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संगम के पानी को लेकर योगी सरकार को NGT ने लगाई फटकार, 1 हफ्ते में मांगा जवाब

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नई दिल्ली

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बुधवार को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को इस बात के लिए फटकार लगाई है कि उन्होंने प्रयागराज में गंगा नदी के पानी में फीकल कोलीफॉर्म और ऑक्सीजन लेवल जैसे पानी के क्वालिटी पैरामीटर्स के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी। ट्रिब्यूनल ने यीपीपीसीबी को गंगा यमुना में पानी की गुणवत्ता को लेकर एक हफ्ते में ताजा रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य सुधीर अग्रवाल और एक्सपर्ट सदस्य ए सेंथी वेल की बेंच दिसंबर के आदेश के अनुपालन पर मामले की सुनवाई कर रही थी। इसमें उसने उत्तर प्रदेश सरकार और सीपीसीबी को यह निश्चित करने का निर्देश दिया था कि कुंभ के दौरान गंगा और यमुना नदियों का पानी पीने और नहाने लायक हो।

सोमवार को दिसंबर के आदेश के अनुपालन में सीपीसीबी ने एक रिपोर्ट पेश की। इसमें दिखाया गया कि जनवरी के दूसरे हफ्ते में की गई निगरानी के दौरान फेकल कोलीफॉर्म और बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड का लेवल नहाने के मानदंडों को पूरा नहीं करता था। एनजीटी बेंच ने सोमवार को सीपीसीबी की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया और कहा कि यूपीपीसीबी ने 23 दिसंबर के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल नहीं की।

यूपीपीसीबी ने दाखिल की रिपोर्ट
बुधवार को यूपीपीसीबी ने कहा कि उसने रिपोर्ट दाखिल कर दी है, लेकिन उसने सीपीसीबी से उन सटीक जगहों के बारे में भी जानकारी मांगी है, जहां से उन्होंने पानी के सैंपल इकट्ठे किए थे। इस पर पीठ ने पूछा कि क्या वे सीपीसीबी की रिपोर्ट पर विवाद कर रहे हैं। हालांकि, पीठ ने सीपीसीबी के वकील से उन बिंदुओं की भी जानकारी मांगी जहां से पानी के नमूने इकट्ठे किए गए थे और साथ ही लैब टेस्ट की रिपोर्ट भी मांगी।

पीठ ने यह भी कहा कि पानी की क्वालिटी पर यूपीसीबी की अनुपालन रिपोर्ट में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड, केमिकल ऑक्सीजन और फेकल कोलीफॉर्म के बारे में जानकारी सामने नहीं आई है। उत्तर प्रदेश की एडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद ने कहा कि यूपीपीसीबी, सीपीसीबी की रिपोर्ट में किए गए खुलासे की जांच करेगा और पानी की क्वालिटी में सुधार के लिए सही कार्रवाई की जाएगी।

सीपीसीबी की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
कुंभ में गंगा में पानी की क्वालिटी पर सीपीसीबी की रिपोर्ट में कहा गया, ‘पानी में फेकल कोलीफॉर्म का लेवल काफी ज्यादा पाया गया है। असल में जांच टीम ने कई जगहों पर पानी की जांच की थी, उस जांच के दौरान ही यह बात सामने आई कि पानी में फोकल कोलीफॉर्म की मात्रा काफी ज्यादा रही। इतना ही नहीं इसकी वजह भी बताई गई और कहा गया कि इस समय क्योंकि संगम में करोड़ों लोग स्नान कर रहे हैं, उस वजह से फोकल कोलीफॉर्म की मात्रा बढ़ गई है।

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