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पिता धूमल इस बार पहाड़ के मैदान से बाहर… पहली रैली में अनुराग ठाकुर के क्यों छलके आंसू?

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सुजानपुर

हिमाचल प्रदेश की सुजानपुर विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भावुक हो गए। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल अनुराग ठाकुर के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल इस बार हिमाचल चुनाव से बाहर हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने खुद ही चुनाव लड़ने से इनकार किया था। पिछली बार वह मुख्यमंत्री चेहरा होने के बावजूद सुजानपुर सीट से हार गए थे।

अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने बीजेपी कार्यकर्ताओं और संगठन को मजबूत बनाने के लिए पूरा जीवन लगाया है। पार्टी का हर कार्यकर्ता धूमल ने एक लड़ी में पिरोया और संगठन को मजबूत बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए हैं।’ केंद्रीय सूचना प्रसारण व खेल मंत्री अनुराग ठाकुर सुजानपुर चौगान में बीजेपी प्रत्याशी कैप्टन रणजीत सिंह के नामांकन पत्र दाखिल करने के अवसर के दौरान जनसभा संबोधित कर रहे थे।

इस दौरान अनुराग ठाकुर की आखों से आंसू छलके तो बीजेपी कार्यकर्ता भी उनके साथ खूब रोए। अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘मैं आपकी भावनाओं को बहुत अच्छी तरह समझता हूं। जिस नेता के साथ आप लोगों ने पार्टी के युवा मोर्चा से लेकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तक काम किया वह भावना बहुत अलग है। वह एक परिवार की भावना है। यह बहुत कम जगह आपको देखने को मिलेगा।’

अनुराग ठाकुर ने आगे कहा,’हम तो अपने आपको सौभाग्यशाली समझते हैं कि ऐसे जिले में हमारा जन्म हुआ, ऐसी लोकसभा सीट से हमें लड़ने का अवसर भी मिला। जहां पर आप जैसे कार्यकर्ता हैं। एक बार नहीं चार बार आपने मुझे ऐसा अवसर प्रदान कराया। धूमल जी को मुख्यमंत्री आपने बनाया।’

अनुराग ठाकुर ने भावुक कार्यकर्ताओं का उनके परिवार को दिए गए सम्मान और प्रेम के लिए आभार व्यक्त किया। अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘छोटे से जिला हमीरपुर से मेरे पिता को मुख्यमंत्री और मुझे केंद्रीय मंत्री बनाया है। जिस मंत्रालय में मैं केंद्रीय मंत्री हूं उस पद पर कभी देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, चंद्रशेखर, लालकृष्ण आडवाणी सहित कई नेता सेवाएं दे चुके हैं।’

गौरतलब है कि बीजेपी के दिग्गज नेता प्रेम कुमार धूमल भी इस बार चुनावी मैदान में नहीं होंगे। धूमल ने इस बार खुद चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। धूमल ने कहा कि वो चाहते हैं कि अब युवाओं को चुनाव लड़ाया जाए और उन्हें मौका दिया जाए। धूमल ने 1998 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था, तब से वह चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाल रहे थे। वह दो बार सांसद भी रह चुके हैं। इस बार उन्होंने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है। हालांकि वह पार्टी के लिए काम करेंगे। वर्ष 1989 में लोकसभा का चुनाव जीता था और वर्ष 1998 में मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2007 से 2012 तक फिर मुख्यमंत्री बने।

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