यवतमाल
जिस कलावती बांदुरकर का जिक्र केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को संसद में किया था। उन्हीं कलावती बांदुरकर ने अमित शाह को झूठा साबित कर दिया है। अमित शाह को जवाब देते हुए कलावती ने कहा कि बीजेपी-मोदी सरकार से मुझे कुछ नहीं मिला बल्कि राहुल गांधी की वजह से मेरी जिंदगी बदलाव आया। संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा था। उन्होंने संसद में कहा कि बुंदेलखंड में कलावती के घर जाकर गरीबी की दिल दहला देने वाली कहानी सुनाई। बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि कलावती को कोई मदद नहीं दी गई। लेकिन, कांग्रेस ने दावा किया है कि राहुल गांधी की मुलाकात बुंदेलखंड में किसी कलावती से नहीं हुई। राहुल गांधी ने यवतमाल जिले की कलावती बांदुरकर से मुलाकात कर कलावती की समस्या का समाधान किया।
राहुल गांधी ने मेरी जिंदगी बदल दी, मोदी सरकार ने मुझे कुछ नहीं दिया
कलावती ने कहा कि राहुल गांधी के कारण ही मैं सम्मान के साथ जी सकी। उसी कांग्रेस ने मुझे सारी सुविधाएं मुहैया कराई। मोदी सरकार ने मुझे कुछ नहीं दिया। कलावती ने कहा कि संसद में जिसने भी बोला है वह पूरी तरह से झूठ है।
अमित शाह ने क्या कहा था?
अमित शाह ने कहा, एक बार राहुल बुंदेलखंड की रहने वाली गरीब महिला कलावती के घर भोजन करने गए. इसके बाद सदन में गरीबी का वर्णन किया. इसके बाद उनकी सरकार आई, लेकिन मैं पूछता हूं कि उनकी सरकार ने उस गरीब महिला कलावती के लिए क्या किया? अमित शाह ने कहा कि उस गरीब कलावती को घर, बिजली, गैस, अनाज आदि देने का काम नरेंद्र मोदी ने किया. उन्होंने कहा कि आप जिस कलावती के घर भोजन के लिए, उनको भी मोदी जी पर भरोसा है. वो मोदी जी के साथ खड़ी हैं. हालांकि, गौर करने वाले बात ये है कि अमित शाह ने कलावती को बुंदेलखंड का बताया, जबकि राहुल ने जिन कलावती के घर पर भोजन किया था, वह यवतमाल की हैं.
हालांकि, यवतमाल में कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि राहुल ने बुंदेलखंड में ऐसी किसी कलावती का दौरा नहीं किया है। राहुल ने यवतमाल जिले के मारेगांव तालुका के जलका में आत्महत्या पीड़ित परिवार की किसान कलावती बांदुरकर के घर का दौरा किया था। इसके बाद कलावती सुर्खियों में आ गईं और उन्हें पर्याप्त सहायता दी गई। उन्हें आवास, बिजली, पानी और जीवन की बुनियादी जरूरतें मुहैया कराई गईं। कलावती ने बताया कि सुलभ शौचालय वाले बिंदेश्वर पाठक ने भी मदद की।
