3 C
London
Monday, May 11, 2026
Homeराष्ट्रीयहत्या के बाद शव के साथ यौन संबंध अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट...

हत्या के बाद शव के साथ यौन संबंध अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

Published on

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के बाद शव के साथ यौन संबंध के एक मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। हाई कोर्ट ने शख्स को रेप के आरोप से बरी कर दिया था, लेकिन हत्या की सजा कायम रही। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) में नेक्रोफिलिया यानी शव के साथ कामुकता को अपराध नहीं माना गया है।

कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में कर्नाटक सरकार की ओर से अडिशनल एडवोकेट जनरल अमन पंवार ने तर्क दिया कि IPC की धारा 375(c) में ‘शरीर’ शब्द को मृत शरीर भी शामिल माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि रेप की परिभाषा के तहत प्रावधान में कहा गया है कि यदि कोई महिला सहमति नहीं दे सकती है तो इसे बलात्कार माना जाएगा। इसी तर्क के आधार पर मृत शरीर भी सहमति नहीं दे सकता, इसलिए यह अपराध बलात्कार की श्रेणी में आना चाहिए। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि नेक्रोफिलिया भारतीय दंड संहिता के तहत कोई अपराध नहीं है, इसलिए वह हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने को इच्छुक नहीं है।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मृत शरीर के साथ यौन संबंध को बलात्कार नहीं माना जा सकता, क्योंकि IPC की धारा 375 और 377 केवल जीवित मनुष्यों पर लागू होती है। धारा 375 और 377 का गहराई से अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि मृत शरीर को ‘व्यक्ति’ या ‘मानव’ नहीं माना जा सकता। इसलिए, इन धाराओं के तहत कोई अपराध नहीं बनता और आरोपी को IPC की धारा 376 के तहत सजा नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि नेक्रोफिलिया एक गंभीर समस्या है और संसद को इसे अपराध घोषित करने के लिए कानून बनाना चाहिए। एक मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी दिसंबर में कहा था कि किसी मृत महिला या बच्ची के साथ यौन अपराध किया जाता है तो उसे IPC की धारा 375 (बलात्कार) या POCSO अधिनियम के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।

कानून में बदलाव की दरकार
अस्पतालों और मुर्दाघरों में युवतियों के शवों के साथ यौन संबंध की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन भारत में ऐसे मामलों के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। नेक्रोफिलिया एक मनो-यौन विकार (psychosexual disorder) है। यह सही समय है कि केंद्र सरकार मृत व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए IPC की धारा 377 में संशोधन करे और नेक्रोफिलिया को अपराध घोषित करे, जैसा कि यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में किया गया है। यह मामला भारतीय दंड संहिता में संशोधन की आवश्यकता को उजागर करता है ताकि मृत व्यक्ति की गरिमा और अधिकारों की रक्षा की जा सके।

Latest articles

PM मोदी बोले- पेट्रोल-डीजल का कम करें उपयोग, भारत में तेल के कुएं नहीं

आज वर्क फ्रॉम होम की जरूरत, एक साल तक सोना न खरीदें बेंगलुरु/हैदराबाद। पीएम नरेंद्र...

भेल गांधी मार्केट में 13 साल बाद हुआ चुनाव, महेंद्र नामदेव ‘मोनू’ बने नए अध्यक्ष

व्यापारी संघ चुनाव: 95 प्रतिशत से अधिक हुआ मतदान, महेंद्र ने 57 मतों के...

भोपाल-जेवर एयरपोर्ट के बीच 1 जुलाई से शुरू होगी पहली फ्लाइट, NCR कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा

भोपाल। राजा भोज एयरपोर्ट से जल्द ही यात्रियों को जेवर एयरपोर्ट के लिए सीधी...

स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 : भोपाल की 80 पिछली गलियां होंगी चमकदार, गंदगी मिलने पर अफसरों पर होगी कार्रवाई

भोपाल। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 को लेकर भोपाल नगर निगम ने शहरभर में बड़े स्तर...

More like this

PM मोदी बोले- पेट्रोल-डीजल का कम करें उपयोग, भारत में तेल के कुएं नहीं

आज वर्क फ्रॉम होम की जरूरत, एक साल तक सोना न खरीदें बेंगलुरु/हैदराबाद। पीएम नरेंद्र...

तमिलनाडु में विजय का होगा ‘राजतिलक’, राज्यपाल से मिले, समर्थन का आंकड़ा हुआ पूरा

चेन्नई। तमिलनाडु में काफी मशक्कत के बाद आखिर टीवीके चीफ विजय को राज्यपाल से...