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मणिपुर: आधे घंटे तक फुटबॉल की तरह किक मारते रहे, फिर मरा समझ कर छोड़ गए… 19 साल की पीड़िता ने सुनाई भयानक आपबीती

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इंफाल

मणिपुर में दो महिलाओं के साथ हैवानियत वीडियो सामने आने के बाद वहां के हालातों पर फिर से बहस छिड़ गई है। दो समुदाय के बीच संघर्ष में महिलाओं को किस तरह शिकार बनाया जा रहा है, उन पर कैसे जुल्म हो रहे हैं, इसकी भी तस्वीर देखने को मिल रही है। मणिपुर में यौन हमलों की शिकार 19 साल की युवती ने अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ को बताया कि हमलावरों ने उसके साथ क्या-क्या किया।

पीड़िता मणिपुर के एक हेल्थकेयर इंस्टिट्यूट की छात्रा है। उसने बताया कि 4 मई को मेतेई समुदाय की भीड़ ने उस पर हमला किया। युवती ने बताया कि उस दिन उसके साथ जो हुआ उसका कलंक वह अब भी ढो रही है।

पीड़िता ने बताया, ‘4 मई को हमारे कॉलेज के छात्रावास में हमलावर घुस आए थे। उन्होंने आईडी कार्ड देखकर कुकी छात्र छात्राओं को निशाना बनाना शुरू किया। छात्रावास में करीब 90 स्टूडेंट्स थे। हममें से 10 लोग मौजूद थे लेकिन दो को पुलिस ने बचा लिया और बाकी 6 भाग गए। मुझे और मेरी दोस्त को हमलावर ने पकड़ लिया।’

युवती ने बताया, ‘लगभग आधे घंटे से अधिक समय तक वो लोग हमें फुटबॉल की तरह लात मारते रहे। पुरुषों का समूह हमारे ऊपर कूद रहा था। मेरे पास उस भयानक घटना को बताने के शब्द नहीं है। मैं उन महिलाओं की हंसी नहीं भूल सकती जो हमारे ऊपर हमले के समय खुशी से चिल्ला रही थीं और पुरुषों को हमें मारने के लिए उकसा रही थीं। बेहोश होने से पहले तक मुझे उन लोगों की आवाज सुनाई दी कि क्या मैं जिंदा हूं। शायद उन्होंने हमें मरा हुआ समझकर छोड़ दिया।’

हमले की शिकार युवती ने बताया, ‘मुझे इंफाल के जवाहरलाल नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (जेएनआईएमएस) में होश आया। मुझे बताया गया कि पुलिस मुझे सड़क से उठाकर यहां लेकर आई।’

पीड़िता कुकी बहुल चुराचांदपुर जिले में रह रही है। उसने बताया, ‘मुझे काफी चोटें आईं लेकिन भगवान का शुक्र है, मैं किसी स्थायी विकलांगता का शिकार नहीं हुई। स्वास्थ्य सेवा में करियर बनाने का मेरा सपना खत्म हो गया है क्योंकि मैं इंफाल लौटने के बारे में सोच भी नहीं सकती। मेरे इलाज पर बहुत बड़ी रकम खर्च हो गई है और मेरा परिवार बहुत संकट में है। मैं अभी भी सदमे में हूं। पूरे शरीर पर लगे टांके मुझे याद दिलाते हैं कि उन लोगों ने मेरे साथ क्या किया था। मेरी दोस्त भी ऐसी ही तकलीफ से गुजर रही है।’

छात्रा को मणिपुर में इलाज के लिए दिल्ली के एम्स लाया गया था जहां उत्तम नगर पुलिस थाने में उसने जीरो एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में मैंने ये बताया है कि किस तरह 150 हथियारबंद पुरुषों और महिलाओं ने चार मई को शाम चार बजे मेरे इंस्टिट्यूट पर हमला कर मुझे निशाना बनाया। एफआईआर के 65 दिन हो चुके हैं लेकिन मैं अब भी न्याय का इंतजार कर रही हूं।

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