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पाकिस्तान के पास भी ताकत… एक्सपर्ट्स क्यों दे रहे जल्दबाजी में बदला न लेने की सलाह?

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नई दिल्ली

पहलगाम के पास बैसरन में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश में गुस्से की लहर पैदा कर दी है। इस हमले में UAE और नेपाल के पर्यटकों सहित 26 लोग मारे गए। हर तरफ से तुरंत कार्रवाई की मांग उठ रही है। ऐसे में रणनीतिक एक्सपर्ट्स ने सरकार को भावनाओं में बहकर जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के खिलाफ चेतावनी दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बदला लेने की जल्दबाजी में कोई भी गलत कदम देश के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सरकार को सोच समझकर फैसला लेना चाहिए।

बदले की मांग, लेकिन सावधानी जरूरी
बैसरन में हुए आतंकी हमले के बाद रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एच.एस. पनाग ने बदले की मांगों पर चिंता जताई है। उन्होंने द प्रिंट में छपे एक लेख में लिखा, ‘नए राष्ट्रवाद से भरा देश खून की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार को लोगों के गुस्से में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।’

भारत को रहना चाहिए तैयार
पनाग ने बताया कि पाकिस्तान एक परमाणु हथियारों वाला देश है और उसके पास भारत के सीमित सैन्य हमलों का जवाब देने की ताकत है। भारत के पास मिसाइल, ड्रोन या नौसेना की ताकत के मामले में ऐसी कोई खास तकनीक नहीं है जिससे वह पाकिस्तान पर आसानी से हमला कर सके। पाकिस्तान भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है और भारत को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।

जल्दबाजी में बदला न लें
पनाग ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को बदला लेने के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जवाबी कार्रवाई की उम्मीद है। उन्होंने कुछ सैन्य विकल्पों के बारे में बताया, जैसे कि फायरिंग करना, स्पेशल फोर्स से हमला करवाना और LoC पार करके दुश्मन की पोस्ट पर कब्जा करना। उन्होंने कहा कि ये कार्रवाईयां नियंत्रण में रहेंगी, लेकिन इनसे पाकिस्तान जवाबी हमला कर सकता है।

पनाग ने यह भी कहा कि हमें पाकिस्तान में गहराई तक हमला नहीं करना चाहिए। जैसे कि लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके स्थित बेस या जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित ठिकाने पर हमला नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां रणनीतिक क्षेत्र में आती हैं और एक सीमित युद्ध को शुरू कर सकती हैं।

क्या कर सकता है भारत?
पनाग का कहना है कि भारत जम्मू-कश्मीर तक सीमित एक छोटा, तेज सैन्य अभियान चला सकता है, जो परमाणु हथियारों की सीमा को पार न करे। यह अभियान बर्फ पिघलने के बाद शुरू करना बेहतर होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत नियंत्रण रेखा को 10-15 किमी पीछे धकेल सकता है, जिससे पाकिस्तान पर दबाव पड़ेगा। इससे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी खतरे में आ सकता है, और पाकिस्तान शांति की बात करने को मजबूर हो सकता है।

पनाग ने नीति निर्माताओं को चेतावनी दी कि जनता के गुस्से या राजनीतिक फायदे के लिए जल्दबाजी में युद्ध शुरू नहीं करना चाहिए। भारत को सोची-समझी रणनीति के साथ बार-बार और निर्णायक हमले करने चाहिए।

पाकिस्तान के खिलाफ लिए कड़े फैसले
बता दें कि पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) ने कई फैसले लिए। इसमें सिंधु जल संधि को रोकना, SAARC पाकिस्तानी वीजा रद्द करना, अटारी चेकपोस्ट बंद करना और पाकिस्तानी उच्चायोग से रक्षा कर्मचारियों को निष्कासित करना शामिल हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, ‘CCS ने फैसला किया कि इस हमले के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा और उनके प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।’

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