नई दिल्ली:
खाकी का खौफ तो बस आम लोगों पर होता है, नेता और ताकतवर लोग तो खाकी को सरेआम रुसवा कर देते हैं। कोई ‘ऐ पुलिस’ कहता है तो कोई ‘ऐ सिपाही’ कहकर बेइज्जत कर डालता है। अगर इतने में भी मन ना भरे तो खाकीधारियों को ‘लफंडर’ कहकर भी जलील किया जा सकता है। धूप, बारिश, त्यौहार, आपदा, विपदा हर परिस्थिति में काम करने वाले पुलिसवालों को अपमानित करके नेता खुद पर काफी गर्व महसूस करते हैं।
जनसभाओं में इन्हें ‘तनख्वाह’ कहकर भी संबोधित किया जाता है। देश में पुलिसवालों के अपमान को लेकर इस समय चर्चा तेज है। दरअसल होली के जश्न में डूबे बिहार के पूर्व मंत्री और लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक सिपाही को ठुमके लगाने का आदेश दे दिया और आदेश ना मानने पर सस्पेंड करने की धमकी भी दे डाली। हालांकि ये सब मजाकिया अंदाज में कहा गया था, लेकिन इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।
‘ठुमका लगाओ, वरना…’
तेज प्रताप यादव ने शनिवार को अपने सरकारी आवास पर जमकर होली खेली। इस दौरान बड़ी संख्या में आरजेडी के कार्यकर्ता और उनके समर्थक पहुंचे थे। इसी बीच, तेज प्रताप ने वहां एक पुलिसकर्मी को एक गाने पर ठुमका लगाने को कहा। इसके बाद यह भी कहा कि उनकी बात न मानने पर उसे निलंबित कर दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ‘बुरा न मानो, होली है।’ अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। तेज प्रताप यादव की जमकर आलोचना हो रही है।
जब अखिलेश के बोल पुलिसकर्मियों पर बिगड़ गए
साल 2022 में कन्नौज के तिर्वा में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए अचानक ही अखिलेश यादव के बोल पुलिसकर्मियों पर बिगड़ गए थे और उन्होंने ‘ऐ… ऐ.. पुलिस, ऐ पुलिस’ कहकर पुलिस को संबोधित किया। अखिलेश यादव का यह वीडियो कई दिनों तक चर्चा में रहा। दरअसल तिर्वा जनसभा में कुछ सपा कार्यकर्ता बैरिकेडिंग तोड़कर मंच की तरफ बढ़ने लगे थे, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें संभालने के लिए डंडा उठाया था। इसी बात को लेकर अखिलेश यादव ने पुलिसकर्मियों पर तीथी टिप्पणी की थी।
‘लफंडर टाइप का CO है’
उत्तर प्रदेश में संभल के सीओ अनुज चौधरी की ओर से जुम्मा को लेकर दिए बयान पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने 9 मार्च को एक न्यूज चैनल इंटरव्यू में कहा था, ‘वह लफंडर टाइप का CO है। रोज आप उसका बयान लेकर उसे हाइलाइट करते हैं। यह सब लोग गुलाम हैं। जब सरकार बदलेगी तो फिर यह उसी की भाषा बोलने लगेंगे। महाबली सीओ जिसे आप लोग दिखाते रहते हो, इससे आप लोगों को बचना चाहिए।’
खतरे में क्यों है पुलिस की इज्जत?
यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान तो पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों को जनसभाओं में ‘तनख्वाह’ कहकर जलील किया करते थे। किसी भी पार्टी का कोई भी नेता क्यों ना हो, वह जनता के बीच रौब जमाने के लिए पुलिसवालों को सरेआम जलील करते हैं। कुछ जगहों पर तो दरोगा जी को थप्पड़ भी जड़ा गया है। ऐसी खबरों से इंटरनेट भरा हुआ है। यहां पुलिस महकमे को सोचना होगा कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि नेताओं की सेवाओं में 24 घंटे हाजिर रहने वाले सिपाहियों, दरोगा और आला अधिकारियों को नेता जब चाहे तब बेइज्जत कर देते हैं।
