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क्‍या चीन का फायदा उठाने की सोच रहा है पाकिस्‍तान, कब जिनपिंग करेंगे ‘छोटे भाई’ की मदद

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इस्‍लामाबाद

चीन और पाकिस्‍तान के रिश्‍ते किसी से छिपे नहीं हैं। साल 2015 में जब चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग पाकिस्‍तान के दौरे पर गए थे तो उन्‍होंने कहा था कि ऐसा लगता है कि वह अपने छोटे भाई के घर आ गए हैं। अब उनका यही छोटा भाई मुश्किलों में है। एक तरफ आतंकवाद सिर उठा रहा है तो दूसरी तरफ आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। इन सबके बीच अब अर्थव्‍यवस्‍था के जानकार पूछ रहे हैं कि क्‍या यह दोस्‍त भी मदद के लिए आगे नहीं आएगा। चीन की हेबई यूनिवर्सिटी में रिसर्च फेलो राजनीतिक अर्थशास्‍त्री शकील अहमद रामे ने एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून में लिखा है कि चीन वाकई इस स्थिति में पाकिस्‍तान की मदद कर सकता है?

पाकिस्‍तान की परेशानियां दोगुनी
शकील के मुताबिक दुनियाभर में स्थितियां तेजी से बदल रही हैं और नई चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। पाकिस्‍तान में एक अलग ही स्थिति है। यहां पर राजनीतिक पार्टियां आपस में ही लड़ रही हैं और देश के हालात और जटिल हो गए हैं। उन्‍हें किसी भी कीमत पर बस सत्‍ता से मतलब है। देश की अर्थव्‍यवस्‍था एक आम आदमी की कमर तोड़ रही है। राजनेताओं ने देश में परिस्थितियां और खराब कर दी हैं। इन सबके बीच पश्चिमी देशों और चीन के बीच एक तरह का शीत युद्ध चल रहा है। इसकी वजह से पाकिस्‍तान की परेशानियां दोगुनी हो गई हैं।

कैसे फायदेमंद साबित होगा चीन
शकील के मुताबिक पश्चिमी ताकतें इस समय अलग-अलग देशों का पक्ष ले रही हैं मगर पाकिस्‍तान उनके लिए अपवाद बना हुआ है। शकील मानते हैं कि पाकिस्‍तान शीत युद्ध का पीड़‍ित बन गया है। उसे कई हिस्‍सों में तटस्‍थ रहने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है और अर्थव्‍यवस्‍था पूरी तरह से बिखर चुकी है। एशियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ इको-सिविलाइजेशन के मुताबिक चीन कई तरह से पाकिस्‍तान की मदद कर सकता है। चीन और पाकिस्‍तान दोनों के बीच भाईयों से रिश्‍ते हैं और कई दशक से ये रिश्‍ते कायम हैं। दोनों देश अक्‍सर एक-दूसरे के साथ खड़े नजर आते हैं।

शरीफ को करना है फैसला
चीन इस समय दुनिया की बड़ी अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक है। यह 1400 मिलियन उपभोक्‍ताओं का बाजार है जो कि सबसे बड़ा है। पाकिस्‍तान को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। चीन खाद्य उत्‍पादों को निर्यात करने वाले सबसे बड़े देशों में श‍ामिल है। मीट, सोयाबीन, सी-फूड के अलावा फल, गेहूं और डेयरी उत्‍पादों को निर्यात करने में यह आगे है। चीन का फूड मार्केट पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था में जान फूंक सकता है। ऐसे में पाकिस्‍तान के राजनेताओं को उन तरीकों के बारे में सोचना होगा कि कैसे वह चीन के साथ इस दिशा में काम कर सकते हैं।

CPEC का फायदा
पाकिस्‍तान ऐसा करके विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ा सकता है। साथ ही चीन से अच्‍छी क्‍वालिट के सस्‍ते खाद्य पदार्थ भी पाकिस्‍तान को मिल सकते हैं। पाकिस्‍तान, चीन के फ्लैगशिप प्रोजेक्‍ट बेल्‍ट एंड रोड इनीशिएटिव (BRI) का घर है। बीआरआई के तहत आने वाला चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) वह प्रोग्राम है जिसके जरिए अर्थव्‍यवस्‍था पूरी तरह से बदल सकती है। साथ ही देश फिर से पटरी पर लौट सकता है। पाकिस्‍तान, अपने मकसद के लिए सीपीईसी का प्रयोग कर सकता है।

पाकिस्‍तान के पास मौके ही मौके
बीआरआई सबसे बड़ा प्रोग्राम है जिसके साथ 149 देश सदस्‍य हैं। ऐसे में पाकिस्‍तान बीआरआई के जरिए दुनिया के 150 बाजारों से जुड़ सकता है। शकील मानते हैं कि पाकिस्‍तान को चीन के साथ मिलकर काम करना होगा। चीन उसके लिए मौकों को वह बाजार है जो स्थिति को एकदम बदल सकता है।

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