नई दिल्ली,
पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल जरदारी भुट्टो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सियासी हमले करने में जुटे हैं. गुरुवार को यूएनएससी में बिलावल ने सारी हदें पार कर दीं. भारत के विदेश मंत्री की ओर से 9/11 के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पनाह देने वाली टिप्पणी पर पाकिस्तान के मंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी हमला बोलते हुए कहा, ‘मैं भारत को बताना चाहता हूं कि ओसामा बिन लादेन तो मर चुका है, लेकिन ‘गुजरात का कसाई’ अभी जिंदा है और भारत का प्रधानमंत्री है.’
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मीटिंग में भुट्टो ने एस जयशंकर पर हमला बोलते हुए कहा, “मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले अमेरिका ने उनकी एंट्री पर बैन लगा दिया था. पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर पर आरोप लगाते हुए भुट्टो ने कहा कि दोनों भारत के नहीं, RSS के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री हैं. अपने बेतुके बयान को और आगे बढ़ाते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि ये सभी हिटलर को अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं.
एस जयशंकर ने लगाई थी क्लास
पाकिस्तान के मंत्री का ये अभद्र बयान भारत के विदेश मंत्री की ओर से पाकिस्तान को लगाई गई फटकार के जवाब में आया है. बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बोलते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन में कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए पाकिस्तान को फटकार लगाई थी. पाकिस्तान को नसीहत देते हुए जयशंकर ने कहा था कि जिस देश ने अल-कायदा नेता ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादी को पनाह दी हो और अपने पड़ोसी देश की संसद पर हमला किया हो, उसे उपदेश नहीं देना चाहिए.
जयशंकर ने मीटिंग में बोलते हुए कहा था कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता वर्तमान समय की प्रमुख चुनौतियों पर की गई प्रभावी प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है. वह चुनौती महामारी, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद या कोई संघर्ष (conflicts) हो सकती है और ऐसे खतरों को आम चुनौतियों की तरह नहीं स्वीकार किया जाना चाहिए.पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए जयशंकर ने कहा था कि जो दुनिया के लिए अस्वीकार है, उसे सही ठहराने का सवाल ही नहीं उठना चाहिए.
भुट्टो ने उठाया था कश्मीर मुद्दा
पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि यूएनएससी मुख्य रूप से वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है. यूएनएससी में भारत को शामिल करने की मांग पर भु्ट्टो ने कहा था कि इसमें नए सदस्यों को जोड़ने से सुरक्षा परिषद में यूएन के अधिकतर सदस्य देशों के उपस्थित होने के अवसर कम मिलेंगे. इसलिए हमें सभी सदस्य देशों की संप्रभुता को ध्यान में रखना चाहिए.
‘मुंबई का 26/11’ दोबारा नहीं होने दे सकते
पाकिस्तानी पत्रकार ने जब संयुक्त राष्ट्र में भारतीय विदेश मंत्री से सवाल किया तो उन्होंने ऐसा जवाब दिया कि उसकी बोलती ही बंद हो गई। जयशंकर ने कहा, ‘आप गलत मंत्री से सवाल कर रहे हैं। यह पाकिस्तान के मंत्री हैं जो यह बताएंगे कि पाकिस्तान कितने लंबे समय तक आतंकवाद को फैलाने का इरादा रखता है। दुनिया मूर्ख नहीं है और जो देश आतंकवाद में संलिप्त हैं, ऐसे देशों को दुनिया को इसे बंद करने के लिए कहना चाहिए। मेरी सलाह है कि आप अपने काम को साफ करिए। कृपया एक अच्छे पड़ोसी बनने का प्रयास करिए। आशा करता हूं कि आपके चैनल के जरिए मेरा यह संदेश पहुंच जाएगा।’
जयशंकर ने गुरुवार को चीन और पाकिस्तान की ओर से अपनाए जा रहे आतंकवाद को लेकर दोहरे मापदंड पर भी निशाना साधा। भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को सामूहिक रूप से उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो इससे राजनीतिक रूप से फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा परिषद की आतंकवाद रोधी ब्रीफिंग में उन्होंने कहा, हम ‘न्यूयॉर्क का 9/11 या मुंबई का 26/11′ दोबारा नहीं होने दे सकते। जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला दिया- हम मानते हैं कि एक भी हमला बहुत अधिक है और यहां तक कि एक जीवन को खोना भी बहुत अधिक है। इसलिए जब तक आतंकवाद का सफाया नहीं हो जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने चीन, पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा, चुनौती यह है कि हम इस परिषद के अंदर और बाहर दोहरे मानकों से कैसे निपटें।’
नर्स अंजलि विजय कुलथे ने बताई मुंबई हमले की भयावहता
उन्होंने कहा, ‘अप्रिय वास्तविकताओं को कम करने के लिए जो भी चमक-दमक लागू की जा सकती है, आतंकवाद का समकालीन उपरिकेंद्र अभी भी बहुत जीवंत और सक्रिय है, और हम यह नहीं भूल सकते कि पुरानी आदतें और स्थापित नेटवर्क अभी भी जीवित हैं, विशेष रूप से दक्षिण एशिया में।’ पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों के खिलाफ प्रतिबंधों को चीन द्वारा अवरुद्ध करने के संदर्भ में, उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने में दोहरे मानदंड हैं। जयशंकर ने कहा कि आतंकवादियों को मंजूरी देने और उन पर मुकदमा चलाने के लिए समान मानदंड लागू नहीं होते हैं। कभी-कभी ऐसा लगता है कि आतंकवाद का स्वामित्व उसके अपराध या उसके परिणामों से अधिक महत्वपूर्ण है। बहुत लंबे समय से, कुछ लोग इस द्दष्टिकोण के साथ बने रहे हैं कि आतंकवाद केवल एक अन्य साधन या युक्ति है। आतंकवाद में निवेश करने वालों ने इस तरह के निंदक को जारी रखने के लिए इस्तेमाल किया है।
विदेश मंत्री जयशंकर के बोलने से पहले, मुंबई में कामा और अल्बलेस अस्पताल की नर्स अंजलि विजय कुलथे ने परिषद को 26/11 को आतंकवादियों के साथ आमने-सामने की मुठभेड़ के बारे में बताया। अंजलि ने बताया कि कैसे उसने चिकित्सा केंद्र में माताओं, होने वाली नवजात शिशुओं को बचाने के लिए काम किया। जयशंकर ने परिषद से अपने आतंकवाद विरोधी एजेंडे को फिर से मजबूत करने के लिए कहा। और यह अतिदेय है क्योंकि आतंकवाद का खतरा वास्तव में और भी गंभीर हो गया है। उन्होंने आतंकवादियों द्वारा अपनाई जा रही नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के खिलाफ सतर्कता बरतने का आह्वान किया।
