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श्रीलंका की तरह डिफॉल्‍ट होने की कगार पर पाकिस्‍तान, विदेशियों को बेच रहा संपत्तियां, भड़के इमरान

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इस्‍लामाबाद

पाकिस्‍तान में शहबाज शरीफ सरकार के आने के बाद भी हालात संभल नहीं रहे हैं और अब देश श्रीलंका की तरह से डिफॉल्‍ट होने की कगार पर पहुंच गया है। आलम यह है कि पाकिस्‍तानी रुपये ने पिछले दो दशक में सबसे खराब प्रदर्शन किया है। इससे निवेशकों के होश उड़े हुए हैं और उन्‍हें अगला श्रीलंका बनने का डर सताने लगा है। इस बीच शहबाज सरकार ने पाकिस्‍तान को डिफॉल्‍ट होने से बचाने के लिए सरकारी संपत्तियों को व‍िदेश‍ियों बेचने का ऐलान किया है। उधर, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश की खराब हालत पर जोरदार निशाना साधा है।

फाइनेंशियल टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक डॉलर के मुकाबले पाकिस्‍तानी रुपया 7.6 प्रतिशत गिरकर अब 228 रुपये तक पहुंच गया है। यह अक्‍टूबर 1998 के बाद के पाकिस्‍तानी रुपये में सबसे बड़ी साप्‍ताहिक गिरावट आई है। इससे अब पाकिस्‍तान के अगला श्रीलंका बनने का खतरा बहुत ज्‍यादा बढ़ गया है। यही नहीं अगर पाकिस्‍तान को आईएमएफ से 1.2 अरब डॉलर मिल भी जाते हैं तो भी यह उसके भुगतान संतुलन संकट को दूर करने के लिए पर्याप्‍त नहीं होगा।

संपत्तियों को विदेशी देशों को बेचने जा रही शहबाज सरकार
इससे पहले श्रीलंका में आर्थिक पतन और डिफॉल्‍ट होने के बाद देश में राजनीतिक संकट बहुत गहरा गया था और राष्‍ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को देश छोड़कर जाना पड़ा था। अब पाकिस्‍तान को लेकर भी यही खतरा मंडराने लगा है। इस बीच पंजाब प्रांत में सत्‍ता बचाने में जुटी शहबाज सरकार ने डिफॉल्‍ट से बचने के लिए देश की संपत्तियों को आपातकालीन बिक्री के तहत विदेशी देशों को बेचने जा रही है। पाकिस्‍तानी कैबिनेट ने सभी प्रक्रिया को बायपास करते हुए एक अध्‍यादेश को अनुमति दे दी।

पाकिस्‍तानी अर्थव्‍यवस्‍था को बचाने की हड़बड़ी इतनी ज्‍यादा थी कि 6 प्रासंगिक कानूनों को भी बायपास कर दिया गया। यही नहीं शहबाज सरकार ने प्रांतों की सरकारों को बाध्‍यकारी तरीके से जमीनों के अधिग्रहण करने के आदेश जारी करने की शक्ति अपने पास ले ली। हालांकि अभी तक राष्‍ट्रपति आरिफ अल्‍वी ने इस अध्‍यादेश पर हस्‍ताक्षर नहीं किया है। शहबाज सरकार ने अदालतों को संपत्तियों को बेचने के खिलाफ दायर किसी भी याचिका पर सुनवाई से रोक दिया है।

यूएई ने कर्ज नहीं लौटाने पर पाकिस्‍तान को नकदी देने से मना किया
शहबाज सरकार ने इसकी शुरुआत भी कर दी है। गुरुवार को सरकार ने सरकारी तेल और गैस कंपनी और पावर प्‍लांट में अपनी हिस्‍सेदारी को संयुक्‍त अरब अमीरात को बेचने के अध्‍यादेश पर हस्‍ताक्षर कर दिया। उसे उम्‍मीद है कि इस डील से 2 से 2.5 अरब डॉलर हासिल किया जा सकता है। इससे पहले यूएई ने कर्ज नहीं लौटाने पर पाकिस्‍तान को नकदी देने से मना कर दिया था। उसने कहा था कि पाकिस्‍तान अपनी कंपनियों को खोल दे ताकि उसमें निवेश किया जा सके। इस बीच इमरान खान ने सरकार के इस फैसले पर जोरदार हमला बोला है। उन्‍होंने कहा कि हम श्रीलंका जैसे हालात से बहुत दूर नहीं हैं जब जनता सड़क पर उतरेगी।

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