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ऐसे तो भानुमति का पिटारा ही खुल जाएगा…शादीशुदा महिला के गर्भ गिराने की मांग पर SC

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 24 हफ्ते की गर्भवती एक महिला की गर्भपात की मांग पर कुछ तीखे सवाल किए। महिला शादीशुदा है और प्रेग्नेंसी के 24 हफ्ते बाद अदालत से गर्भपात की इजाजत मांगी है जबकि प्रेग्नेंसी सामान्य है, भ्रूण को कोई दिक्कत नहीं है। इस मामले में अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह तो भानुमति का पिटारा ही खुल जाएगा और शादीशुदा जोड़े जब चाहे तब अदालत आने लगेंगे कि वे किसी वजह से बच्चा नहीं चाहते लिहाजा गर्भापत की इजाजत दी जाए। कोर्ट ने पूछा कि मर्जी से प्रेग्नेंसी हुई, अगर बच्चा नहीं चाहिए था तो जोड़े ने गर्भनिरोधक उपाय क्यों नहीं अपनाए।

दो बच्चों की मां महिला ने प्रेग्नेंसी के 24 हफ्ते बाद गर्भपात की इजाजत मांगी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस हिमा कोहली और बी. वी. नागरत्ना की बेंच ने कहा कि जोड़ा अगर बच्चा नहीं चाहता था तो उन्हें गर्भनिरोधक उपाय अपनाना चाहिए था। बेंच ने कहा कि ये कहा गया है कि कोर्ट ने रेप से जुड़ी प्रेग्नेंसी के मामलों में गर्भपात की इजाजत दी है लेकिन इस तरह के आदेश शादीशुदा जोड़े के स्वैच्छिक गर्भधारण के मामले में नहीं दिए जा सकते।

एक शादीशुदा महिला जिसके 2 बच्चे हैं, उसका पीरियड नहीं आया और उसे ध्यान नहीं आता कि कुछ गड़बड़ है? महिला को ये महसूस नहीं हुआ कि 5 महीने तक उसका पीरियड नहीं आया है? हमारा कानून, राज्य और उस जिंदगी (भ्रूण) के प्रति दायित्व है।
सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘हम जिंदगी के बारे में बात कर रहे हैं। ये स्वैच्छिक प्रेग्नेंसी थी और अचानक आप सोचने लगे कि अब आपको बच्चा नहीं चाहिए।’ कोर्ट ने ये भी टिप्पणी की कि जोड़े को 6 महीने तक का इंतजार नहीं करना चाहिए था।

दिल्ली की रहने वाली महिला की तरफ से पेश हुए वकील ने कोर्ट से कहा कि जोड़े को प्रेग्नेंसी के बारे में बहुत देर से पता चला, इसी वजह से गर्भपात की इजाजत मांगने में देरी हुई। लेकिन बेंच ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा, ‘एक शादीशुदा महिला जिसके 2 बच्चे हैं, उसका पीरियड नहीं आया और उसे ध्यान नहीं आता कि कुछ गड़बड़ है? महिला को ये महसूस नहीं हुआ कि 5 महीने तक उसका पीरियड नहीं आया है? हमारा कानून, राज्य और उस जिंदगी (भ्रूण) के प्रति दायित्व है। वह और उसके पति ने गर्भनिरोधक उपाय क्यों नहीं किए? अगर इसे इजाजत दी गई तो इससे भानुमति का पिटारा खुल जाएगा। ऐसे जोड़े जो किसी न किसी वजह से बच्चे नहीं चाहते वे अबॉर्शन के लिए कोर्ट की दौड़ लगाने लगेंगे।’

महिला के वकील ने शीर्ष अदालत में कहा कि उनकी मुवक्किल अपने दूसरे बच्चे के जन्म के बाद से ही डिप्रेशन का शिकार है, इसलिए वह गर्भपात कराना चाहती हैं। वह तीसरे बच्चे की देखभाल नहीं कर पाएंगी। बेंच ने तब उसे दिल्ली एम्स के मेडिकल बोर्ड से जांच कराने और शुक्रवार को बोर्ड के सामने पेश होने का निर्देश दिया। मामले में अब अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

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