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Wednesday, June 3, 2026
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विरोधी दल की तारीफ की तो चलेगा डंडा, कांग्रेस को आखिर क्यों कहना पड़ा, थरूर की तरफ इशारा?

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नई दिल्ली

केरल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस की अगुआई वाला गठबंधन ‘यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’ यानी यूडीएफ 2016 से राज्य की सत्ता से बाहर है। केरल में मोटे तौर पर एक बार लेफ्ट के गठबंधन एलडीएफ की सरकार बनती है तो अगली बार यूडीएफ की लेकिन लेफ्ट ने पिछले दो चुनावों से लगातार जीत हासिल की है और अब उसकी नजर हैटट्रिक पर है। दूसरी तरफ, कांग्रेस 10 साल बाद केरल की सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगा रही है। उसके सामने लेफ्ट के साथ-साथ बीजेपी की भी चुनौती है जो उसके जनाधार में सेंध लगाने की कोशिश में है। लेकिन असली चुनौती एकजुटता है। पार्टी को लगता है कि अगर एकजुट होकर पूरी मजबूती से चुनाव लड़ा गया तो लेफ्ट को सूबे की सत्ता से हटाने में वह कामयाब हो जाएगी। पार्टी हाईकमान ने इसीलिए केरल के नेताओं को सख्त हिदायत दे दी है कि अगर किसी विरोधी दल की तारीफ किए तो खैर नहीं। आखिर कांग्रेस को ये क्यों कहना पड़ा? कहीं ये इशारों-इशारों में शशि थरूर को तो हिदायत नहीं है? आइए समझते हैं।

सार्वजनिक रूप से निजी बयान न देने का हुक्म
सबसे पहले, कांग्रेस आलाकमान ने केरल के नेताओं को क्या ताकीद दी है, उसकी बात। शुक्रवार को कांग्रेस के बड़े नेताओं ने केरल के नेताओं को चुप रहने का हुक्म दिया है। नेताओं को कहा गया है कि कोई भी अपनी निजी राय सार्वजनिक रूप से नहीं देगा। ऐसा करने पर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, पार्टी के अंदरूनी मतभेद की छवि बन रही थी, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। सूत्रों ने हमारे सहयोगी इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि हाल ही में चर्चा में रहे सांसद शशि थरूर ने AICC और केरल के नेताओं की बैठक में कहा कि वह कांग्रेस को मजबूत बनाने और चुनाव में जीत के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

बिल्कुल बर्दाश्त नहीं… खरगे ने किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन संदेश बहुत सख्त
पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि जब कांग्रेस के लोग मोदी सरकार के खिलाफ सड़क और संसद में कड़ी मेहनत कर रहे हैं, ऐसे में कोई भी नेता अपनी निजी राय देकर विरोधी की तारीफ करता दिखे, यह बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसा लग रहा था मानो वह विरोधियों की तारीफ कर रहे हों। राहुल गांधी ने राज्य के नेताओं से मुख्यमंत्री पद की महत्वाकांक्षा को लेकर आपस में न लड़ने की नसीहत दी। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी बिना किसी मुख्यमंत्री उम्मीदवार के चुनाव लड़ेगी।

दीपादास मुंशी ने दी मीडिया में निजी राय देने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
बैठक के बाद AICC महासचिव दीपा दासमुंशी ने सभी कांग्रेस नेताओं के साथ पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा, ‘केरल के लोग कांग्रेस की तरफ देख रहे हैं और हमें ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे केरल के लोगों का अनादर हो। अगर कोई भी, चाहे वह कोई भी हो, मीडिया में अपनी निजी राय देता है, तो हम उस पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।’ PCC अध्यक्ष के. सुधाकरन और CLP नेता वी. डी. सतीसन ने बैठक में कहा कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं है।

शशि थरूर को इशारों में कड़वा डोज
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन उनका साफ-साफ इशारा शशि थरूर की तरफ था। थरूर केरल से ही आते हैं और कांग्रेस के टिकट पर जीतकर चौथी बार सांसद हैं। हाल ही में थरूर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पीएम मोदी की मुलाकात की तारीफ की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने पी. विजयन के नेतृत्व वाली केरल की वामपंथी सरकार की भी दिल खोलकर तारीफ की थी। एक अंग्रेजी अखबार में छपे उनके लेख पर कांग्रेस काफी लाल हुई थी। थरूर ने निवेश आकर्षित करने, बिजनस और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए विजयन सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए इसे महत्वपूर्ण बदलाव करार दिया था। उन्होंने कहा, ‘ये (आर्थिक) बदलाव एक कम्युनिस्ट-नीत एलडीएफ सरकार के तहत शुरू हुआ है जो आश्चर्यजनक लगता है लेकिन यह पूरी तरह से चौंकाने वाला भी नहीं है।’

पीएम मोदी और केरल की लेफ्ट सरकार की तारीफ कांग्रेस को बहुत नागवार गुजरी। राहुल गांधी ने शशि थरूर को दिल्ली भी तलब किया। मुलाकात के दौरान थरूर ने गांधी से पार्टी में अपनी भूमिका साफ करने की गुजारिश की लेकिन उन्होंने उसे कोई खास तवज्जो नहीं दी। कुछ दिन पहले ही उन्होंने एक मलयालम पॉडकास्ट में तमाम सवालों के जवाब दिए थे। उसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अगर कांग्रेस को उनकी जरूरत नहीं है तो उनके पास भी कई विकल्प हैं। हालांकि, बाद में थरूर ने दावा किया कि उन्होंने जो बात कही ही नहीं, वो बात पॉडकास्ट के हवाले से न्यूज रिपोर्ट में कही जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि विकल्प होने की बात उन्होंने इस संदर्भ में कहा था कि उनके पास अपना समय गुजारने के लिए बहुत सारे विकल्प हैं।

थरूर ने सिर्फ पीएम मोदी और केरल की एलडीएफ सरकार की तारीफ ही नहीं की, उन्होंने सूबे में कांग्रेस के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने चुनाव में लेफ्ट का सामना करने के लिए राज्य यूनिट में प्रभावशाली नेतृत्व या नेता की कमी की बात कही थी। हो सकता है कि थरूर की महत्वाकांक्षा सीएम बनने की हो लेकिन खरगे ने संकेत दे दिया है कि केरल का चुनाव पार्टी किसी को सीएम फेस बनाए बगैर लड़ेगी।

दूसरे राज्य के नेताओं के लिए भी संदेश
कांग्रेस आलाकमान ने जिस तरह केरल यूनिट के नेताओं को बयानबाजियों को लेकर सख्त हिदायत दी है वो दूसरे राज्यों के पार्टी नेताओं के लिए भी संदेश है। अभी हाल ही में कर्नाटक के डेप्युटी सीएम डीके शिवकुमार ने पिछले महीने संपन्न हुए प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्थाओं की तारीफ की थी। उनके बयान पर पार्टी के भीतर कुछ हंगामा तो नहीं मचा लेकिन केरल मामले में पार्टी आलाकमान की सख्ती में इस तरह के बयानों के खिलाफ भी संदेश छिपा है।

क्यों दिखानी पड़ी कांग्रेस आलाकमान को सख्ती?
कांग्रेस ने अनुशासन और बयानबाजी को लेकर ये सख्ती इसलिए की है कि उसे केरल में इस बार अपनी सरकार बनाने की काफी उम्मीद है। लेकिन अंदरूनी कलह से पार्टी को नुकसान हो सकता है। इसलिए नेताओं को अनुशासित रहने के लिए कहा गया है। देखना होगा कि इस फैसले का केरल के चुनाव पर क्या असर पड़ता है। क्या कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ पाएगी? क्या पार्टी केरल की जनता का विश्वास जीत पाएगी? ये कुछ सवाल हैं जिनके जवाब आने वाले समय में मिलेंगे। फिलहाल पार्टी नेताओं को अनुशासन में रहने की सख्त हिदायत दी है। इससे साफ है कि कांग्रेस हाईकमान केरल चुनाव को लेकर कितना गंभीर है। वह किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता। देखना होगा कि यह रणनीति कितनी कारगर साबित होती है।

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