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Monday, April 27, 2026
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गुजरात में पहले क्षत्रिय आंदोलन, अब तीर्थंकर की पुरानी मूर्ति से तोड़फोड़ पर भड़का जैन समाज, जिम्मेदार कौन ?

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अहमदाबाद

गुजरात बीजेपी का अभेद्य गढ़ है। इसमें कोई दोराय नहीं है लेकिन लोकसभा चुनावों में भड़के क्षत्रिय आंदोलन से भले ही बीजेपी को सीटों में ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था लेकिन बीजेपी राज्य में क्लीन स्वीप करने से चूक गई थी। इतना ही नहीं सभी सीटों को पांच लाख मतों से जीतने का ख्वाब भी टूट गया था। क्षत्रियों की नाराजगी के बाद अब राज्य में जैन समाज आक्रोशित है। वडोदरा के पड़ोसी जिले पंचमहाल में स्थित पावागढ़ में तीर्थंकर की सैकड़ों साले पुरानी मूर्तियां तोड़ने और उन्हें हटाने जाने पर शुरू हुआ विवाद थम नहीं पा रहा है। जैन समाज का कहना है कि ऐसा क्यों है कि राज्य में बार-बार जैन समाज को अपने तीर्थ स्थान बचाने के लिए सड़कों पर उतराना पड़ा था। इस पूरे विवाद में सवाल खड़ा हो रहा है कि जिम्मेदारों ने जैन धर्म की मूर्तियों के प्रति इतनी असंवेदनशीलता क्यों दिखाई? जिसके चलते सरकार को एक नई परेशानी खड़ी हुई।

क्यों है देषभरी दृष्टि?
पावागढ़ में मां काली को शक्तिपीठ माना जाता है। पिछले सालों के इस पीएम नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरुप विकसित करने का काम चल रहा है। हाल में इस शक्तिपीठ की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर कुछ जैन धर्म की मूर्तियां थीं। जिन्हें मंदिर ट्रस्ट ने हटा दिया। इसकी सूचना जैसे ही जैन समाज के लोगों और संतों को मिली तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। आंदोलन देखते ही देखने देशव्यापी हो गया। जैन समाज के संतों का आरोप है कि मंदिर ट्रस्ट ने बिना किसी सूचना के इन मूर्तियों हटा दिया। संतोंं का कहना है। इस घटना से समाज में आक्रोश है। संतों का कहना है कि जैन समाज को अपने प्रतीकों को बचाने के सड़क पर उतरना पड़ रहा है। ऐसी देष भरी दृष्टि क्यों है?

जैन समाज में भारी नाराजगी
जैन समाज ने सरकार के समाने मांग रही है कि जिन लोगों ने मूर्तियां तोड़ीं, उन्हें अपवित्र किया। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। जैन समाज की नाराजगी के साथ राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने इस पूरे मामले पर संज्ञान लिया है। पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि हिंदुत्व के गढ़ में जैन धर्म की मूर्तियों के साथ ऐसा सलूक करने से पहले मंदिर ट्रस्ट ने असंवेदनशीलता क्यों दिखाई? एक गैरजरूरी विवाद खड़ा हुआ है। जिसकी गुजरात समेत पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। पावागढ़ जैन मंदिर के ट्रस्टी दीपक शाह कहते हैं दोषियों के खिलाफ हमारी पहली मांग है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। इसके हमने मांग रखी है कि इन मूर्तियों को पवित्र करने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही इन मूर्तियों तक जाने और पूजा करने के लिए अलग से गेट लगाकर अनुमति दी जाए। शाह ने कहा कि मूर्तियों को दोबारा स्थापित किया जा रहा है। संतों की टीम इन मूर्तियों का रिव्यू करेगी।

पावागढ़ एक ऐतिहासिक भूमि है। पावागढ़ के पहाड़ों पर कई जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां स्थापित की गई थीं। किसी भी ट्रस्ट, संगठन या व्यक्ति को ऐसी ऐतिहासिक मूर्तियों और धार्मिक स्थलों को ध्वस्त करने का अधिकार नहीं है। गुजरात के सीएम ने सुनिश्चित किया है कि जैनियों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। इन मूर्तियों को उनके मूल स्थानों पर फिर से स्थापित किया जाना चाहिए… कुछ घंटों में, मूर्तियों को फिर से स्थापित कर दिया जाएगा।
हर्ष संघवी, गृह राज्य मंत्री गुजरात

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी की तरफ इस मामले में एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद भी यह मामला शांत नहीं हो पा रहा है। सोशल मीडिया पर जैन धर्म के तीर्थंकरों की टूटी मूर्तियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। गृह मंत्री ने खुद माना है है कि किसी भी ट्रस्ट को ऐतिहासिक मूर्तियां तोड़ने की इजाजत नहीं है। तो ऐसे में ये कृत्य किसने किया? यह सवाल खड़ा हो रहा है, क्यों शांतिपूर्वक रहने वाले जैन समाज में इस बार भारी आक्रोश देखा गया। इसके पहले जैन समाज गिरनार पर्वत पर गंदगी और उसे बचाने के लिए सड़कों पर उतारा था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह मामला पावागढ़ अटैक से नाम से सुर्खियों में आया है। बीजेपी शासित राज्य में अगर ऐसी घटनाएं होंगी तो जाहिर है कि धार्मिक सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े होंगे।

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