कोटा
कोटा में एक एसएससी की तैयारी कर रहे छात्र ने आत्महत्या करने की कोशिश की। जयपुर में उसके भाई ने पुलिस को सूचना दी। छात्र ने सोशल मीडिया पर अपने भाई को सुसाइड नोट भेजा था। पुलिस ने छात्र की लोकेशन ट्रेस की और उसे बचा लिया। पुलिस की तत्परता से छात्र की जान बच गई। दरअसल जयपुर से एक भाई ने कोटा पुलिस की स्टूडेंट सेल को फोन किया। उसने बताया कि उसका भाई कोटा में एसएससी की तैयारी कर रहा है और आत्महत्या करने वाला है। भाई के पास उसका पता नहीं था और मोबाइल भी बंद था। यह खबर सुनते ही कोटा पुलिस की स्टूडेंट सेल और महावीर नगर थाने की टीमें हरकत में आ गईं। छात्र की आखिरी लोकेशन महावीर नगर विस्तार में मिली।
फोन आते ही हरकत में आई कोटा पुलिस
पुलिस टीमों ने महावीर नगर विस्तार में छात्र की तलाश शुरू कर दी। दुकानों, ठेलों और घरों में छात्र का फोटो दिखाकर पूछताछ की गई। आखिरकार, एक घर के मालिक ने बताया कि छात्र उसके यहां रहता है। पुलिस तुरंत कमरे में पहुंची, जहां छात्र उदास बैठा था। पुलिस ने उसे समझाया और मनोवैज्ञानिक से उसकी काउंसलिंग करवाई। इस बीच, छात्र के परिजन भी कोटा पहुंच गए। पुलिस ने छात्र को उसके परिजनों को सौंप दिया।
शादी को लेकर परेशान था छात्र
एसपी डॉ. अमृता दुहन ने बताया कि छात्र ने सोशल मीडिया पर जयपुर में अपने भाई को सुसाइड नोट भेजा था। इसमें लिखा था, ‘परिजन मेरी जबरन शादी करना चाहते हैं, जबकि मैं पढ़ना चाहता हूं।’ यह संदेश मिलते ही स्टूडेंट सेल सक्रिय हो गई। एएसआई संजू शर्मा, अवधेष कुमार, हेड कांस्टेबल कल्पना मेवाड़ा, नीरज कुमारी, सीमा वर्मा और कांस्टेबल राजकुमार की टीम ने छात्र की आखिरी लोकेशन के आधार पर उसके दोस्त को ढूंढा। दोस्त से छात्र की फोटो लेकर 8 से 10 ठेलों-दुकानों और 23 घरों में पूछताछ की गई। एक घर वाले ने बताया कि छात्र उसके यहां रहता है। पुलिस टीम कमरे में पहुंची तो वह गुमसुम बैठा था। पुलिस ने उसे समझाया और मनोवैज्ञानिक से काउंसलिंग करवाई।
समय पर मदद मिलने से बची छात्र की जिंदगी
स्टूडेंट सेल प्रभारी एएसपी नियति शर्मा ने बताया कि हर महीने स्टूडेंट सेल में ऐसी कई शिकायतें आती हैं। कोई बच्चा आत्महत्या करने की सोच रहा होता है, कोई तनाव में होता है या कोई सोशल मीडिया पर परेशान कर रहा होता है। स्टूडेंट सेल की टीम ऐसे कई बच्चों के कमरे पर जाकर उन्हें समझाती है और गलत कदम उठाने से रोकती है। इस मामले में भी पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक युवा की जान बच गई। यह घटना दिखाती है कि पुलिस की सतर्कता और तत्परता कितनी महत्वपूर्ण है। समय पर मदद मिलने से एक छात्र की जिंदगी बच गई। यह घटना परिवारों के लिए भी एक सबक है कि वे बच्चों पर अपनी इच्छाएं न थोपें। बच्चों की भावनाओं को समझें और उनकी पढ़ाई में सहयोग करें। दबाव बनाने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
