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पाकिस्तानी एयरफोर्स के पास कितने फाइटर जेट? इंडियन एयरफोर्स चीफ तेजस को लेकर HAL पर यूं ही नहीं भड़के, समझें खतरा

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इस्लामाबाद:

भारतीय वायुसेना के प्रमुख एपी सिंह ने कहा है कि उन्हें हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (HAL) पर भरोसा नहीं रहा है। एयरफोर्स चीफ का ये बयान भारत के लिए काफी चिंताजनक है। HAL को भारतीय वायुसेना को 40 तेजस फाइटर जेट कई महीने पहले सौंपना था, जिसे वो अभी तक नहीं सौंप पाया है। दूसरी तरफ पाकिस्तान और चीन जैसे देश लगातार अपनी वायुसेना को ताकतवर बना रहे हैं। गौर से देखेंगे तो पता चलेगा कि वायुसेना प्रमुख की नाराजगी यूंही नहीं है। इंडियन एयरफोर्स फाइटर जेट्स की कमी से जूझ रही है और स्थिति काफी गंभीर होती जा रही है। एयरचीफ एपी सिंह ने HAL के अधिकारियों को विश्वासनीयता बढ़ाने के लिए कहा है। HAL कैसे विश्वासनीयता संकट से जूझ रहा है इसकी जानकारी हम आपको आगे देंगे, लेकिन इस बीच ग्लोबल फायर पावर की रिपोर्ट में दुनियाभर की वायुसेना की ताकत का विश्लेषण किया गया है।

globalfirepower.com वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट में दुनियाभर की वायुसेना की ताकतों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में किस देश के पास कितने फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर्स और सहायक विमान हैं, उसकी लिस्ट बनाकर दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायु सेनाओं को स्थान दिया है। इस रिपोर्ट में अमेरिकी एयरफोर्स को दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायुसेना बताया गया है। अमेरिका के बाद लिस्ट में रूस का स्थान है, जबकि तीसरे नंबर पर चीन और चौथे नंबर पर भारत का स्थान है। लिस्ट में दक्षिण कोरिया पांचवें, छठे नंबर पर जापान और सातवें नंबर पर पाकिस्तान का नाम है। हालांकि लिस्ट में भारत चौथे और पाकिस्तान सातवें नंबर पर है, लेकिन ये लिस्ट लड़ाकू विमानों की संख्या के आधार पर है।

दुनिया की ताकतवर वायुसेनाएं
ग्लोबल फायर पावर की रिपोर्ट में यूएस एयरफोर्स को लेकर कहा गया है कि उसकी क्षमता, रूस, चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया की संयुक्त क्षमता से भी ज्यादा है। अमेरिकी एयरफोर्स के पास 5,737 हेलीकॉप्टर, 1,854 फाइटर जेट्स और 3,722 सहायक विमान है। अमेरिका के बाद लिस्ट में रूस का स्थान है, जिसके पास यूएस एयरफोर्स की तुलना में एक तिहाई एयर पावर है। रूस के पास 1,554 हेलीकॉप्टर, 809 लड़ाकू जेट और 610 सहायक विमान हैं। वहीं 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस ने 220 विमानों को खो दिया है।

इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर चीन का नाम है, जो अपनी वायुसेना को लगातार अत्याधुनिक बना रहा है। चीन अपनी वायुसेना पर भारी-भरकम निवेश कर रहा है। चीन के पास दो तरह के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं, जबकि वो छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा चीन सुपरसोनिक स्पीड से चलने वाले फाइटर जेट्स को बनाने की भी कोशिश कर रहा है। चीन बहुत जल्द रूस को पीछे छोड़कर दूसरे नंबर पर आ जाएगा। चीन के पास 3309 एयरक्राफ्ट हैं। उसके पास 1212 फाइटर जेट्स हैं, 913 हेलीकॉप्टर हैं, वहीं 281 अटैक हेलीकॉप्टर हैं।

पाकिस्तान एयरफोर्स की क्षमता जानिए
पाकिस्तान के स्टॉक में कुल 1399 एयरक्राफ्ट हैं। जिनमें से 979 एयरक्राफ्ट युद्ध लड़ने के लिए तैयार हैं। पाकिस्तानी वायुसेना के पास 328 फाइटर जेट्स, जिनमें से 230 युद्ध के लिए तैयार हैं। वहीं देश के पास 373 हेलीकॉप्टर हैं, जिनमें से 261 एक्टिव हैं। पाकिस्तान वायुसेना के पास 90 अटैक फाइटर जेट्स हैं, जिनमें से 63 एक्टिव हैं। वहीं मिस्र के पास कुल 1080 एयरक्राफ्ट, तुर्की के पास 1069 एयरक्राफ्ट और फ्रांस के पास 972 एयरक्राफ्ट हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन लगातार अपनी शक्ति को बढ़ा रहा है, जबकि रूस को अपनी क्षमता बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

इंडियन एयरफोर्स की ताकत और एयरचीफ की चिंता
भारतीय वायुसेना के स्टॉक में कुल 2229 एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें से 1672 एयरक्राफ्ट किसी भी वक्त युद्ध लड़ने के लिए एक्टिव हैं। इनमें से 513 फाइटर जेट्स हैं, जिनमें 385 एक्टिव हैं। भारतीय वायुसेना के पास 130 अटैक फाइटर जेट्स हैं, जिनमें से 98 एक्टिव हैं। भारत के पास 899 लड़ाकू हेलीकॉप्टर हैं, जिनमें से 674 एक्टिव हैं। भारत के पास स्टॉक में 80 अटैक हेलीकॉप्टर हैं, जिनमें से 60 एक्टिव हैं।

पाकिस्तान से तुलना करने पर पता चलता है कि भारत के पास पाकिस्तान के मुकाबले विमानों की संख्या तो ज्यादा है, लेकिन भारत के पास रक्षा करने के लिए जमीन भी ज्यादा है। पाकिस्तान के मुकाबले भारत काफी ज्यादा बड़ा है। और भारतीय वायुसेना प्रमुख को टेंशन इसी बात को लेकर है। वायुसेना प्रमुख हल्के लड़ाकू विमान तेजस MK-1A फाइटर जेट के उत्पादन में होने वाली देरी को लेकर टेंशन में हैं। ये देरी भारत की लड़ने की क्षमता के लिए खतरनाक है। भारत सरकार ने वायुसेना को 83 तेजस MK-1A फाइटर जेट सौंपने के लिए 48000 करोड़ रुपये का सौदा किया था। तय सौदे के मुताबिक HAL को पहले फाइटर जेट की आपूर्ति 31 मार्च 2024 से पहले ही करनी थी लेकिन तय समय के 10 महीने बीत जाने के बाद भी पहला फाइटर जेट नहीं सौंपा गया है। कहा जा रहा है कि फाइटर जेट का इंजन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस ने अभी तक इंजन नहीं सौपा है।

पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का टेंशन अलग
तेजस फाइटर जेट मिलने में देरी तो है ही, दूसरी तरफ चीन ने अपनी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से भी भारत की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। चीन के पास दो तरह के पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ टेक्नोलॉजी वाले फाइटर जेट हैं। चीन के पास J-20 और J-35 नाम के दो पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं। वहीं पिछले साल जनवरी में पाकिस्तान ने चीन से 40 J-35 फाइटर जेट खरीदने की घोषणा की थी। यानि भारत के दोनों दुश्मनों के पास 5th जेनरेशन एयरक्राफ्ट होंगे। लिहाजा सवाल ये है कि क्या भारतीय वायुसेना मौजूदा ताकतों के साथ, एक साथ दोनों दुश्मनों से मुकाबला कर सकता है?

भारत फिलहाल सुखोई 30 एमकेआई, मिराज 2000, सेपेकैट जगुआर, मिग 21 बाइसन, तेजस एलसीए एमके 1, मिग 29 और राफेल फाइटर जेट हैं। लेकिन इनमें से ज्यादातर फाइटर जेट्स अब पुराने हो चुके हैं। लिहाजा भारत को जल्द से जल्द लड़ाकू विमानों की जरूरत है। भारत खुद के पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान AMCA प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, लेकिन पहले प्रोटोटाइप के उड़ान भरने में कम से कम 10 सालों का वक्त लगेगा। वहीं मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोजेक्ट के तहत भारत को 114 मध्यम दूरी तक मार करने वाले लड़ाकू विमानों को भी खरीदना था, लेकिन कई सालों तक ये प्रोजेक्ट अटका रहा। जब वायुसेना की तरफ से बार बार अलार्म बजाया गया, तो सरकार हरकत में आई है। लेकिन फिलहाल नहीं कहा जा सकता है कि भारत कब तक MRFA लड़ाकू विमान खरीदेगा। यहां एक बात और ध्यान में रखना जरूरी है कि वायुसेना प्रमुख एपी सिंह, जब वायस एयरचीफ थे, उस वक्त वो ये भी कह चुके हैं कि आत्मनिर्भरता अच्छी बात है, लेकिन वो देश की कीमत पर नहीं हो सकती है। उनका ये बयान बताता है कि एयरफोर्स कितनी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है।

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