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Thursday, May 7, 2026
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एलियन के निशाने पर हमारी गैलेक्सी, स्पेस में तैयार किया विशाल पावर प्लांट, हमारे 7 तारों से चुरा रहे ऊर्जा

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लंदन

हमारी पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य है। अगर हम सूर्य से आने वाली पूरी ऊर्जा का उपयोग कर सकें तो हमारी वर्तमान ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी अन्य चीज की जरूरत नहीं पड़ेगी। सूर्य की तरह ही हमारी आकाशगंगा में लाखों तारे हैं जो लगातार ऊर्जा का उत्सर्जन कर रहे हैं। हालांकि, इस ऊर्जा के दोहन लिए उन्नत तकनीक और संसाधन की जरूरत पड़ेगी जिसके विकास में मनुष्य लगा हुआ है। लेकिन क्या हो अगर हमारी आकाशगंगा से दूर बैठी एलियन सभ्यताएं इतनी विकसित हो गई हों कि वे हमारे तारों से ऊर्जा खींचकर इस्तेमाल कर रहीं हों। वैज्ञानिकों ने ऐसे संकेतों के मिलने का दावा किया है जो बताता है कि एलियन हमारी आकाशगंगा से पावर चुरा रहे हैं।

वैत्रानिकों ने मिल्की वे आकाशगंगा में लंबे समय से बने एलियन पावर प्लांट के खोज निकालने का दावा किया है, जो हमारी आकाशगंगा से ऊर्जा खींचकर ले जा रहे हैं। न्यूरल नेटवर्क एल्गोरिदम की सहायता से आकाश गंगा के लाखों तारों का संर्वेक्षण किया गया, जिसमें उन्हें 60 तारे ऐसे मिले हैं जो किसी बड़े एलियन पावर प्लांट से घिरे हुए दिखाई दे रहे हैं। खगोलविदों का कहना है कि ये इस बात का सबूत हो सकता है कि एलियन एक अत्याधुनिक पावर प्लांट का इस्तेमाल कर हमारे तारों से ऊर्जा चुराकर ले जा रहे हैं।

सात तारों से हो रही चोरी
खगोलविदों ने ऐसे सात तारों को पहचान की है, जिनमें रहस्यमयी ऊर्जा वृद्धि का पता चला है। ये सात तारे आकार में हमारे सूर्य के 60 प्रतिशत से 8 प्रतिशत के बीच हैं। इनसे बाहर जाने वाले तापमान में वृद्धि ये संकेत देती है कि संभवतः इनकी ऊर्जा का दोहन किया जा रहा है। रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की मासिक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ये दावा किया है।

50 लाख तारों का किया गया सर्वेक्षण
डेली मेल की रिपोर्ट में अध्ययन के हवाले से कहा गया है कि लगभग 50 लाख तारों से आने वाले डेटा को मिलाकर, संभावित डायसन क्षेत्रों की एक सूची बनाई। इस दौरान उन्हें आंशिक रूप से एक विशाल एलियन संरचना नजर आई जो अत्यधिक इंफ्रारेड विकिरण को उत्सर्जित कर सकते हैं।

लेख में कहा गया है, यह (एलियन) संरचना मध्य इंफ्रारेड विकिरण के रूप में अपशिष्ट ऊष्मा उत्सर्जित करेगी जो संरचना के पूर्ण होने के स्तर के अतिरिक्त, इसके प्रभावी तापमान पर निर्भर करेगी। हालांकि, वैज्ञानिकों ने आशंका भी जाहिर की है कि ऐसी ऊर्जा ब्रह्मांड में प्राकृतिक वस्तुओं जैसे धूल के छल्ले और नेबुला द्वारा भी उत्सर्जित की जा सकती है।

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