटिस पर क्या जवाब देते हैं। क्या वे अपने दावों के सबूत दे पाएंगे या नहीं, यह आने वाला समय ही बताएगा। इस मामले पर दोनों राज्यों के लोगों की नज़र है।
