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महाकुंभ में ऐसे कैसे मची भगदड़? यह प्रशासनिक हत्या है, योगी सरकार पर भड़के संजय राउत

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मुंबई

शिवसेना (यूबीटी) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ में मची भगदड़ के बाद बीजेपी और योगी सरकार पर हमला बोला है। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। संजय राउत ने बुधवार को कहा कि वीवीआईपी पहुंचते हैं तो पूरे घाट को बंद कर दिया जाता है। रक्षा मंत्री और गृह मंत्री गए थे, तो पूरे घाट को बंद कर दिया गया। इससे व्यवस्था के ऊपर दबाव बढ़ा। इसके कारण यह भगदड़ मची। उन्होंने कहा कि इस भगदड़ में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। यह प्रशासन की ओर से की गई हत्या है।

कुंभ कोई मार्केटिंग का विषय नहीं
संजय राउत ने कहा कि बीजेपी और उत्तर प्रदेश सरकार इस बात का प्रचार कर रही थी कि उन्होंने करोड़ों लोगों के लिए किस तरह व्यवस्था की है। लेकिन कुंभ कोई मार्केटिंग का विषय नहीं है। इसमें आस्था रखने वाले लोग सालों से कुंभ में जाते रहे हैं। लाखों लोगों के आंकड़े दिए जा रहे हैं। बहुत सारे लोग आए, बहुत सारे लोग आए। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों को 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। वहां की व्यवस्था से जनता खुश नहीं है। आखिरकार दुर्भाग्यवश आज वहां भगदड़ मच गई, लोग कुचले गए, सैकड़ों लोग घायल हो गए और दस से अधिक श्रद्धालुओं की जान चली गई।

क्या जान गंवाने वाले आने वाले हैं?
राउत ने कहा कि जब गृह मंत्री स्नान करने जाते हैं तो घाट या क्षेत्र बंद कर दिया जाता है। जैसा कि रक्षा मंत्री के जाने पर होता है। क्योंकि वहां बहुत सारे लोग हैं, यदि आप इन सबके परिणामों को देखें, तो मैं केवल इतना ही कह सकता हूं। चाहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हों या अन्य मंत्री, उन्हें पार्टी और वोट मार्केटिंग पर ध्यान देने के बजाय श्रद्धालुओं की व्यवस्था और सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। इसका क्या मतलब है कि प्रधानमंत्री ध्यान दे रहे हैं? आज दस से ज़्यादा श्रद्धालुओं की जान चली गई, जिसके बाद जरूरी बैठकें शुरू हो गईं। प्रधानमंत्री के याद करने का क्या मतलब है? गृह मंत्री के नजर रखने का क्या मतलब है? क्या जान गंवाने वाले आने वाले हैं? संजय राउत ने यह सवाल पूछा।

1954 के कुंभ मेले का दिया उदाहरण
संजय राउत ने कहा कि 1954 के कुंभ मेले की व्यवस्था देखिये। देश के प्रधानमंत्री पंडित नेहरू स्वयं वहां गए थे, यह देखने के लिए कि व्यवस्था कैसी है? मुझे मालूम है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत पूरे समय वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं ने बताया है कि अखिलेश यादव के कार्यकाल में कुंभ मेले की व्यवस्था सबसे अच्छी थी। यदि इस प्रबंधन में अन्य दलों के लोग शामिल होते तो यह स्थिति पैदा नहीं होती, लेकिन इस क्रेडिट विवाद के कारण लोगों की जान चली गई। संजय राउत ने कहा है कि इसके लिए दस हजार करोड़ से अधिक का बजट दिया गया, लेकिन हकीकत में दस हजार करोड़ नजर नहीं आ रहे हैं।

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