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महाराष्ट्र में शिंदे, MNS और बीजेपी करेंगे ‘महायुति’, CM के बयान से गठबंधन की चर्चा तेज

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मुंबई

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की बीएमसी समेत राज्य के कई महानगर पालिकाओं में आगामी दिनों में चुनाव होने हैं। ऐसे में महाराष्ट्र की सियासत में ‘महायुति’ होने की चर्चाएं तेज हैं। इस महायुति में बीजेपी, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शिंदे गुट शामिल होगा। अभी तक इस को लेकर किसी भी तरह का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि, तीनों दलों के नेताओं द्वारा अलग-अलग बयान दिए जा रहे हैं। इस मुद्दे पर खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी प्रतिक्रिया दी है। एकनाथ शिंदे ने कहा कि हमारे साथ समान विचारधारा वाले दलों की संख्या बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री शिंदे ने साफ तौर पर इस गठबंधन को लेकर तो कुछ नहीं कहा लेकिन उनके इस बयान से महाराष्ट्र की सियासत में महायुति की चर्चा तेज हो गई है।

महायुति की चर्चा के पीछे कई अहम वजहें भी हैं। सबसे पहली वजह यह है कि दिवाली का उत्सव मनाने के लिए खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे एक कार्यक्रम में शिवाजी पार्क पहुंचे थे। तीनों ही नेताओं ने एक साथ मंच साझा किया था। उस शाम से ही महाराष्ट्र में महायुति के गठन की अटकलें तेज हो गई थीं। इसके अलावा महाराष्ट्र बीजेपी के कई नेताओं ने बीते वक्त में ऐसे बयान दिए हैं। जिसमें यह कहा गया है कि अगर एमएनएस उत्तर भारतीयों को लेकर अपना स्टैंड बदलती है तो गठबंधन करने में कोई दिक्कत नहीं है। इसके अलावा हाल के दिनों में जिस तरह से राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर अंधेरी उपचुनाव में उम्मीदवार वापस लेने की मांग की थी और देवेंद्र फडणवीस का उस मांग को स्वीकार करना। साथ ही राज ठाकरे का आभार व्यक्त करना। यह सब कुछ भविष्य के गठबंधन में नींव का पत्थर साबित हो सकता है।

गठबंधन का कितना असर होगा?
अगर यह गठबंधन हुआ तो आगामी बीएमसी चुनाव में इसका खासा असर पड़ सकता है। जिससे सबसे ज्यादा नुकसान उद्धव ठाकरे गुट को होगा। दरअसल बीएमसी चुनाव में उद्धव ठाकरे गुट बिल्कुल अलग-थलग पड़ता हुआ नजर आ रहा है। क्योंकि महाविकास अघाड़ी गठबंधन के घटक दल कांग्रेस ने इस चुनाव को अकेले खुद के दम पर लड़ने का फैसला किया है। हालांकि, एनसीपी ने पूरी तरह से अपने पत्ते नहीं खोले हैं। दूसरी सबसे बड़ी बात है कि उद्धव ठाकरे के गुट फिलहाल सत्ता से बाहर है। जबकि एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस का गठबंधन है और वो राज्य की सत्ता पर भी काबिज हैं।

इसमें अगर एमएनएस शामिल हो जाती है तो फिर उद्धव ठाकरे की मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं। राज्य या बीएमसी की सियासत में राज ठाकरे की एमएनएस का फिलहाल कोई बड़ा कद नहीं है लेकिन वो उद्धव ठाकरे को मिलने वाले मराठी वोटों में सेंध जरूर लगा सकते हैं। जिसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा। बीजेपी, इस बार किसी भी कीमत पर उद्धव ठाकरे को बीएमसी की सत्ता से हटाने की कोशिशों में जुटी हुई है।

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