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जाति जनगणना पर विपक्ष एकजुट और एनडीए में फूट, क्या फंसने वाली है मोदी सरकार?

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नई दिल्ली

मोदी सरकार पर राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना करवाने का दबाव बढ़ रहा है। विपक्ष बार-बार यह मांग उठा ही रहा है, सरकार के सहयोगी दलों में भी फूट पड़ती दिख रही है। बिहार के क्षेत्रीय दल लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (लोजपा- आर) के प्रमुख चिराग पासवान सार्वजनिक तौर पर देशव्यापी जातीय जनगणना की मांग का समर्थन कर चुके हैं, अब बिहार के ही सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने भी यही रुख दिखाया है। सूत्रों की मानें तो अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) कल्याण पर संसदीय समिति की हुई पहली बैठक में विपक्ष ने एक सुर में जाति जनगणना की बात उठाई तो जेडीयू ने भी हां में हां मिलाता दिखा। सूत्रों के मुताबिक, जेडूयी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों को बुलाकर उन्हें ओबीसी के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने की विपक्षी सदस्यों की मांग का समर्थन किया।

देश के रजिस्ट्रार जेनरल और सेंसस कमिश्नर जनसंख्या करवाने वाले संगठन के प्रमुख होते हैं और यह संगठन केंद्रीय गृह मंत्री के अधीन काम करता है। इस कारण ओबीसी कल्याण पर संसदीय समिति की बैठक में गृह मंत्रालय के अधिकारियों की उपस्थिति भी अनिवार्य होती है। 18वीं लोकसभा में ओबीसी कल्याण पर संसदीय समिति का गठन इसी महीने की गई। बीजेपी सांसद गणेश सिंह इसके अध्यक्ष हैं। समिति की पहली बैठक में लोकसभा में डीएमके संसदीय दल के नेता टीआर बालू ने जाति जनगणना का मुद्दा उठाया।

कांग्रेस के मणिकम टैगौर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कल्याण बनर्जी ने उनका झट से समर्थन कर दिया। पीछे से जेडीयू सांसद गिरधारी यादव ने भी हां में हां मिला दी। समिति के बाकी सदस्य इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रहे। समिति में ज्यादातर सदस्य बीजेपी से हैं। उन्होंने भी चुप रहना ही ठीक समझा और मांग का विरोध नहीं किया। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने तो गृह मंत्रालय के अधिकारियों से यहां तक कहा कि उन्हें जाति जनगणना की बैठक का पहला विषय होना चाहिए था। सूत्रों ने कहा कि समिति ओबीसी से संबंधित कई विषयों पर बातचीत के लिए गृह समेत कई अन्य मंत्रालयों के अधिकारियों को बुला सकती है।

जेडीयू सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा है। वह राष्ट्रव्यापी जातीय जनगणना का मुखर समर्थक रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में जाति जनगणना करवाया और रिपोर्ट को पिछले वर्ष सार्वजनिक भी किया। सूत्रों ने कहा कि समिति में इस बात पर चर्चा हुई कि आईएएस-आईपीएस समेत केंद्र सरकार के विभिन्न पदों पर ओबीसी आरक्षण को कैसे लागू किया जाता है। केंद्र सरकार का कार्मिक मंत्रालय सिविल सर्विसेज के मामलों को डील करता है। समिति की अगली बैठक में ओबीसी से जुड़े मुद्दों पर बात करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और कार्मिक मंत्रालय के अधिकारियों को बुलाने पर विचार हुआ है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार जातीय जनगणना की मांग को हवा दे रहे हैं। इसे विपक्ष दलों के गठबंधन I.N.D.I.A का जोरदार समर्थन प्राप्त है। बीजेपी के अंदर एक बड़े वर्ग में यह गहरी भावना है कि विपक्ष ने लोकसभा चुनावों में जो आरक्षण और संविधान को लेकर दुष्प्रचार किया, उससे बीजेपी अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सकी। साफ है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर विपक्ष के साथ-साथ अपने साथियों की तरफ से भी दबाव बढ़ रहा है। लोजपा(आर), जेडीयू और आरएलडी के समर्थन से सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।

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