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‘वे क्रिमिनल नहीं…बेवजह बवाल क्यों…’ आनंद मोहन की रिहाई पर बिहार के 7 बड़े नेताओं के क्या हैं बोल?

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पटना,

बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन गुरुवार को जेल से रिहा हो गए. आनंद मोहन आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा काट रहे थे. बिहार की नीतीश सरकार ने कारा अधिनियम में बदलाव करके आनंद मोहन समेत 27 कैदियों को रिहा किया है. नीतीश सरकार के इस फैसले को लेकर उनकी आलोचना भी हो रही है. जहां IAS की पत्नी और बेटी ने इस फैसले को दुखद बताते हुए कोर्ट जाने की बात कही. तो वहीं IAS Association ने भी सरकार की आलोचना करते हुए इस फैसले को गलत बताया है.

हालांकि, बिहार के ज्यादातर राजनीतिक दलों के नेताओं ने नीतीश सरकार के इस फैसले को सही ठहराया है. विपक्षी बीजेपी भी आनंद मोहन के मुद्दे पर शांत है. हालांकि, पार्टी ने बाकी 26 कैदियों के जरिए M-Y समीकरण साधने का आरोप लगाया है. आइए जानते हैं कि आनंद मोहन की रिहाई पर पार्टियों और नेताओं का क्या रुख है

किसने क्या कहा?
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह आनंद मोहन की रिहाई पर उत्साहित दिखे. वे हाल ही में आनंद मोहन के बेटे चेतन की सगाई में पहुंचे थे. यहां वे आनंद मोहन के साथ एक ही गाड़ी में बैठे. इतना ही नहीं काफी देर तक दोनों साथ में घूमते नजर आए. उन्होंने कहा, ”अब आनंद मोहन जी रिहा हो चुके हैं. अब हम लोग एक गाड़ी पर बैठ गए हैं, ये गाड़ी रुकने वाली नहीं है. ये गाड़ी लक्ष्य तक पहुंच कर रुकेगी. हमारा लक्ष्य है बिहार में लोकसभा की 40 सीटों पर जीत. हम बीजेपी को दूर दूर तक नहीं फटकने देंगे.”

बीजेपी सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा, ”आनंद मोहन के बहाने सरकार मानवीय होने का मुखौटा लगाकर जिन 26 अपराधियों को छोड़ने जा रही है वह दुर्दांत हैं और इनमें से 7 तो ऐसे हैं, जिन्हें अभी भी स्थानीय थाने में अपनी हाजिरी दर्ज करानी होगी. सरकार की तरफ से जिन बंदियों को रिहा किया जा रहा है, उनमें से ज्यादातर MY समीकरण में फिट बैठते हैं और उनके बाहुबल का इस्तेमाल सरकार में बैठे लोग आगे चुनाव में करना चाहते हैं.”

बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, ”आनंद मोहन बेचारे काफी समय तक जेल में रहे, आनंद मोहन तो बलि का बकरा बन गए थे और उनकी रिहाई हुई तो कोई बड़ी बात नहीं है.” हालांकि कारागार नियमों में बदलाव के बाद जो अन्य कैदियों को रिहाई मिली है उस पर गिरिराज सिंह ने जरूर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि आनंद मोहन की आड़ में जितने लोगों को छोड़ा गया है उसके बारे में समाज पूछ रहा है.

बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा, ”सरकार ने कहीं न कहीं अपनी विकृत मानसिकता से ये काम किया है. ये गलत है. आनंद मोहन के नाम पर दो दर्जन से ज्यादा लोगों को छोड़ने का काम किया है. बीजेपी साफ कह रही है कि अपराधियों के साथ कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए. इस पर संवैधानिक संस्था को फैसला लेना चाहिए. बीजेपी इस पूरे मामले को जनता के बीच में रखेगी. ”

जन अधिकार पार्टी के चीफ पप्पू यादव ने कहा, ”एक घटना घटी और वो हादसा हो गया था. आनंद मोहन जी 14 साल काटने के बाद बाहर आ रहे हैं. आईएएस अधिकारियों को बताना चाहिए कि क्या ये पहला मर्डर है? जो इतना बोल रहे हैं अभी? हायतौबा नहीं करना चाहिए.” इतना ही नहीं पप्पू यादव ने जी कृष्णैया की पत्नी से अपील की है कि उन्हें आनंद मोहन को माफ कर देना चाहिए.

हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और नीतीश सरकार में सहयोगी जीतन राम मांझी ने कहा, ”यह कानूनी कार्रवाई के तहत रिहाई की गई है. हम व्यक्तिगत रूप से आनंद मोहन को जानते हैं. वे कोई क्रिमिनल नहीं थे. जिनकी हत्या हुई, वे दलित थे. हत्या उचित नहीं है. लेकिन आनंद मोहन को जो सजा तय हुई, उसे उन्होंने पूरा किया. अब सजा के बाद भी जेल में रखना कहां का नियम है.”

उधर, राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने इस मामले में बीजेपी पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा, ”रिहा होने वालों में सभी जाति के बंदी शामिल हैं. बीजेपी पहले आनंद मोहन की रिहाई पर अपना स्टैंड साफ करे. सुशील मोदी ने आनंद मोहन की रिहाई की मांग की थी.”

बीजेपी द्वारा बंदियों की रिहाई में M-Y समीकरण साधने के आरोपों पर मृत्युंजय तिवारी ने कहा, ”आरजेडी M-Y नहीं A टू Z की बात करती है. बीजेपी M-Y समीकरण का बेबुनियाद आरोप लगा रही है. बेवजह विवाद पैदा किया जा रहा है. सरकार ने आनंद मोहन को रिहा कर सही फैसला लिया.”

जी कृष्णैया की हत्या में आनंद मोहन को हुई थी सजा
तेलंगाना में जन्मे आईएएस अधिकारी कृष्णैया अनुसुचित जाति से थे. वह बिहार में गोपालगंज के जिलाधिकारी थे और 1994 में जब मुजफ्फरपुर जिले से गुजर रहे थे. इसी दौरान भीड़ ने पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी थी. इस दौरान इन्हें गोली भी मारी गई थी. आरोप था कि डीएम की हत्या करने वाली उस भीड़ को कुख्यात बाहुबली आनंद मोहन ने ही उकसाया था. यही वजह थी कि पुलिस ने इस मामले में आनंद मोहन और उनकी पत्नी लवली समेत 6 लोगों को नामजद किया था.

कृष्णैया की हत्या के मामले में आनंद मोहन को सजा हुई थी. 1994 के कलेक्टर हत्याकांड में आनंद मोहन सिंह को 2007 में फांसी की सजा सुनाई गई. 2008 में हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था. अब उम्रकैद की सजा काट रहे आनंद मोहन को बिहार सरकार कारा अधिनियम में बदलाव करके जेल से रिहा कर दिया.

– बिहार सरकार ने कारा हस्तक 2012 के नियम 481 आई में संशोधन किया है. 14 साल की सजा काट चुके आनंद मोहन की तय नियमों की वजह से रिहाई संभव नहीं थी. इसलिए ड्यूटी करते सरकारी सेवक की हत्या अब अपवाद की श्रेणी से हटा दिया गया है. बीते 10 अप्रैल को ही बदलाव की अधिसूचना सरकार ने जारी कर दी थी.

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