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महाराष्ट्र की हार से टेंशन ना ले MVA, महायुति की जीत से जनता में नहीं उत्साह, शरद पवार ने कोल्हापुर में और क्या कहा?

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मुंबई,

एनसीपी (सपा) प्रमुख शरद पवार ने शनिवार को दावा किया कि 20 नवंबर को हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन की भारी जीत के बाद महाराष्ट्र के लोगों में कोई उत्साह या खुशी नहीं दिखी. पश्चिमी महाराष्ट्र के कोल्हापुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए पवार ने कहा कि विपक्ष को चिंता करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसे इस झटके के बाद लोगों के पास वापस जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि विपक्ष का महा विकास अघाड़ी गठबंधन यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगा कि सरकार अपने सभी चुनाव पूर्व वादों को पूरा करे, जिसमें लड़की बहन योजना के तहत महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये करना शामिल है. वरिष्ठ राजनेता ने कहा, “महायुति के भारी जनादेश के बाद लोगों में कोई उत्साह नहीं दिख रहा है.” उनकी पार्टी 288 सदस्यीय विधानसभा में केवल 10 सीटें ही जीत सकी.

सपा का विपक्षी एकता को लेकर रुख अडिग
समाजवादी पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख अबू आजमी ने एमवीए के घटक दल शिवसेना (यूबीटी) ने एक अखबार में विज्ञापन देकर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाने की प्रशंसा करने के मुद्दे पर गठबंधन से अलग होने की घोषणा की है। इस बारे में पूछे जाने पर शरद पवार ने पूरे मुद्दे को ज्यादा तवज्जो नहीं देने का प्रयास किया। एनसीपी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख ने कहा कि अखिलेश यादव नीत समाजवादी पार्टी (सपा) का विपक्षी एकता को लेकर अडिग रुख है।

नेता प्रतिपक्ष पर क्या राय?
महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किये जाने से जुड़े सवाल पर शरद पवार ने कहा कि एमवीए के घटक दल इस बात पर जोर नहीं दे सकते कि उन्हें यह पद मिले, क्योंकि उनके पास आवश्यक संख्याबल नहीं है। महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद हासिल करने के लिए किसी भी दल के पास कम से कम 29 विधायक होने चाहिए। शरद पवार नीत एनसीपी(एसपी), कांग्रेस या शिवसेना (यूबीटी) सहित किसी भी विपक्षी दल के पास यह संख्या नहीं है।

राज्यसभा में 500 रुपये के नोटों की गड्डी पर क्या बोले पवार
शरद पवार ने हालांकि इशारा किया कि 1980 के दशक में जब दलबदल के कारण उनकी खुद की पार्टी के विधायकों की संख्या घटकर मात्र छह रह गई थी। तब भी वह एक साल के लिए विपक्ष के नेता बने। उनके बाद मृणाल गोरे और निहाल अहमद को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। क्योंकि विपक्ष ने इस पद को बारी-बारी से साझा करने का फैसला किया था। राज्यसभा में 500 रुपये के नोटों की गड्डी मिलने से उपजे विवाद के बारे में पूछे गए एक सवाल पर पवार ने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि यह गड्डी एक सांसद (कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी) की सीट तक कैसे पहुंची, जो एक प्रसिद्ध वकील हैं। पवार खुद संसद के उच्च सदन के सदस्य हैं।

 

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