नई दिल्ली:
हिंसा प्रभावित राज्य मणिपुर के लोग दुखी हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी तक वहां का दौरा नहीं किया है। यह कहना है मणिपुर की पूर्व राज्यपाल अनुसुईया उइके का। हिन्दुस्तान टाइम्स से खास बातचीत में उइके ने कहा, ‘मणिपुर में उस वक्त जिस तरह के हालात थे, उसे देखते हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने कोई फैसला लिया होगा। मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है। मणिपुर के लोग पीएम मोदी को पसंद करते हैं। लोग वहां हुए विकास कार्यों की वजह से उनका सम्मान करते हैं। वे थोड़े दुखी हैं, कहते हैं कि प्रधानमंत्री को मणिपुर का दौरा करना चाहिए।’ दरअसल पिछले साल 3 मई से मेइती और कुकी समुदाय के बीच हुई झड़पों में 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या पीएम मोदी ने मणिपुर के लोगों को निराश किया है, अनुसुईया उइके ने कहा कि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मुझे ऐसा नहीं लगता, मुझे लगता है कि पीएम मोदी उस समय फ्रांस गए थे। भारत लौटने के बाद उन्होंने कैबिनेट की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा की। केंद्र सरकार मणिपुर के हालात पर लगातार नजर रखे हुए थी। गृह मंत्री स्थिति पर नियंत्रण रखे हुए थे, जो बार-बार बदल रही थी। स्थिति धीरे-धीरे शांत हो रही थी। प्रधानमंत्री ने भी मणिपुर में हो रही घटनाओं पर चिंता व्यक्त की थी।’ पूर्व राज्यपाल ने आगे कहा, ‘मणिपुर में स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है। मैं राहत शिविरों में दोनों समुदायों के बहुत से लोगों से मिली।’
केंद्र मणिपुर सरकार को पीछे से चला रही है?
इस सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा, ‘केंद्र और राज्य के बीच समन्वय है। मैंने भी सीएम, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। हमने भविष्य की घटनाओं, राहत शिविरों में रह रहे लोगों के सामने आने वाली कठिनाइयों पर मुद्दों पर चर्चा की। हमने घर भी विकसित किए और हिंसा से प्रभावित लोगों को आवास प्रदान किए। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पीड़ित लोगों को 10 लाख रुपये, 7 लाख रुपये और 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की।’
‘सीएम ने कुछ फैसले नहीं लिए जिससे…’
इस सवाल पर कि क्या केंद्र मणिपुर के मामलों में दखल दे रहा है, पूर्व राज्यपाल ने कहा, ‘दो समुदायों के बीच संघर्ष का मामला है। यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। सभी राजनीतिक दलों के नेता मुझसे मिले, मैंने उनसे कहा कि हिंसा राजनीतिक नहीं है, मैंने उनसे शांति सुनिश्चित करने के लिए समुदाय के सदस्यों को मनाने का आग्रह किया।’ मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को हटाने की मांग पर उइके ने कहा कि सीएम ने कुछ फैसले नहीं लिए जिससे हिंसा प्रभावित राज्य में बदलाव आ सकता था।
