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महाराष्ट्र में फिर खेला! बदल जाएंगे मुख्यमंत्री? अजित के CM बनने की अटकलें फिर शुरू

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मुंबई

महाराष्ट्र की सियासत को लेकर एक बार फिर से नई चर्चा शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि अगले सप्ताह महाराष्ट्र सरकार में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। सूत्रों की माने तो स्वतंत्रता दिवस यानी पंद्रह अगस्त के बाद कभी भी महाराष्ट्र में बड़ा खेला हो सकता है। वैसे 16 या 17 अगस्त को इसकी संभावना जताई जा रही है। राज्य की सियासत में दबी जुबान में जो चर्चा चल रही है उसके मुताबिक अजित पवार को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। जबकि एकनाथ शिंदे को लेकर कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे केंद्र में जा सकते हैं। राज्य की सियासत में एक रसूखदार नेता ने भी यह बात एनबीटी ऑनलाइन से कही है। हालांकि, इन खबरों के पीछे कुछ वजहें भी बताई जा रही है। जिसमें पहली खबर एकनाथ शिंदे की नाराजगी को लेकर कही जा रही है।

दरअसल आज पुणे में चांदनी चौक ब्रिज के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मौजूद रहने वाले थे लेकिन आज वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और नितिन गडकरी, डिप्टी सीएम अजित पवार, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस मौजूद थे। जब अजित पवार से मीडिया एकनाथ शिंदे की गैरहाजिरी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उनकी तबियत ठीक नहीं है।

शिंदे के काम की तारीफ
अजित पवार ने कार्यक्रम के दौरान मंच से सीएम एकनाथ शिंदे के काम की तारीफ भी की। इतना ही नहीं अजित फिलहाल सीएम एकनाथ शिंदे सतारा जिले के मूल गांव दरेगांव गए हुए हैं। इसके पहले जब एकनाथ शिंदे अपने गांव गए थे तब भी उनकी नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, एकनाथ शिंदे ही मुख्यमंत्री रहेंगे और अगला चुनाव भी उनके नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इस बात को देवेंद्र फडणवीस समेत कई बीजेपी नेताओं ने कहा है। लेकिन यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि अजित पवार के सरकार में शामिल होने से शिंदे गुट में भारी नाराजगी है। वहीं बीजेपी के भी कई विधायक मंत्री न बन पाने से नाराज हैं।

सरकार में शीत युद्ध?
महाराष्ट्र सरकार में अजित पवार खेमे के मंत्रियों को संरक्षक मंत्री (पालक मंत्री) के पद से अभी तक दूर ही रखा गया है। इस वजह से भी सरकार में मतभेद नजर आ रहे हैं। ताजा विवाद 15 अगस्त को ध्वजारोहण को लेकर हुआ है। इस बात की चर्चा है कि मंत्री अपने अपने इलाके में झंडा वंदन करना चाहते थे लेकिन तीन दलों की सरकार होने से कोई बात नहीं बन पाई। पालक मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर तीनों दलों में विवाद है, हालांकि सरकार विवाद मानने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन पवार के लोगों को पालक मंत्री भी नहीं बनाया जा रहा।

राज्य के पुणे में जिले में एनसीपी ने अपना दबदबा होने की बात कहकर वहां झंडा फहराने की बात रखी। लेकिन यहां बीजेपी ने भी अपना दावा किया है। दोनों दल पुणे में अपना पालकमंत्री रखना चाहते हैं। जिसके चलते अब यह राज्यपाल के हाथों होगा। वहीं छगन भुजबल नासिक जिले में ध्वजारोहण करने इच्छुक थे, लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई। उन्हें अमरावती जिले की जिम्मेदारी दी गई है।

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