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Tuesday, May 5, 2026
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‘चुनाव जीतते ही मालिक बन जाते हैं पशुपति’, भरी सभा में चाचा की फजीहत और बड़े खेल की तैयारी में चिराग

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पटना

जमुई सांसद चिराग पासवान अपने दिवंगत पिता रामविलास पासवान की सीट हाजीपुर से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। उनके नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के खिलाफ बढ़ते विरोध को भांप लिया है। चिराग के चाचा पशुपति पारस फिलहाल इसी सीट से सांसद हैं। चिराग की पार्टी ने इसी वजह से रामविलास पासवान की ‘कर्मभूमि’ रही हाजीपुर में राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। दिवंगत रामविलास पासवान के छोटे भाई पशुपति पारस को रामविलास पासवान ने ही ये सीट बतौर उपहार दी थी। पारस हाजीपुर से जीते भी। लेकिन सोमवार को पशुपति पारस की उन्हीं के क्षेत्र में फजीहत हो गई।

हाजीपुर में पशुपति पारस की फजीहत
हाजीपुर में केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस को बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। दरअसल यहां के स्थानीय ग्रामीणों ने उन पर आम लोगों के मुद्दों की अनदेखी करने और मालिक की तरह व्यवहार करने के लिए सार्वजनिक रूप से उनकी आलोचना की। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। हुआ कुछ यूं कि पशुपति पारस मंत्री एक रेलवे समारोह में भाग लेने आए थे। वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने उन पर उनके मुद्दों में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाने का आरोप लगाया। इस अवसर पर बोलते हुए, पारस ने कहा कि वह हाजीपुर के लोगों के दिल में जगह बनाने और एक नौकर की तरह उनकी सेवा करने आए हैं। अभी मंत्री ने अपनी बात पूरी की ही थी कि एक बुजुर्ग खड़े हो गए और गजब की बात कह डाली। बुजुर्ग ने कहा कि ‘आप जनता की देख-रेख क्या करेंगे? चुनाव के समय सेवक बनते हैं और चुनाव खत्म होता है तो मलिक।’ काफी देर तक दोनों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई। इसी घटना से ऐसा लग गया कि उनके गृह निर्वाचन क्षेत्र में सब ठीक नहीं है।

जानिए चिराग की पार्टी के इरादे
लोजपा (आरवी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेश भट्ट ने कहा, ‘इससे पता चलता है कि मंत्री ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं किया है और आम जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरने में विफल रहे हैं ।’ हालांकि यह अभी तक तय नहीं किया गया है, जानकार सूत्रों ने कहा कि चिराग हाजीपुर सीट पर अपना दावा छोड़ने के मूड में नहीं हैं, जिसे दिवंगत रामविलास पासवान ने काफी मेहनत से साथ अपना बना लिया था। प्रवक्ता राजेश भट्ट के मुताबिक ‘हालांकि अभी तक कुछ भी तय नहीं किया गया है, यह एक तथ्य है कि हाजीपुर हमारी पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष की कर्मभूमि रहा है, जिन्होंने इसकी तुलना अपनी मां से की थी। इसलिए, अगर कोई मां की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करता है, तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’

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