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क्या ‘विपक्ष तोड़ो यात्रा’ में तब्दील हो रही कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’?

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नई दिल्ली ,

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले कांग्रेस के सियासी आधार को दोबारा से मजबूत करने के लिए राहुल गांधी कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा पर निकले हैं. राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे विपक्षी एकता के दावे तार-तार हो रहे हैं. कांग्रेस ने टीएमसी, सीपीएम और आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि कांग्रेस को कमजोर करने की कीमत पर विपक्षी एकता नहीं हो सकती. ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा कहीं विपक्ष तोड़ो यात्रा में तब्दली न हो जाए.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश साफ तौर पर कह चुके हैं कि भारत जोड़ो यात्रा विपक्षी एकता के लिए यात्रा नहीं है. भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए एक यात्रा है. एक मजबूत कांग्रेस के बिना, विपक्षी एकता की कल्पना नहीं की जा सकती है.उन्होंने कहा कि जो भी राजनीतिक दल कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते है, उसे यह नहीं सोचना चाहिए कि कांग्रेस से सब कुछ ले लूं और कांग्रेस को कुछ नहीं दूं. अब तक हर कोई कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश करता रहा है.

सीपीएम ने साधा था कांग्रेस पर निशाना
जयराम रमेश का यह बयान सीपीएम की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें लेफ्ट पार्टी ने कहा था कि राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के तहत केरल में ज्यादा दिन बिता रहे हैं, जबकि उन्हें यूपी में ज्यादा दिन बिताना चाहिए. सीपीएम ने ट्वीट कर कहा था, ‘भारत जोड़ो है या सीट जोड़ो? केरल में 18 दिन और यूपी में 2 दिन. बीजेपी-आरएसएस से लड़ने का यह निराला तरीका.

केरल में कांग्रेस और लेफ्ट एक दूसरे के खिलाफ हैं. राहुल गांधी केरल से सांसद हैं और भारत जोड़ो यात्रा के तहत इन दिनों वो केरल में पदयात्रा कर रहे हैं, जिसे लेकर सीपीएम चिंतित दिख रही है. यही वजह है कि कांग्रेस और लेफ्ट के बीच जुबानी जंग तेज हो गई हैं.

बता दें कि कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब देश में कुछ विपक्षी पार्टियां बीजेपी के खिलाफ 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए विपक्ष को एकजुट करने की मुहिम में जुटी हुई हैं.तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनसीपी चीफ शरद पवार तक विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं.

नीतीश कुमार कई दिनों तक दिल्ली में डेरा डालकर एक दर्जन से ज्यादा विपक्षी दलों के नेताओं से मिलकर भरपूर कोशिश करके यह कहकर पटना लौटे हैं कि सोनिया गांधी के विदेश से लौटने पर फिर से दिल्ली मुलाकात करने आएंगे. वहीं, ममता बनर्जी का एजेंडा साफ है कि 2024 में नीतीश कुमार, हेमंत सोरेन और अखिलेश यादव जैसे क्षत्रपों को साथ मिलकर मोर्चा बनाएंगे, लेकिन कांग्रेस और लेफ्ट को साथ नहीं रखने का संदेश दे रही हैं. ऐसे केसीआर भी ऐसे ही 2024 के लिए विपक्षी एकता का तानाबाना बुन रहे हैं.

कांग्रेस यह बात अच्छे से समझ रही है कि 2024 के चुनाव में उसके बिना बीजेपी को चुनौती नहीं दी सकती है. इस बात का संकेत कांग्रेस ही नहीं बल्कि जेडीयू भी दे चुकी है. जेडीयू के महासचिव केसी त्यागी ने पिछले दिनो कहा था कि बिना कांग्रेस और वामदल के बीजेपी के खिलाफ मजबूत लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है. विपक्षी पार्टियों को आपसी मतभेद मिटाकर एक साथ आना होगा.

बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए राहुल गांधी इन दिनों ‘भारत जोड़ो यात्रा’ कर रहे हैं. राहुल की यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, विपक्षी एकता के दावों और प्रयासों पर सवाल खड़े होने लगे हैं. सीपीएम सवाल खड़े कर रही है कि कांग्रेस की लड़ाई बीजेपी से है या फिर विपक्षी दलों से. वहीं एनसीपी ने कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से अपना पल्ला झाड़ लिया है और कहा कि यह कांग्रेस की यात्रा है यूपीए की नहीं.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पदयात्रा के दौरान कहा था कि भारत जोड़ो यात्रा देश के लोगों को एकसाथ लाने के लिए है. यह विपक्षी एकता में मदद करेगी, लेकिन यह इसका मुख्य मकसद नहीं था. हालांकि, राहुल ने कन्याकुमारी से भारत जोड़ो यात्रा जब शुरू की थी तो उस दौरान तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन मौजूद थे.स्टालिन की पार्टी डीएमके यूपीए का हिस्सा है. इसके बाद कांग्रेस की यात्रा तमिलनाडु से जैसे ही केरल में एंट्री की, वैसे ही सवाल खड़े होने लगे. सीपीएम भले ही केरल में कांग्रेस के खिलाफ नजर आए, लेकिन केंद्रीय स्तर पर साथ है.

राहुल की छवि चमकाना चाहती है कांग्रेस
भारत जोड़ो यात्रा के जरिए कांग्रेस एक तरफ बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है तो दूसरी तरह राहुल गांधी की छवि को मजबूत बनाना चाहती है ताकि 2024 के चुनाव में उन्हें मोदी के खिलाफ चेहरे के तौर पर आगे कर सके. कांग्रेस भी विपक्षी एकता में खुद को मुख्य भूमिका में रखकर देखती है और ऐसे में वो अपने आपको 2024 के लिए हो रही कवायद से खुद को बाहर नहीं रखना चाहती.

जयराम रमेश ने कहा कि हम कांग्रेस पार्टी को मजबूत करेंगे, और अगर विपक्षी एकता की जरूरत है, तो हम निश्चित रूप से विपक्षी एकता की दिशा में काम करेंगे. हम उन पार्टियों के साथ विपक्षी एकता नहीं रख सकते जो कांग्रेस को कमजोर करने की मंशा रखते हैं. उन्होंने कहा कि केरल में सीपीएम ‘बीजेपी की एक टीम’ है.केरल में, सीपीएम बीजेपी को प्रोत्साहित करने की पूरी कोशिश कर रही है, क्योंकि बीजेपी को प्रोत्साहित करके ही सीपीएम केरल में कांग्रेस को कमजोर करने में सफल होगी.

बीजेपी के साथ अन्य विपक्षी दल भी कांग्रेस के निशाने पर
जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस भारत की एकमात्र राजनीतिक पार्टी है जिसका बीजेपी के साथ कभी कोई गठबंधन नहीं रहा है. उसका बीजेपी से गठबंधन नहीं हो सकता, लेकिन हर दूसरे राजनीतिक दल ने बीजेपी से समझौता किया है, जिसमें वामपंथी भी शामिल हैं. साथ ही टीएमसी को निशाने पर लेते हुए जयराम रमेश ने कहा कि ममता बनर्जी भी एक दिन सुबह आरएसएस की तारीफ करेंगी और दोपहर में कुछ और 6कहेंगी. उन्होंने कहा कि ममता बंगाल में कांग्रेस को कमजोर करने और बीजेपी के उभार के लिए जिम्मेदार हैं.

कांग्रेस ने कहा कि केजरीवाल बीजेपी की ‘बी’ टीम हैं यह बात जगजाहिर है. इस तरह कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि उसके लिए विपक्षी एकता से ज्यादा उसकी अपनी मजबूती है.कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को कुल 3570 किलोमीटर का सफर तय करना है, जिसमें से अभी तक महज डेढ़ सौ किलोमीटर का सफर ही पूरा हुआ है, लेकिन इतनी की दूरी में कई सहयोगी दलों के साथ उसके टकराव की बात सामने आने लगी है. ऐसे में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा कहीं विपक्षी एकता की मुहिम को तार-तार न करे दे.

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