मोरबी
गुजरात के मोरबी पुल हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। 140 साल से भी ज्यादा पुराना पुल रेनोवेशन के कुछ दिन बाद ही ढह गया। हादसे में जान गंवाने वाले 135 लोगों के शव अब तक मिल चुके हैं। इस हादसे ने गुजरात के लोगों को वह दर्द दिया है जिसे शायद ही वह कभी भूल पाएंगे। किसी का पूरा परिवार इस हादसे में चला गया तो कोई अपने मां-बाप को खो चुका है। कोई अपने बच्चों की तस्वीर दिखाकर उस पल को कोस रहा है जब उसने उन्हें उस मौत के पुल पर जाने दिया। मोरबी के अस्पताल में एंबुलेंस के सायरन की आवाज लगातार गूंज रही हैं। हादसे में अपनों को खोने वालों के चीख-पुकार से माहौल गमगीन है।
हादसे ने पूरा परिवार छीन लिया
आरिफ शमदार ने इस हादसे में अपनी पत्नी और दो बच्चों को खो दिया है। वह फोन पर उनकी तस्वीर दिखाते हुए रो पड़ते हैं। कहते हैं, ‘जिनसे मैं बेहद मोहब्बत करता था, वो सभी हादसे में छिन गए।’ शमदार की पत्नी अनीसा और दोनों बच्चे आलिया और अफरीद ने रविवार को पुल हादसे में जान गंवा दी।
साथ में रहे, साथ में खेले, मौत भी एकसाथ
12 साल के यश देवदाना (बाएं) और उनके चचेरे भाई राज भगवानजी (13) ने भी हादसे में जान गंवा दी। मोरबी में उनके घर के बाहर उनकी तस्वीर रखकर माला चढ़ाई गई। यश और राज एक ही घर में रहते थे। वह अच्छे दोस्त भी थे। साथ में ही खेलते थे। उन्हें तैरना पसंद था और अक्सर मच्छू नदी में घूमने जाया करते थे।
खुद की जान बच गई लेकिन परिवार बह गया
नसीमा बेन शमदार (40) पुल हादसे में बच गईं लेकिन उन्होंने अपनी बेटी मुस्कान (21), दो भतीजे-भतीजियां और दो ननद को हमेशा के लिए खो दिया। नसीमा अपने परिवार के साथ संकरे केबल पुल पर टहलने गई थीं। रविवार शाम साढ़े छह बजे हादसा हुआ नसीमा ने आंखों के सामने ही अपनों को खो दिया।
रातभर खोदी गईं कब्र, श्मशान में जलीं लाशें
अनिश्क मकवाना ने इस हादसे में भतीजे, दादी और एक रिश्तेदार को खो दिया। रातभर कब्र खोदकर उन्हें दफनाया गया। रविवार को हुए हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। साथ ही ढेरों सवाल भी उठ रहे हैं कि ब्रिटिश काल में बना यह पुल मरम्मत के पांच दिन बाद ही कैसे ढह गया।
हादसे ने दिया जिंदगी भर का जख्म
आरिफ शमदार उस पल को भूल नहीं पा रहे हैं जब उनकी पत्नी और बच्चे उनके आखिरी बार विदा हुए थे। तीनों मच्छू नदी पर बने पुल पर घूमने जा रहे थे। फेस्टिवल सीजन में हुए इस हादसे ने जिंदगी भर का जख्म दे दिया है। दोस्तों ने दोस्त खो दिए। मां-बाप ने बच्चों को खो दिया। कहीं तो पूरा परिवार ही हादसे में बह गया।
