नई दिल्ली
मणिपुर हिंसा को लेकर केंद्र के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर आज दूसरे दिन की चर्चा चल रही है. इस दौरान राहुल गांधी ने मणिपुर मुद्दे को लेकर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. राहुल गांधी के बयान पर स्मृति ईरानी ने जवाब दिया. अविश्वास प्रस्ताव पर आज दूसरे दिन की बहस शुरू हो गई. अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने मणिपुर के मुद्दे पर पीएम मोदी पर निशाना साधा. राहुल ने कहा, पीएम मणिपुर नहीं गए. क्योंकि आप उनके लिए मणिपुर भारत में नहीं है. राहुल ने कहा, मणिपुर में हिंदुस्तान की हत्या की गई. आपने मणिपुर को दो हिस्सों में बांट दिया, उसे तोड़ दिया. मणिपुर में भारत माता की हत्या की गई. राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पलटवार किया. स्मृति ने कश्मीरी पंडितों के साथ अत्याचार और 1984 के सिख दंगों में महिलाओं के साथ हुईं घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, इनका इतिहास खून से सना है.
अमित शाह बोले कि कांग्रेस ने गरीबी हटाओ का नारा दिया. लेकिन गरीबी जस की तस रही. लेकिन मोदी ने इस समस्या को समझा क्योंकि उन्होंने गरीबी देखी थी. पीएम मोदी ने 9 साल में 11 करोड़ से ज्यादा परिवारों को शौचालय दिया. लोग क्लोराइड युक्त पानी पीते थे. मोदी ने हर घर जल योजना से 12 करोड़ से ज्यादा लोगों के घर तक पानी पहुंचाया. कांग्रेस कर्ज माफ करने का लॉलीपॉप देती थी, वहीं बीजेपी का अजेंडा है कि किसान को कर्ज ही ना लेना पड़े.
अमित शाह ने अविश्वास प्रस्ताव के तीन उदाहरणों का जिक्र किया
अविश्वास प्रस्ताव से गठबंधन के चेहरे उजागर होते हैं. तीन का जिक्र करूंगा. दो यूपीए सरकार के खिलाफ थे. एक NDA के खिलाफ. 1993 में नरसिम्हा सरकार थी. उसके खिलाफ प्रस्ताव आया. नरसिम्हा को सरकार किसी भी तरह सत्ता में बने रहना था. नरसिम्हा अविश्वास प्रस्ताव जीत गई. बाद में कई लोगों को जेल की सजा हुई, इसमें नरसिम्हा राव भी शामिल थे. क्योंकि झारखंड मुक्ति मोर्चा को घूस देकर प्रस्ताव पर विजय प्राप्त की गई. आज कांग्रेस और मुक्ति मोर्चा भी वहीं है.
2008 में मनमोहन सरकार विश्वास प्रस्ताव लेकर आई. ऐसा वातावरण था कि इनके पास बहुमत नहीं है. बहुमत था भी नहीं. उस वक्त सबसे कलंकित घटना देखी गई. सांसदों को करोड़ो रुपये की घूस दी गई. कुछ सांसद सदन के सामने आए और संरक्षण मांगा. हालांकि, तब सरकार को बचा लिया गया था.यूपीए का चरित्र यह है कि अविश्वास प्रस्ताव आए या विश्वास प्रस्ताव लाना पड़े इससे बचने के लिए सारे सिद्धांत, चरित्र, कानून, परंपरा से सत्ता को संभालना होता है.
वहीं 1999 में अटल सरकार थी. अविश्वास प्रस्ताव आया. कांग्रेस ने जो किया वो हम भी कर सकते थे. घूस देके सरकार बचा सकते थे. लेकिन हमने ऐसा नहीं किया. अटल वाजपेयी ने अपनी बात रखी और कहा कि संसद का जो फैसला है वह माना जाए. सिर्फ एक वोट से सरकार चली गई. UPA की तरह हम सरकार नहीं बचा सकते थे? बचा सकते थे लेकिन कई बार प्रस्ताव के वक्त चरित्र उजागर होता है.कांग्रेस का चरित्र भ्रष्टाचार का है. वहीं बीजेपी चरित्र सिद्धांत के लिए राजनीति करने वाला है. वाजपेयी की सरकार गई लेकिन अगली बार भारी बहुमत से वह जीते और पीएम बने.
अमित शाह ने गिनाए राजनीति ने तीन नासूर
शाह बोले भारतीय राजनीति को तीन नासूर- भ्रष्टाचार, परिवारवाद, तुष्टिकरण ने घेर लिया था. पीएम मोदी ने इसे दूर किया. भ्रष्टाचार क्विट इंडिया, परिवारवाद क्विट इंडिया, तुष्टिकरण क्विट इंडिया.
अविश्वास प्रस्ताव पर बोल रहे अमित शाह
अबतक लोकसभा में 27 अविश्वास और 11 विश्वास प्रस्ताव आ चुके हैं. इस बार पीएम मोदी और मंत्रीमंडल के प्रति किसी को अविश्वास नहीं है. इसका मकसद सिर्फ जनता में भ्रांति पैदा करना है. दो तिहाई बहुमत से दो बार NDA को चुना गया. सरकार अल्पमत में होने का मतलब ही नहीं है. आजादी के बाद देश में सबसे लोकप्रिय पीएम नरेंद्र मोदी हैं. 9 साल में पीएम ने 50 से ज्यादा ऐसे फैसले लिए जो युगों तक याद रखें जाएंगे.
