तेहरान
इजरायल और ईरान के बीच बीते कुछ समय से तनातनी चल रही है। इस्माइल हानिया की मौत के बाद ईरान ने इजरायल से बदले की कसम खाई है। ऐसे में दोनों देशों में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। ईरान की ओर से इजरायल पर मिसाइल हमला किए जाने का अंदेशा जताया जा रहा है। ईरान और इजरायल के बीच इसी साल अप्रैल में भी तनाव हुआ था, तब ईरानी समाचार एजेंसी की ओर से दावा किया गया था कि ईरान के शस्त्रागार में ऐसी नौ मिसाइलें है, जो इजरायल की धरती तक सीधे मार कर सकती हैं। आईएनएसए समाचार एजेंसी ने खुलासा किया था कि इजरायल तक पहुंचने में सक्षम ईरान में बनीं मिसाइलें 1,400 से 2,500 किलोमीटर दूरी तक हमला कर सकती हैं।
ईरान की मिसाइलों में जो खास नाम हैं, उनमें पहला नाम सेज्जिल का है। ये मिसाइल 2,000-2,500 किमी तक मार करती है। सेज्जिल मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसके बाद दूसरी मिसाइल खोर्रमशहर-4 है, जिसे खैबर के नाम से भी जाना जाता है। खैबर की अधिकतम घोषित सीमा 2,000 किमी है। यह 1,500 किलोग्राम हथियार ले जा सकती है। तीसरी मिसाइल का नाम इमाद है। इमाद मिसाइल की भी सीमा 2,000 किमी है और इसकी पेलोड क्षमता 750 किलोग्राम है। यह MaRV से लैस है, जो निर्धारित लक्ष्य के 500 मीटर के भीतर सटीकता के साथ हमला कर सकती है।
ईरान की शहाब-3 मिसाइल
ईरान की चौथी खास मिसाइल शहाब 3 है। शहाब 3 की मारक क्षमता सीमा 2,000 किमी और गति मैक 7 है। इसके बाद कद्र-110 का नाम आता है। कद्र मिसाइल की मारक क्षमता 1,950 किमी तक है और यह 9 मैक की गति से लक्ष्य पर हमला कर सकती है। यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जो शहाब-3ए का उन्नत वर्जन है और इसका डिजाइन हाइब्रिड है। छठें नंबर पर पावेह मिसाइल है, इसकी मारक क्षमता 1,650 किमी और गति 600-900 किमी प्रति घंटा है। यह एक नई लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है।
ईरान की एक और मिसाइल खैबरशेकन है। इसकी मारक क्षमता 1,450 किमी है और यह 5,000 किमी प्रति घंटे या मैक 4 से अधिक की गति से लक्ष्य पर हमला कर सकती है। ईरान की आठवीं मिसाइल फतह 2 है। फतह-2 हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 1,400 किमी है और यह 5 मैक की गति से उड़ान भर सकती है।
ईरान की नौंवी मिसाइल कासिम है। कासिम मिसाइल की मारक क्षमता 1,400 किलोमीटर है। ये मैक 5 से लेकर मैक 12 तक की स्पीड से जा सकती है। ये एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है जो 500 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकती है। इसका नाम ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी के नाम पर रखा गया है, जिन्हें जनवरी 2020 में अमेरिका ने मार दिया था।
