पेरिस
भारत में किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) समेत अन्य मांगों के लिए एक बार फिर प्रदर्शन कर रहे हैं। 13 फरवरी से दिल्ली मार्च का ऐलान किया गया था। सरकार से बातचीत के कारण किसान पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर बने हुए थे। लेकिल सिर्फ भारत ही नहीं है, जहां किसानों का प्रदर्शन चल रहा है। यूरोप के कई देशों में भी किसानों का बड़ा प्रदर्शन देखा जा रहा है। पिछले कई सप्ताह में यूरोप के अलग-अलग देशों में प्रदर्शन देखा गया। फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैंड, पोलैंड, स्पेन, इटली और ग्रीस में प्रदर्शन देखा गया है। किसानों के प्रदर्शन के कुछ मुद्दे किसी देश और कुछ पूरे यूरोप से जुड़े हैं।
पूर्वी यूरोप में प्रदर्शनों के कारणों में आयात भी है। किसानों का कहना है कि यूरोपी संघ ने रूस के आक्रमण के बाद कई तरह के टैक्स समेत सीमा शुल्क को माफ कर दिया है, जिससे उनका अनाज सस्ता हो गया। यह अनुचित प्रतिस्पर्धा है। पोलैंड के किसान यूक्रेन के साथ सीमा पर यातायात को रोक रहे हैं। इसे लेकर यूक्रेन का कहना है कि उनकी रक्षा क्षमता प्रभावित हो रही है और रूस के उद्देश्यों को मदद मिल रही है। वहीं चेक रिपब्लिक के किसान प्राग शहर में अपने ट्रैक्टर सड़कों पर ले आए, जिससे मंत्रालय के बाहर यातायात बाधित हो गया। किसानों का कहना है कि इस तरह का आयात यूरोपीय कीमतों पर दबाव बढ़ाता है।
ग्रीन डील प्लान का हो रहा विरोध
पोलिश किसानों ने यूक्रेनी खाद्य पदार्थों के आयात और यूरोपीय संघ की पर्यावरण नीतियों के खिलाफ अपने विरोध प्रदर्शन को तेज कर दिया है। उन्होंने यूक्रेन के साथ सीमा पार करने वाले रास्तों को अवरुद्ध कर दिया, यूक्रेनी अनाज को फेंक दिया और अपने प्रदर्शन में टायर जलाए। किसान यूरोपीय संघ की ग्रीन डील प्लान को लेकर चिंतित हैं, जिसका उद्देश्य कैमिकल के इस्तेमाल और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित करना है। किसानों का कहना है कि इससे उत्पादन और आय में कमी आएगी।
किसानों की है ये मांग
विरोध प्रदर्शन कई शहरों में हुआ, जिनमें पोलैंड के ग्दान्स्क और क्राको शामिल हैं, जहाँ किसानों ने अपने ट्रैक्टर चलाए और अपने हॉर्न बजाए। उन्होंने अपनी मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रखने की कसम खाई है। सीमा पार करने वाले रास्तों को अवरुद्ध करने के अलावा, उन्होंने राजमार्गों को भी बाधित किया। उनकी मुख्य मांगें प्रधान मंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार से पोलैंड को ग्रीन डील से वापस लेने और यूक्रेन से कृषि वस्तुओं के आयात को रोकने की हैं। इन प्रदर्शनों ने सरकार के सामने मुश्किल खड़ी कर दी है, क्योंकि यह रूस को समर्थन देते रहे हैं।
प्रदर्शन के ये भी हैं कारण
यूरोपीय संघ में जर्मनी और फ्रांस सबसे बड़े कृषि उत्पादक हैं। फ्रांस में किसानों ने कृषि डीजल पर सब्सिडी या टैक्स को खत्म करने की योजना का विरोध किया। ग्रीस के किसान चाहते हैं कि डीजल पर टैक्स कम हो। रोमानिया में जनवरी के मध्य में विरोध प्रदर्शन हुआ, जो मुख्य तौर पर डीजल की उच्च कीमतों के खिलाफ था। जर्मन किसान भी डीजल में टैक्स छूट न मिलने का विरोध कर रहे हैं।
