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लद्दाख बॉर्डर पर तैनात चीनी सैनिकों से जिनपिंग ने की बात, पूछा- फ्रेश सब्जी मिल रही है?

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बीजिंग,

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन बॉर्डर पर तैनात चीनी सैनिकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मुलाकात की है. शी जिनपिंग ने इन सैनिकों को पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के हेडक्वार्टर से संबोधित किया और सैनिकों की युद्ध तैयारियों का जायजा लिया. चीन की सरकारी मीडिया ने इस बात की जानकारी दी है.

पूर्वी लद्दाख स्थित भारत-चीन का बॉर्डर दुर्गम स्थानों में से एक है. यहां सर्दियों में तापमान शून्य से 20-30 डिग्री तक नीचे चला जाता है. यहां भारत और चीन के हजारों सैनिक सरहद की हिफाजत में तैनात हैं. बता दें कि अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हाल में हुए टकराव के बाद ये अहम मौका है जब जिनपिंग ने लद्दाख बॉर्डर में तैनात सैनिकों के साथ बातचीत की है.

जिनपिंग ने जाना- युद्ध के लिए कितनी तैयार है चीनी सेना
शी जिनपिंग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस सैनिकों से संवाद किया. चीन की सरकारी मीडिया की ओर से जारी वीडियो में कहा गया कि जिनपिंग ने इस जगह पर तैनात सैनिकों को कहा कि ‘हाल के समय में इस क्षेत्र में लगातार बदलाव आ रहा है’, और किस तरह इस बदलाव ने आर्मी पर असर डाला है. बता दें कि शी जिनपिंग कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन के महासचिव भी हैं साथ ही वह पीएलए के कमांडर इन चीफ भी हैं.

सैनिकों के साथ बातचीत के दौरान जिनपिंग ने इस बात का भी जायजा लिया कि चीनी जवान युद्ध के लिए कितने तैयार है. चीन की एजेंसियों के अनुसार एक सैनिक ने जिनपिंग को कहा कि 24 घंटे सजग होकर बॉर्डर की निगरानी कर रहे हैं.

क्या मिल रही है फ्रेश सब्जियां
चीनी राष्ट्रपति ने सैनिकों का हालचाल पूछा और ये जानना चाहा कि क्या उन्हें इस मौसम में ऐसे दुर्गम जगह पर ताजा सब्जी मिल रही है. चीन की आधिकारिक मीडिया ने बताया कि शी ने सीमा पर मौजूद सैनिकों से “उनकी सीमा पर गश्त और प्रबंधन कार्य के बारे में” पूछा. इसके साथ ही जिनपिंग ने अपने सैनिकों को कोशिश करते रहने और नए योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया.

पूर्वी लद्दाख में हो चुकी है मुठभेड़
पूर्वी लद्दाख वह क्षेत्र है जहां 5 मई, 2020 को पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच गतिरोध शुरू हो गया था. इसके बाद 15 जून 2020 को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने धोखे से भारतीय सैनिकों पर हमला किया था. चीन की ओर से किये गए इस विश्वासघात में भारत के कमांडिंग ऑफिसर के संतोष बाबू समेत 20 जवान सैनिक शहीद हो गए थे.

हालांकि चीनियों ने ये हमला भारत के सैनिकों पर अचानक किया था. फिर भी उन्हें इसका मुंहतोड़ जबाव मिला. भारतीयों की जवाबी कार्रवाई में चीन के 30 से ज्यादा सैनिक मारे गए. हालांकि चीन ने पहले तो अपने सैनिकों के मौत को स्वीकार ही नहीं किया. लेकिन कई महीनों बाद चीन ने माना कि उसके 5 सैनिक इस हमले में मारे गए थे. भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध को सुलझाने के लिए 17 दौर की उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता किए हैं.

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