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मोरबी हादसा: केबल भी नहीं बदला… मरम्मत के नाम पर रंग-रोगन कर कंपनी ने खोल दिया था पुल!

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अहमदाबाद

मोरबी सस्पेंशन ब्रिज ढहने से 135 लोगों की मौत हो गई। इस मामले में जांच कर रहे सरकारी अधिकारियों ने खामियों का खुलासा किया। प्राथमिक जांच में ठेका लेने वाले कंपनी की एक या दो नहीं बल्कि खामियों का पुलिंदा मिला है। पता चला है कि कंपनी ने मरम्मत के नाम पर पुल और कैबल्स को पेंट और पॉलिश कर दिया था। नवीनीकरण से पहले और बाद में 143 साल पुरानी संरचना का संरचनात्मक ऑडिट करने में विफल रही। माना जा रहा है कि सामग्री का उपयोग ज्यादा होने से इसका वजन और बढ़ गया, इस सबके अलावा इमरजेंसी से निपटने और निकासी के लिए कोई इंतजाम नहीं थे।

इन प्रारंभिक तकनीकी टिप्पणियों के अलावा, जिस तरह से ओरेवा समूह को पुल के नवीनीकरण का ठेका दिया गया, उस पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब कंपनी के पास सिविल वर्क का अनुभव नहीं था तो उन्हें हैंगिंग ब्रिज का ठेका कैसे मिला? पुल पर किए गए काम की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

26 अक्टूबर को हुआ था रंग-रोगन
प्राथमिक जांच के बाद पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘ऐसा लगता है कि ठेकेदार ने 26 अक्टूबर को पुल को जनता के लिए फिर से खोलने से पहले सभी केबलों को पेंट और पॉलिश किया है। हमें अब तक यह पुष्टि करने के लिए कुछ भी नहीं मिला है कि उन खराब हो चुके केबलों में से कोई भी बदल दिया गया है। हम अब इस पहलू पर विस्तार से विचार कर रहे हैं।’

बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के खोला
सूत्रों ने कहा कि ठेकेदार को मरम्मत का काम पूरा करने के लिए दिसंबर तक का समय दिया गया था। इसके बावजूद कंपनी ने दिवाली और गुजराती नव वर्ष को देखते हुए हड़बड़ी दिखाई और इसे समय से पहले खोल दिया। कंपनी को त्योहारों की भीड़ के चलते अपना फायदा नजर आ रहा था। आरोप है कि कंपनी को पुल खोलने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं मिला था।

पुल की मरम्मत में यूज की गई भारी सामग्री?
मच्छू नदी पर बना फुटब्रिज रविवार शाम करीब 6.30 बजे ढह गया, जिससे झूलते हुए निलंबन ढांचे पर बैठे लगभग 400 लोग शैवाल से ढकी नदी में गिर गए। इस हादसे में 134 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। इंजिनियरों की एक टीम इस बात की जांच कर रही है कि अगर पुल का नवीनीकरण किया गया तो क्या इसमें ज्यादा और भारी सामग्री प्रयोग की गई, जिससे पुल का वजन और बढ़ गया?

खामियां ही खामियां
प्राथमिक निरीक्षण के आधार पर, तकनीकी टीम का विचार था कि उस क्षेत्र में विशेषज्ञता वाले किसी व्यक्ति की ओर से नवीनीकरण न तो किया गया था और न ही मूल्यांकन किया गया था। अधिकारी ने कहा, ‘यह काम स्पष्ट रूप से स्थानीय विक्रेताओं और उप-ठेकेदारों ने बिना किसी विशेषज्ञ पर्यवेक्षण के ही किया। हम जांच कर रहे हैं कि इसकी अनुमति दी गई थी या नहीं?’ टीम ने पाया कि पुल के ढहने की प्रारंभिक प्रतिक्रिया और निकासी को कैसे संभाला गया, यह संकेत देता है कि आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं थी।

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