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Thursday, March 12, 2026
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राम के साथ सीता हैं हनुमान भी, फिर भी कह रहे कि ये रामायण नहीं, आदिपुरुष के निर्माताओं पर भड़का HC, फंसे मुंतशिर

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नई दिल्ली,

आदिपुरुष मेकर्स की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. रिलीज के दस दिन बाद भी फिल्म पर जारी विवाद थम नहीं रहा बल्कि और बढ़ता जा रहा है. फिल्म के डायलॉग्स को लेकर कड़ी आपत्ति जताई गई थी. लेकिन अब ये मामला कोर्ट जा पहुंचा है. इलाहबाद हाई कोर्ट ने राइटर मनोज मुंतशिर शुक्ला को आपत्तिजनक डायलॉग्स और फिल्म मेकर को विवादित सीन्स के लिए नोटिस भेजा है.

अदालत बोली- शुक्र मानिए हिंदू तोड़फोड़ नहीं करते
कोर्ट का कहना था कि अच्छी बात ये है कि ये एक ऐसे धर्म का मामला है जिससे जुड़े लोग बवाल नहीं करते। हमने खबरों में देखा कि कुछ लोगों ने फिल्म को देखने के बाद सिनेमा हाल को बंद करा दिया। उन्होंने कोई ऐसा काम नहीं किया जिससे लॉ एंड आर्डर की समस्या खड़ी हो। लेकिन क्या आप उनके धैर्य की परीक्षा लेंगे। याचिका पर बेंच ने कहा कि ये प्रचार के लिए नहीं हैं। इनमें गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।

जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस श्री प्रकाश सिंह ने कहा कि फिल्म में ऐसे किरदार हैं जिनकी लोग पूजा करते हैं। लोग घर से निकलने से पहले राम चरित मानस का पाठ करते हैं। फिल्म बनाने वालों ने कुछ भी नहीं देखा। उन्होंने राम, सीता और हनुमान जी का मजाक बनाकर रख दिया। फिल्म में उन्हें ऐसे दिखाया गया है कि जैसे वो कुछ हो ही नहीं। कोर्ट के तेवर इतने तल्ख थे कि जजों ने कहा कि सारा कुछ रामायण से लिया गया है। लेकिन फिर भी निर्माता डिसक्लेमर देकर कह रहे हैं कि ये रामायण नहीं। क्या आप देश में रहने वाले लोगों को बेवकूफ और नासमझ मानते हैं।

सेंसर बोर्ड को लगाई लताड़
27 जून को हुई सुनवाई में अदालत ने फटकार लगाते हुए सीबीएफसी यानी सेंसर बोर्ड की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि आपत्तिजनक दृश्यों, कपड़ों और सीन्स के बारे में क्या किया जा रहा है? अगर हम लोग इस पर भी आंख बंद कर लें क्योंकि ये कहा जाता है कि ये धर्म के लोग बड़े ही सहिष्णु हैं तो क्या उसका टेस्ट लिया जाएगा? क्या यह सहनशीलता की परीक्षा है? यह कोई प्रोपेगेंडा के तहत की गई याचिका नहीं है. साथ ही हाई कोर्ट ने पूछा- क्या सेंसर बोर्ड ने अपनी जिम्मेदारी निभाई? ये तो अच्छा है कि ये उस धर्म के बारे में है, जिसे लोगों ने कोई पब्लिक ऑर्डर का प्रॉब्लम क्रिएट नहीं किया. यहां तो भगवान राम, हनुमान और सीता मां को ऐसे दिखाया गया है, जैसे क्या ही हैं.

आदिपुरुष टीम को जारी नोटिस
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कहा कि आदिपुरुष फिल्म में मां सीता, हनुमान और बाकि पौराणिक पात्रों का चित्रण आपत्तिजनक है. इसी वजह से फिल्म निर्माता, संवाद लेखक को नोटिस जारी किया गया है. वहीं सीबीएफसी से यह बताने को कहा गया है कि रिलीज की अनुमति देने से पहले क्या कदम उठाए गए थे?

धार्मिक ग्रंथों को तो कम से कम बख्श दीजिए
26 जून को हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ रामायण ही नहीं बल्कि पवित्र कुरान, गुरु ग्रंथ साहिब और गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों को तो कम से कम बख्श दीजिए, बाकी जो करते हैं वो तो कर ही रहे हैं. कोर्ट ने फिल्म के निर्माता, निर्देशक सहित अन्य प्रतिवादी पार्टियों की कोर्ट में अनुपस्थिति पर भी कड़ा रुख दिखाया. वरिष्ठ अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने सेंसर बोर्ड द्वारा अभी तक जवाब न दाखिल किए जाने पर आपत्ति जताई और कोर्ट को फिल्म के आपत्तिजनक तथ्यों से अवगत कराया.

रावण द्वारा चमगादड़ को मांस खिलाए जाने, काले रंग की लंका, चमगादड़ को रावण का वाहन बताए जाने, सुषेन वैद्य की जगह विभीषण की पत्नी को लक्ष्मण जी को संजीवनी देते हुए दिखाना, आपत्तिजनक संवाद और अन्य सभी तथ्यों को कोर्ट में रखा गया जिस पर कोर्ट ने सहमति जताई.

मनोज मुंतशिर को पार्टी बनाकर जारी किया नोटिस
बेंच ने यहां तक कहा कि अगर फिल्म को रोक दिया जाए तो क्या लोगों की जो भावनाएं आहत हुई हैं वो फिर से ठीक हो जाएंगी। अदालत ने स्टोरी राइटर मनोज मुंतशिर को पार्टी बनाते हुए उनको नोटिस जारी करने का आदेश सुनाया।

जब मेकर्स ने मारा यू-टर्न
आदिपुरुष फिल्म में प्रभास ने राघव, कृति सेनन ने जानकी और सैफ अली खान ने लंकेश का कैरेक्टर प्ले किया है. फिल्म रिलीज से पहले मेकर्स ने दावा किया था कि ये रामायण की ही कहानी है, जिसे नए तरीके से वो बड़े पर्दे पर पेश करने जा रहे हैं. हालांकि रिलीज के बाद दर्शकों से मिलते रिएक्शन को देख अपने बयानों को बदल दिया और कहा कि हमने रामायण से इंस्पायर्ड फिल्म बनाई है, ना कि रामायण. संवाद पर बढ़ती लोगों की आपत्ति को देखते हुए मेकर्स ने फिल्म के आपत्तिजनक डायलॉग्स में भी बदलाव किया था. लेकिन इस भी उनकी फजीहत ही हुई थी.

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