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2009 से 2024 तक… पिछले चार चुनावों में कैसे और कितनी बढ़ी दागियों-दौलतमंदों की धमक?

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नई दिल्ली,

लोकसभा चुनाव अब आखिरी मोड़ पर आ गया है. आखिरी और सातवें चरण की वोटिंग में कुछ ही दिन बचे हैं. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में 543 सीटों के लिए आठ हजार से ज्यादा उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है.एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के आंकड़ों से पता चलता है कि अमीर और दागी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी है. इस बार हर तीन में से एक उम्मीदवार करोड़पति है. वहीं, हर पांच में से एक उम्मीदवार ने अपने खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज होने की बात कही है. एक अच्छी बात ये है कि पिछले चार चुनावों में महिला उम्मीदवारों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी हुई है.

महिलाओं की भागीदारी
लोकसभा चुनाव में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. हर चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या एक फीसदी तक बढ़ी है. 2024 के चुनाव में करीब 800 महिलाएं मैदान में हैं. यानी, कुल उम्मीदवारों में से 10 फीसदी महिलाएं हैं. इसकी तुलना में 2019 में कुल उम्मीदवारों में से 9 फीसदी महिलाएं थीं. वहीं, 2014 में 8 फीसदी और 2009 में 7 फीसदी महिला उम्मीदवार थीं.

इस बार बीजेपी ने 69 और कांग्रेस ने 41 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है. 2019 की तुलना में बीजेपी ने इस बार ज्यादा महिलाओं को टिकट दिया है. बीजेपी ने 2019 में 54 महिलाओं को टिकट बांटा था. जबकि, कांग्रेस की महिला उम्मीदवारों की संख्या में कमी आई है.समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने 20 फीसदी से ज्यादा टिकट महिलाओं को दिए हैं. 2019 के मुकाबले ये संख्या ज्यादा है.

दागी उम्मीदवार बढ़े
राजनीति में बाहुबलियों का दबदबा हमेशा से रहा है. और 2009 से 2024 के बीच दागी उम्मीदवारों की संख्या कई गुना बढ़ी है. ये दिखाता है कि कैसे दागी उम्मीदवारों पर राजनीतिक पार्टियां भरोसा करती हैं. 2009 के चुनाव में लगभग 15 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज थे. 2024 में ऐसे उम्मीदवारों की संख्या 20 फीसदी से ज्यादा है.

हत्या, हत्या की कोशिश, किडनैपिंग, रेप और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवार भी बढ़े हैं. 2009 में 8 फीसदी उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक केस दर्ज थे. जबकि, 2024 में 14 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं.

एडीआर के मुताबिक, जिन सीटों पर तीन या उससे ज्यादा उम्मीदवारों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज होते हैं, उन्हें ‘रेड कंस्टीट्यूएंसी’ कहा जाता है. 2009 में हर तीन में से एक यानी 36% सीटें रेड कंस्टीट्यूएंसी थीं. 2024 में ये बढ़कर 53% हो गई हैं. यानी, इस बार हर दूसरी सीट पर तीन या उससे ज्यादा उम्मीदवारों पर क्रिमिनल केस दर्ज हैं.

विश्लेषण से पता चलता है कि 2024 में बीजेपी और कांग्रेस ने 40 फीसदी से ज्यादा दागी उम्मीदवारों को टिकट बांटा है. 2009 में दोनों ही पार्टियों के 27 फीसदी उम्मीदवार दागी थे. इतना ही नहीं, 2009 और 2024 के बीच गंभीर आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवार भी दोगुने हो गए हैं.

करोड़पतियों पर दांव
2009 के चुनाव में 16 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति थे. 2014 में ये 27 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति थे. 15 साल में चुनावों में करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या लगभग दोगुना बढ़ गई. 2024 में 31 फीसदी उम्मीदवार ऐसे हैं, जिनके पास 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है.आंकड़ों पर नजर डालें तो 5 साल में 5 करोड़ या उससे ज्यादा संपत्ति वाले उम्मीदवारों की संख्या भी बढ़ी है. 2019 में 11 फीसदी उम्मीदवार ऐसे थे, जिनके पास 5 करोड़ या उससे ज्यादा की संपत्ति थी. 2024 में ऐसे 12.4% उम्मीदवार हैं.

2024 में बीजेपी ने करोड़पतियों को सबसे ज्यादा टिकट दिए हैं. बीजेपी के 440 में से 403 उम्मीदवार करोड़पति हैं. एक करोड़ से ज्यादा संपत्ति वाले बीजेपी उम्मीदवारों की संख्या काफी हद तक बढ़ गई है. 2009 में बीजेपी के 42 फीसदी से कम उम्मीदवारों के पास 1 करोड़ से कम के संपत्ति थी. जबकि, 2024 में उसके 91.6 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति हैं.इसी तरह, कांग्रेस के करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या भी काफी बढ़ी है. 2009 में कांग्रेस के 69 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति थे, जो 2024 में बढ़कर 89 फीसदी हो गए हैं.

2009 और 2024 के बीच उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 463 फीसदी यानी तीन गुना तक बढ़ गई है. 2009 में उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 1.1 करोड़ थी, जो 2024 में बढ़कर 6.23 करोड़ रुपये हो गई.2019 में बीजेपी के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 13.4 करोड़ रुपये थी, जो 2024 में 17 गुना बढ़कर 41.3 करोड़ हो गई. इसी तरह 2019 में कांग्रेस उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 19.9 करोड़ थी. जबकि, 2024 में कांग्रेस उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 24.7 करोड़ है

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