दंतेवाड़ा
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के अरनपुर में नक्सली हमले में 10 जवान और एक ड्राइवर की मौत हो गई है। अरनपुर के आसपास का घटनाक्रम बताया जा रहा है। अब तक मिली सूचना के मुताबिक वाहन के जरिए जवान आगे बढ़ रहे थे, तभी नक्सलियों ने बम बलास्ट कर दिया। इस ब्लास्ट में 11 जवान चपेट में आकर जान गंवा बैठे। घटना के बाद उस इलाके में CRPF के अतिरिक्त बल भेजे गए हैं। उस इलाके में रेस्कयू ऑपरेशन तेजी से चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि डीआरजी के जवान आमतौर पर वाहन के जरिए ऑपरेशनल इलाके में नहीं जाते हैं, बेहद जरूरी होने पर बाइक का इस्तेमाल करते हैं। इस वारदात में डीआरजी के जवान कैसे वाहन के जरिए आगे जा रहे थे इसपर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि उीआरजी के 10 जवान और एक ड्राइवर एक ही वाहन में सवार थे। जगरगुंडा सड़क निर्माण का कार्य अंतिम दौर में है। यहां एक और कैंप बनाने की तैयारी हो रही है। इसी वजह से डीआरजी के जवान यहां से आवाजाही कर रहे थे। यह इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसके बाद भी यहां वाहन का प्रयोग किया गया। लंबे समय से यहां आईडी बरामद किए जाते रहे हैं। घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि यहां डीआरजी जवान का वाहन गुजरने से पहले बम डिफ्यूज स्क्वायड को पहले रवाना नहीं किया गया होगा। इस वजह से आईडी के बारे में पता चल पाया। यह घटनाक्रम पक्की सड़क पर हुई है, जिसके चलते जवानों को अंदाजा ही नहीं था कि यहां आइडी होगा।
पक्के रोड पर नहीं था आईडी होने का अनुमान
मिली सूचना के मुताबिक डीआरजी जवान सर्च ऑपरेशन पर निकले थे। लौटते वक्त वे लोग एक पिकअप वैन में सवार हो गए थे। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक जवानों की थोड़ी लापरवाही से 10 जवान और एक ड्राइवर की जान गई है।इस घटना पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, ‘मैं जान गंवाने वाले जवानों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। यह लड़ाई अंतिम दौर में चल रही है। नक्सलियों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा। निश्चित रूप से कुछ योजनाबद्ध तरीके से बनाकर इस नक्सलबाद को समाप्त किया जा रहा है।’
अमित शाह ने हर मदद का दिया भरोसा
वहीं इस हमले को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने सीएम बघेल से बातचीत की. उन्होंने केंद्र की तरीफ से हर संभव मदद का भरोसा दिया है. 2017-18 में केंद्र सरकार ने नक्सलवाद से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ को 92 करोड़ रुपये दिए थे, जो 2020-21 में बढ़ाकर 140 करोड़ रुपये हो गए थे. हालांकि इसके बावजूद छत्तीसगढ़ सबसे ज्यादा मौतों के मामले में टॉप पर है.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस साल मार्च में बस्तर में थे लेकिन वह बिना पूर्व योजना के नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले सुकमा में भी पहुंच गए थे. उन्होंने यहां जवानों से मुलाकात की थी. इसके बाद वह एक गांव के एक सरकारी स्कूल पहुंच गए थे और वहां बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया था.
रमन सिंह ने बघेल पर बोला हमला
इस हमले को लेकर राज्य के पूर्व सीएम रमन सिंह ने भूपेश बघेल पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि यह कायराना हमला है लेकिन हर हमले के बाद बघेल यही बात कहते हैं और इसके बाद भी बड़ा हमला हो जाता है. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है. सघन सर्चिंग लगातार होनी चाहिए क्योंकि ऐसे हमलों में जवानों के साथ-साथ आम नागरिक भी मारे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब तक राज्यों के साथ समन्वय बनाकर नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन नहीं चलाया जाएगा, तब तक यह समस्या नहीं खत्म होगी.
छत्तीसगढ़ के आठ जिले नक्सल प्रभावित
सरकार द्वारा जारी 2021 के आंकड़ो के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में 8 जिले नक्सल प्रभावित हैं. इनमें बीजापुर, सुकमा, बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, राजनंदगांव और कोंडागांव शामिल हैं.
10 साल में 3722 नक्सली हमले, 489 जवान शहीद
गृह मंत्रालय ने अप्रैल 2021 में लोकसभा में बताया था कि पिछले 10 साल में यानी 2011 से लेकर 2020 तक छत्तीसगढ़ में 3 हजार 722 नक्सली हमले हुए. इन हमलों में हमने 489 जवान खो दिए.
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से ज्यादा आम लोग मारे गए
2011 से लेकर 2020 तक छत्तीसगढ़ में जितने भी नक्सली हमले हुए, उसमें नक्सलियों से ज्यादा आम लोग मारे गए. ये आंकड़े सरकार के ही बताए गए हैं. पिछले 10 सालों में राज्य में सुरक्षाबलों ने एक तरफ 656 नक्सलियों को मार गिराया, वहीं दूसरी तरफ नक्सली घटनाओं में 736 आम लोगों की जान गई. सुरक्षाबलों ने सबसे ज्यादा नक्सली 2016 में मारे थे. उस साल 135 नक्सली मारे गए थे. उसके बाद 2018 में 125 नक्सली मारे गए.
