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बांग्लादेश में भी ‘इंडिया आउट’ कैंपेन, जोर पकड़ रही भारतीय समानों के बहिष्कार की अपील, ये बनी वजह

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ढाका:

बांग्लादेश में इस साल जनवरी में हुए आम चुनाव के बाद लगातार भारत विरोधी अभियान देखने को मिल रहा है। इस चुनाव में शेख हसीना के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ अवामी लीग लगातार चौथी बार सत्ता में लौटी है। बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने चुनाव का बहिष्कार किया था और भारत पर चुनावों को प्रभावित करने का आरोप लगाया था। इसके बाद से बांग्लादेश में सोशल मीडिया पर “इंडिया आउट” अभियान देखने को मिल रहा है। ये अभियान बीते मालदीव में चुनाव प्रचार के समय मोहम्मद मुइज्जू की ओर से चलाए गए अभियानों की तरह ही है।

द डिप्लोमैट की खबर के अनुसार, इंडिया आउट अभियान के तहत बांग्लादेशी जनता का एक वर्ग चुनाव में अवामी लीग की भूमिका को लेकर असंतोष दर्शाता है। अभियान समर्थकों का कहना है कि भारत का अवामी लीग को समर्थन अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए है। ऐसा करते हुए भारत ने बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया है। सोशल मीडिया यूजर्स बांग्लादेश के घरेलू मामलों में भारत के निरंतर हस्तक्षेप के विरोध में भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान कर रहे हैं।

चुनावों में निष्पक्षता का अभाव भी बनी वजह
रिपोर्ट कहती है कि बांग्लादेश में पिछले दशक में हुए चुनावों में सत्तारूढ़ अवामी लीग पर लगातार अनियमितता और हेरफेरी के आरोप लगे हैं। इससे लोगों की बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के बारे में चिंताएं बढ़ गई हैं। काफी तादाद में लोग ये मान रहे हैं कि भारत का अवामी लीग को समर्थन मिल रहा है। बांग्लादेश में न्यायपालिका और कानून प्रवर्तन एजेंसियों जैसी संस्थाओं की कमजोरी को लेकर भी चिंता है, जिन्हें राजनीतिक विरोध और असहमति को कुचलने के लिए हथियार बनाया गया है। माना जाता है कि इन संस्थानों पर भारत का काफी प्रभाव है।

बांग्लादेश के पूर्व विदेश सचिव तौहीद हुसैन ने अपनी किताब “1971-2021: बांग्लादेश-भारत शॉम्पोरकर पोंचश बोचोर” में कहा है कि “बांग्लादेश के भीतर प्रमुख पदों पर नियुक्तियों के लिए भारत की सहमति एक शर्त है।” बांग्लादेश में भी यह धारणा है कि भारतीय दूतावास नागरिक और सैन्य नौकरशाही में प्रमुख निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है। भारत के बारे में ये धारणाएं अब सोशल मीडिया पर “इंडिया आउट” अभियान में शामिल हो गई हैं। ये अभियान कितना लंबा चलेगा, इस पर कई सवाल हैं। इसकी वजह ये है कि भारत और बांग्लादेश एक जटिल संबंध साझा करते हैं लेकिन फिलहाल इस अभियान का बांग्लादेश में प्रभाव दिख रहा है।

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