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सिंधु नदी का पानी पंजाब से जा रहा पाकिस्तान, तरस रहे हरियाणा और राजस्थान, आखिर यह कैसी रणनीति?

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चंडीगढ़

2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जालंधर में एक रैली की थी। उन्होंने कहा था कि वो ये सुनिश्चित करेंगे कि सिंधु नदी का जो पानी पाकिस्तान जा रहा है, वह पंजाब की धरती को मिले। आज नौ साल बाद भी, पंजाब की नदियों का बहुत सारा पानी पाकिस्तान जा रहा है। वहीं, पंजाब खुद पानी की कमी से जूझ रहा है और हरियाणा का पानी बंद करने से उसे भी पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है।

पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच पानी की लड़ाई
समस्या यह है कि भारत के पास पानी को जमा करने का कोई तरीका नहीं है। सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) के तहत भारत का इस पानी पर पूरा अधिकार है। जब पानी की कमी होती है, तो पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्य भी इस पानी के लिए आपस में लड़ते हैं। लेकिन मॉनसून में जब नदियां उफान पर होती हैं, तो पानी को रोकने का कोई उपाय नहीं होता। पाकिस्तान हमेशा भारत पर ज्यादा पानी छोड़ने का आरोप लगाता है।

क्या हुआ था समझौता
सिंधु जल संधि के अनुसार, सिंधु नदी प्रणाली की ‘पूर्वी नदियों’- सतलुज, ब्यास और रावी का सारा पानी भारत बिना किसी रोक-टोक के इस्तेमाल कर सकता है। पाकिस्तान को ‘पश्चिमी नदियों’- सिंधु, झेलम और चिनाब से पानी मिलता है।

पंजाब को कितना पानी चाहिए?
पंजाब में पानी की समस्या गंभीर है। राज्य की लगभग 47% पानी की जरूरत भूजल से पूरी होती है जो तेजी से घट रहा है। पंजाब को हर साल 66।12 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी की जरूरत होती है। इसमें से 62।58 BCM पानी खेती के लिए चाहिए। लेकिन, राज्य में कुल 52।85 BCM पानी ही उपलब्ध है। इस तरह 13।27 BCM पानी की कमी है। बारिश से 20।98 BCM पानी मिल जाता है, और 17।07 BCM पानी भूजल से मिलता है जिसे फिर से भरा जा सकता है। नहरों से 14।80 BCM पानी मिलता है।

सतलुज, रावी और ब्यास के पानी का हाल
पंजाब एक बड़ा नदी वाला राज्य है। फिर भी उसे अपनी तीन नदियों (सतलुज, रावी और ब्यास) से बहुत कम पानी मिलता है। इन नदियों में कुल 42।4 BCM पानी है। पंजाब को सिर्फ 17।95 BCM पानी मिलता है, बाकी पानी हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों को दिया जाता है। नहरों से लगभग 14।80 BCM पानी मिलता है। 13।27 BCM पानी की कमी को भूजल का ज्यादा इस्तेमाल करके पूरा किया जा रहा है। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना के डॉ. राकेश शारदा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) ने 2017 में एक स्टडी की थी। इस स्टडी में पता चला कि पंजाब में भूजल बहुत तेजी से घट रहा है।

पूर्वी नदियों से पाकिस्तान को कितना पानी जाता है?
हर साल रावी नदी से बहुत सारा पानी बिना इस्तेमाल हुए पाकिस्तान चला जाता है। पंजाब की नदियों में 42।6 BCM पानी है, लेकिन राज्य सिर्फ 14।80 BCM पानी ही इस्तेमाल करता है। बाकी पानी राजस्थान (लगभग 10।6 BCM), हरियाणा और पाकिस्तान को जाता है। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) के सूत्रों के अनुसार, मॉनसून के मौसम में इन नदियों का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान को छोड़ दिया जाता है।

उदाहरण के लिए, 2019 में अप्रैल से जून तक सतलुज, ब्यास और रावी नदियों पर बने बड़े बांधों से लगभग 2,060 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी छोड़ा गया था। इसमें से 30-40% पानी पंजाब में सिंचाई के लिए इस्तेमाल हुआ, जबकि बाकी पानी नहरों के जरिए पाकिस्तान और दूसरे भारतीय राज्यों को छोड़ दिया गया। सेंट्रल वाटर कमीशन (CWC) के आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य सरकार बाढ़ से बचने के लिए अतिरिक्त पानी छोड़ती है। लेकिन, इससे ये भी पता चलता है कि पंजाब अपनी जरूरत के हिसाब से पानी का इस्तेमाल करने में नाकाम रहा है।

पंजाब इस पानी को क्यों नहीं जमा कर रहा है?
सिर्फ सतलुज, ब्यास और रावी नदियों पर ही बांध बने हैं। छोटी नदियों और नालों का पानी भारी बारिश के दौरान बड़े इलाकों में बाढ़ लाता है। इन नदियों को बेहतर तरीके से मैनेज करने की जरूरत है। नहरों के जरिए पानी को सही दिशा में मोड़ने, छोटे बांध बनाने या तटबंध बनाने जैसे उपाय अभी तक ठीक से लागू नहीं किए गए हैं। 2019 में जब पंजाब में बाढ़ आई थी, तब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नदियों और पानी के दूसरे स्रोतों को नहरों से जोड़ने की योजना बनाई थी। लेकिन, इस पर कोई खास काम नहीं हुआ है।

पंजाब की नहर प्रणाली को भी बदलने की जरूरत है। खासकर ब्यास नदी और उसकी सहायक नदियों से आने वाले अतिरिक्त पानी को मैनेज करने के लिए। इससे पानी को सिंचाई के लिए मोड़ने और तेजी से घटते भूजल को फिर से भरने में मदद मिलेगी। लोगों ने बाढ़ के मैदानों पर भी कब्जा कर लिया है, जिससे पानी को मैनेज करना और भी मुश्किल हो गया है।

पंजाब में शहरों में पानी की किल्लत
पंजाब के बड़े शहरों जैसे जालंधर, लुधियाना और अमृतसर में गर्मियों के दौरान पानी की बहुत कमी हो जाती है। जालंधर में ब्यास नदी से पानी लाने का एक प्रस्ताव था। लेकिन, लगभग 2,000 करोड़ रुपये की यह परियोजना अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। संक्षेप में, पंजाब में पानी की समस्या बहुत गंभीर है। राज्य को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि नदियों का पानी पाकिस्तान जा रहा है।

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