तुर्की
एक डिग्री तापमान और बर्फीले तूफान के बीच ही तुर्की और सीरिया में वह आफत आई, जिसने दुनियाभर को डरा दिया। 7.8, 7.6 और फिर छह की तीव्रता वाले भूकंप ने यहां पर सबकुछ खत्म कर दिया है। 1700 बिल्डिंग्स गिरीं और अब तक करीब 4300 लोगों की मौत की आशंका है। जबकि मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। तुर्की में भूकंप के बाद हर तरफ तबाही का मंजर है और कंक्रीट के ढेर में जिंदगियों की तलाश की जा रही है।
क्यों आया इतना भयानक भूकंप
एल्पाइड बेल्ट की वजह से तुर्की में इतना भयानक भूकंप आया है। पहले भी तुर्की में इतने भयानक भूकंप आ चुके हैं। तुर्की जिस हिस्से में पड़ता है, वहां सबसे ज्यादा सेसमिक गतिविधियां होती हैं। पैसेफिक रंग ऑफ फायर के बाद यह सबसे सक्रिय क्षेत्र है जो भूकंप को आकर्षित करता है। एल्पाइड बेल्ट मं दुनिया के 17 फीसदी सबसे बड़े भूकंप आ चुके हैं।
15000 किलोमीटर तक खतरा
एल्पाइड बेल्ट 15000 किलोमीटर तक है और यह यूरोप, रूस और अफ्रीका की टेक्टॉनिक प्लेट्स से गुजरती है। इसके अलावा पूर्व में हिमालय और भूमध्यसागरीय क्षेत्र और अटलांटिक महासागर में अजोरेस तक जाती है। इस बेल्ट में भूकंप और ज्वालामुखी आने की आशंका सबसे ज्यादा होती है।
मलबे से निकाले गए सोते हुए लोग
तुर्की और सीरिया दोनों ही जगहों पर अब इस बात का डर है कि आने वाले कुछ दिनों में मलबे के अंदर से और ज्यादा लाशें निकल सकती हैं। तापमान खून जमाने वाला है और हजारों की तादाद में लोग मलबे के अंदर दबे हैं। जिस समय भूकंप आया, लोग गहरी नीदं में थे। कई बच्चों और परिवारों को जब मलबे से निकाला गया तो उनकी सांसें बंद हो चुकी थी।
बिना औजार काम कर रहे बचावकर्मी
लोगों को बचाने की कोशिशें इतनी तेजी से की जा रही हैं कि बचावकर्मी किसी भी औजार का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। वो बस किसी तरह लोगों को बचाना चाहते हैं। मगर भूकंप के बाद आने वाले झटके राहतकार्यों में बाधा डाल रहे हैं। तुर्की में साल 1999 में आखिरी बार इतना भयानक भूकंप आया था। उस भूकंप में 18,000 लोगों की मौत हुई थी।
