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‘कोई भी आफताब जैसा हैवान किसी श्रद्धा के साथ…’ UCC को लेकर CM धामी की दो टूक

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नई दिल्ली

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। धामी ने कहा है कि उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता में लिव-इन रिलेशनशिप को रजिस्टर करने का प्रावधान किया है और सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है कि श्रद्धा वालकर-आफताब जैसी घटना दोबारा न हो सके।

पुष्कर सिंह धामी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘शुरुआत में लड़के-लड़कियां जब साथ में रहते हैं तो उनके संबंध अच्छे होते हैं लेकिन कुछ वक्त बाद संबंध खराब हो जाते हैं, हिंसा होती है, पुलिस केस हो जाते हैं और कई बार ऐसे मामले अदालतों में भी जाते हैं। इसमें महिला और पुरुष दोनों पक्षों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार ऐसे संबंधों में रहने वाले लड़के-लड़कियों की हत्या तक हो जाती है और ऐसे में पीड़ित पक्ष के माता-पिता के पास जीवन भर रोने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचता। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 2022 में हुई ऐसी ही घटना में श्रद्धा वालकर नाम की लड़की को आफताब नाम के शख्स ने टुकड़े-टुकड़े कर 300 लीटर के फ्रिज में रख दिया था और वह एक टुकड़ा करके जंगल में फेंका करता था।

धामी ने कहा कि आफ़ताब श्रद्धा वालकर के सोशल मीडिया अकाउंट्स से लगातार उसके माता-पिता से बातचीत करता था। ऐसे में श्रद्धा के माता-पिता को पता ही नहीं लगा कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है।

माता-पिता और प्रशासन को हो जानकारी
धामी ने कहा कि इसीलिए राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों को लेकर इस बात का प्रावधान किया कि उन्हें रजिस्ट्रेशन कराना होगा। जिससे उनके माता-पिता को जानकारी हो, प्रशासन की जानकारी हो और कोई भी आफताब जैसा हैवान किसी भी श्रद्धा वालकर जैसी बिटिया के साथ इस प्रकार का अपराध और कुकृत्य ना कर सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनकी सरकार समान नागरिक संहिता का कानून बना रही थी तो कांग्रेस समेत राज्य में सभी राजनीतिक दलों को हमने आमंत्रित किया था कि वे आएं और अपने विचार-सुझाव दें।

महिला सशक्तिकरण के लिए बनाया कानून
धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता का कानून महिला सशक्तिकरण के लिए बनाया गया है और इस पर उत्तराखंड की जनता ने मुहर लगाई है। धामी ने कहा कि यह कानून बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर के संविधान के अनुरूप लाया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस डॉक्टर अंबेडकर के संविधान को नहीं मानती है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता का प्रावधान किया गया है।

बताना होगा कि उत्तराखंड की धामी सरकार ने पिछले महीने ही समान नागरिक संहिता को लागू किया था। उस वक्त मुख्यमंत्री धामी ने कहा था कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या वर्ग के खिलाफ नहीं है बल्कि इसका मकसद सभी को समान अधिकार प्रदान करना है। उन्होंने कहा था कि उत्तराखंड में इस संहिता के लागू होने से सभी नागरिकों को एक समान कानून के तहत न्याय और अधिकार मिलेंगे।

 

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