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‘मैं हाई कोर्ट का जज हूं, थाने आ रहा हूं…’ पुलिस स्टेशन पर मच गया हड़कंप लेकिन यूं खुली ठग की पोल

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नई दिल्ली

समयपुर बादली थाने में कथित तौर पर अनियमितताओं की जांच के लिए ‘हाईकोर्ट के सिटिंग जज साहब’ पहुंच गए। पुलिसवालों पर जज होने का रौब झाड़ा। नैनो कार पर सवार होकर पहुंचे ‘जज साहब’ किसी को लताड़ा तो किसी को एक रिट पिटीशन के बाबत पूछा। लेकिन 65 साल के ‘जज साहब’ ने जब एसएचओ से 5 लाख की वसूली की कोशिश की तो मामले से राज फाश हो गया। पुलिस ने स्वयंभू जज के बारे में छानबीन की। क्योंकि पुलिस को हाईकोर्ट जज के दौरे के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं थी। मालूम चला कि कथित जज पर पहले से कई मामले दर्ज हैं और कई पुलिस अफसरों को वॉट्सऐप पर मेसेज भेजकर दवाब बनाता था। बहरहाल, समयपुर बादली पुलिस ने सीनियर अफसरों के संज्ञान में पूरा मामला लाकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। नैनो कार भी जब्त कर ली है।

डीसीपी देवेश महला के मुताबिक, यह पूरा वाकया शुक्रवार का है। आरोपी ने समयपुर बादली एसीपी को वॉट्सऐप मेसेज भेजा था। जिसमें उन्होंने खुद को हाईकोर्ट का जज बताया और जल्द कॉल करने के लिए कहा। कॉल करने पर आरोपी ने कहा कि वह समयपुर बादली थाने से संबंधित एक रिट याचिका के सिलसिले में शाम 5 बजे थाने का दौरा करेगा। शाम को आरोपी नैनो कार से थाने पहुंच गया। उसने कहा कि इलाके में चल रहे संगठित अपराध के संबंध में दायर एक रिट याचिका के सिलसिले में आया है। एसएचओ से पांच लाख मांगने लगा। एसएचओ को शक हुआ। छानबीन में उसकी पहचान आदर्श नगर निवासी नरेंद्र कुमार अग्रवाल के रूप में हुई। मोबाइल फोन की जांच में कई वॉट्सऐप मेसेज मिले। इसी दौरान थाने में तैनात हवलदार ने भी खुलासा किया कि नरेंद्र अग्रवाल नाम के एक शख्स ने तीन दिन पहले उसके भी मोबाइल पर कॉल कर पैसे की मांग की थी और धमकी दी कि अगर उसकी मांग पूरी नहीं की तो बर्खास्त कर दिया जाएगा।

पहले से दर्ज हैं कई केस
पुलिस अफसर के मुताबिक, छानबीन में मालूम चला कि आरोपी नरेंद्र अग्रवाल के खिलाफ साल 1980 में दो मामले भी दर्ज हुए थे। उसने साल 1980 में शादी की और जिससे दो बेटे हैं। साल 1995 में उसकी पहली पत्नी का देहांत हो गया। साल 1996 में उसने अपने ऑफिस में काम करने वाली कंप्यूटर ऑपरेटर से दोबारा शादी कर ली। जिससे उसके तीन बेटे हैं। साल 2011 में उसकी पत्नी ने उसके खिलाफ दहेज प्रताड़ना और क्रूरता का मामला दर्ज कराया। इस मामले को लेकर उसे अदालत के चक्कर काटने पड़े। अदालत में जज की पावर और पुलिसकर्मियों को उनके निर्देश का पालन करते देख उसने जज बनकर ठगी करने का फैसला किया। पिछले कुछ सालों से वह खुद को दिल्ली उच्च न्यायालय का जज बताकर पुलिस अफसरों को फोन और मेसेज करना शुरू कर दिया।

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