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शव इतने कि स्कूल और कोल्ड स्टोरेज को बनाना पड़ा मुर्दाघर… ओडिशा ट्रेन हादसे के बाद का भयावह मंजर

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नई दिल्ली,

ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे को 2 दिन बीत चुके हैं. 2 दिनों से लगातार चौबीसों घंटे घटनास्थल पर राहत बचाव कार्य चल रहा है. दो दिनों के बाद ट्रेन की बोगियों में फंसे सारे शव निकाले जा चुके हैं. हादसे में 275 लोगों की मौत हुई है, जबकि घायलों की संख्या 1100 से अधिक है. अस्पतालों में लावारिस शवों के ढेर लगे हुए हैं. आलम ये है कि अस्पतालों के मुर्दाघरों में जगह नहीं बची है. शवों की संख्या को देखते हुए स्कूल और कोल्ड स्टोरेज को मुर्दाघर में तब्दील कर दिया गया है.

दरअसल, हादसे के बाद परिजन अपने-अपने लोगों की तलाशों में अस्पताल और मुर्दाघरों के चक्कर लगा रहे हैं. वहीं दर्जनों शव अभी ऐसे हैं, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है. बालासोर के बाहाना हाई स्कूल में भी शवों को रखा गया है. यहां जिन कक्षाओं में छात्र बैठा करते हैं, उनमें शव रखे हुए हैं. जिन शवों को पहचान हो जा रही है, उन्हें उनके परिजनों को सौंपा जा रहा है. शवों की तस्वीरें भी जारी की गई हैं, जिन्हें देखकर लोग अपनों की पहचान कर रहे हैं.

187 शवों को भुवनेश्वर शिफ्ट किया गया
बता दें कि हादसे के बाद बालासोर के मुर्दाघरों में जगह न होने के कारण ओडिशा सरकार ने 187 शवों को जिला मुख्यालय शहर बालासोर से भुवनेश्वर शिफ्ट किया था. हालांकि, यहां भी जगह की कमी मुर्दाघर प्रशासन के लिए स्थिति को कठिन बना रही है. इनमें से 110 शवों को एम्स भुवनेश्वर में रखा गया है. वहीं बचे हुए शवों को कैपिटल अस्पताल, अमरी अस्पताल, सम अस्पताल आदि में रखा गया है.

एम्स के मुर्दाघर में रखे गए करीब तीन गुना शव
एम्स भुवनेश्वर के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि यहां शवों को सुरक्षित रखना हमारे लिए भी एक वास्तविक चुनौती है, क्योंकि हमारे पास अधिकतम 40 शवों को रखने की सुविधा है. एम्स के अधिकारियों ने शवों की पहचान होने तक उन्हें सुरक्षित रखने के लिए ताबूत, बर्फ और फॉर्मेलिन रसायन खरीदे हैं. गर्मी के इस मौसम में शवों को रखना वास्तव में मुश्किल है.

‘कोल्ड स्टोरेज में शवों को रखने की व्यवस्था’
ओडिशा की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव शालिनी पंडित ने न्यूज एजेंसी को बताया, “सभी शवों को कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था में रखा गया है. (मुर्दाघरों की कमी के कारण).” यह स्वीकार करते हुए कि प्रशासन के लिए शवों की पहचान एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि पीड़ित विभिन्न राज्यों से थे, मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार ने विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी), भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) और ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (OSDMA) की तीन वेबसाइटों पर यात्रियों का विवरण अपलोड किया है. पहचान की सुविधा के लिए मृत यात्रियों की सूची और तस्वीरें भी वेबसाइटों पर अपलोड की जाती हैं.

अपनों की तलाश में भटक रहे परिजन
हादसे के बाद जगह-जगह से लोग बालासोर अपनों की तलाश में पहुंच रहे हैं. राहत बचाव कार्य खत्म होने के बाद अब अस्पताल से लेकर मुर्दाघरों तक में जाकर परिजन अपनों को ढूंढ रहे हैं. कोरोमंडल एक्सप्रेस में यात्रा करने वाले बिहार के सीतामढ़ी निवासी मनोज कुमार सहनी के परिजन भी रविवार को बालासोर पहुंचे. उनके भाई सुनील कुमार साहनी और दिलीप साहनी उनकी तलाश में ओडिशा के एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते नजर आए.

पीड़ितों को रेलवे ने अब तक दिए 100 करोड़ रुपये
हादसे में घायल और मृत व्यक्तियों के परिवारव रिश्तेदारों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने 139 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं. रेलवे ने 24×7 फोन कॉल्स अटेंड करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त किया है. साथ ही रेलवे की तरफ से मृत्यु के मामले में 10 लाख रुपये, गंभीर चोटों के लिए 2 लाख रुपये और मामूली चोटों के लिए 50,000 रुपये देना शुरू कर दिया गया है. अब तक रेलवे ने 100 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है. 285 मामलों में अनुग्रह राशि के रूप में 3.22 करोड़ (11 मौत के मामले, 50 गंभीर चोट के मामले, 224 साधारण चोट के मामले). भारतीय रेलवे 7 स्थानों (सोरो, खड़गपुर, बालासोर, खंटापारा, भद्रक, कटक, भुवनेश्वर) पर अनुग्रह राशि का भुगतान कर रहा है.

बुधवार से चालू हो जाएगा पूरा ट्रैक
रेल मंत्री ने बताया है कि बुधवार सुबह तक यह ट्रैक चालू हो जाएगा. उन्होंने कहा था कि सभी शव निकाल लिए गए हैं और हमारा लक्ष्य बुधवार सुबह तक मरम्मत का काम खत्म करने का है ताकि इस ट्रैक पर ट्रेनें दौड़ना शुरू हो सकें. उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों पर तेजी से काम चल रहा है. कल रात एक ट्रैक काम लगभग पूरा हो गया. आज एक ट्रैक की पूरी मरम्मत करने की कोशिश रहेगी. सभी डिब्बों को हटा दिया गया है. शवों को निकाल लिया गया है. कार्य तेजी से चल रहा है. कोशिश है की बुधवार की सुबह तक सामान्य रूट चालू हो जाए.”

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